शिवपुरी। शिवपुरी नगर पालिका प्रशासन की रगो मे कामचोरी और लापरवाही का रसायन किस प्रकार घुला हुआ है, जब उजागर हुआ कि नगर पालिका की स्थापना कक्ष मे कर्मचारियो के भविष्य का कचरा बना दिया था,कर्मचारियो की जो लिस्ट उनका भविष्य गढती उस फाइल को डीकंपोज होने के लिए छोड दिया गया,जो काम 2017 मे हो जाना चाहिए था वह अब तक नही हुआ है। जैसा विदित है कि नगर पालिका के सफाई कर्मचारियो ने अपनी मांगो को लेकर हडताल कर दी थी आज हडताल को 8वां दिन है इस कारण शहर की सडको पर गंदगी का ग्रहण लग चुका है,नगर सरकार की लापरवाही की सजा कर्मचारी तो भोग ही रहे है साथ मे शहर को नागरिक भी इस सजा को झेल रहे है।
सफाई कर्मचारियों की मांग है कि 2007 और उससे पहले से काम कर रहे लोगों के विनियमितीकरण किया जाए, हैरानी की बात यह है कि पूर्व नपाध्यक्ष मुनालाल कुशवाह के समय साल 2017 में ही पीआईसी (PIC) से 240 कर्मचारियों की लिस्ट पास हो चुकी थी। लेकिन तत्कालीन सीएमओ, स्थापना बाबू और जनप्रतिनिधियों की कामचोरी और बदनीयती के कारण इसे वरिष्ठ कार्यालय भेजने के बजाय एक बस्ते में बांधकर दबा दिया गया। कर्मचारियों से लगातार काम लिया जाता रहा, लेकिन उनका हक फाइलों में घोंट दिया गया।
गंदगी के दबाव में खुला 9 साल पुराना राज
हड़तालियों के भारी दबाव और शहर में फैले गंदगी के ग्रहण के चलते रविवार को छुट्टी के दिन एसडीएम आनंद राजावत की मौजूदगी में स्थापना शाखा खुलवाई गई। जब पुराना रिकॉर्ड खंगाला गया, तो 9 साल पुरानी 240 कर्मचारियों की फाइल और 15 पेजों की 145 कर्मचारियों की नई विनियमितीकरण लिस्ट बाहर आ गई। अगर शहर कूड़े से न पटता, तो शायद यह लिस्ट कभी बाहर ही नहीं आती।
हक मिला तो गायब हुए यूनियन नेता
इस पूरी घटना में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब देर शाम लिस्ट तैयार हो गई। जिन कर्मचारियों के हक के लिए यूनियन लड़ रही थी, लिस्ट बनते ही अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन के जिलाध्यक्ष संतोष कोड़े और कांग्रेस कर्मचारी यूनियन अध्यक्ष मनोज लाहौरी सहित अन्य पदाधिकारी अपने फोन बंद करके गायब हो गए। नेताओं के इस तरह भागने से इसे एक सोचे-समझे षड्यंत्र के रूप में भी देखा जा रहा है। हड़ताली कर्मचारी आज भी उसी तपिश में बैठे हैं, जबकि उनके नेता कठघरे में हैं।
जिम्मेदार झाड़ रहे पल्ला
पूर्व अध्यक्ष मुनालाल कुशवाह का कहना है कि उन्होंने पीआईसी से लिस्ट पास कर दी थी और कोई फाइल नहीं रोकी, यह तत्कालीन सीएमओ की जिम्मेदारी थी। वहीं वर्तमान सीएमओ यशवंत राठौर का कहना है कि 145 और 9 साल पुरानी 240 नामों की लिस्ट तैयार कर चस्पा की जा रही है, लेकिन यूनियन नेता बातचीत से बच रहे हैं।
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