बदरवास। रेलवे लाइन तो यहां से गुजरती है, ट्रेनों की रफ्तार भी रोजाना दिखाई देती है, लेकिन जब बात महत्वपूर्ण एक्सप्रेस ट्रेनों में सफर की आती है तो बदरवास के यात्रियों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। कई लंबी दूरी की ट्रेनें स्टेशन से गुजरती हैं, लेकिन ठहराव नहीं होने के कारण यात्रियों को गुना या शिवपुरी जाकर ट्रेन पकड़ने की मजबूरी बनी हुई है। शिक्षा, रोजगार, कारोबार, इलाज और धार्मिक यात्राओं के लिए रेल पर निर्भर हजारों लोगों की इस समस्या को अब स्थानीय स्तर से उठाकर दिल्ली तक पहुंचाया गया है।
बदरवास रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं के विस्तार और महत्वपूर्ण ट्रेनों के ठहराव की मांग को लेकर रेलवे सुविधा संघर्ष समिति ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष, पश्चिम मध्य रेलवे के महाप्रबंधक और मंडल रेल प्रबंधक को 11 सूत्रीय मांग-पत्र भेजा है। समिति ने बदरवास स्टेशन पर पांच प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव के साथ-साथ दूसरा प्लेटफॉर्म, फुटओवर ब्रिज, बड़ा टीनशेड, टिकट आरक्षण काउंटर, आरपीएफ आउट पोस्ट, कोच डिस्प्ले बोर्ड और माल परिवहन के लिए रैक प्वाइंट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
पांच बड़ी ट्रेनों के ठहराव की सबसे अहम मांग
रेलवे सुविधा संघर्ष समिति ने बदरवास स्टेशन पर पांच प्रमुख ट्रेनों के ठहराव की मांग की है। इनमें
उज्जैनी एक्सप्रेस (14309/14310)
झांसी-बांदा एक्सप्रेस (22195/22196)
लक्ष्मीबाई नगर-योगनगरी ऋषिकेश एक्सप्रेस (14317/14318)
ग्वालियर-बेंगलुरु एक्सप्रेस (11085/11086)
अमृतसर-इंदौर एक्सप्रेस (19325/19326)
समिति का कहना है कि इन ट्रेनों का बदरवास में ठहराव मिलने से क्षेत्र के यात्रियों को दिल्ली, मुंबई, हरिद्वार, ऋषिकेश, अमृतसर, बेंगलुरु, इंदौर और उज्जैन जैसे प्रमुख शहरों के लिए रेल कनेक्टिविटी में बड़ी राहत मिलेगी।
अभी ट्रेन के लिए जाना पड़ता है गुना या शिवपुरी
बदरवास स्टेशन गुना-ग्वालियर रेलखंड का महत्वपूर्ण स्टेशन है। इसके आसपास बड़ी आबादी निवास करती है और स्टेशन से शिवपुरी के अलावा गुना और अशोकनगर जिलों के कई क्षेत्र जुड़े हुए हैं। क्षेत्र के विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए बड़े शहरों का रुख करते हैं। व्यापारी अपने कारोबार के सिलसिले में दूसरे शहरों में आते-जाते हैं, किसान कृषि संबंधी कामों के लिए यात्रा करते हैं और मरीजों को बेहतर इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। ऐसे में महत्वपूर्ण ट्रेनों का बदरवास में ठहराव नहीं होने से यात्रियों को पहले सड़क मार्ग से गुना या शिवपुरी पहुंचना पड़ता है। इसके बाद वहां से ट्रेन पकड़नी पड़ती है। इससे समय और पैसा दोनों अतिरिक्त खर्च होते हैं। समिति का कहना है कि अगर प्रमुख ट्रेनों का बदरवास में ठहराव शुरू हो जाए तो आसपास के हजारों यात्रियों को सीधे अपने क्षेत्र से ही लंबी दूरी की रेल सेवा उपलब्ध हो सकेगी।
दूसरा प्लेटफॉर्म और फुटओवर ब्रिज भी जरूरी
समिति ने केवल ट्रेनों के स्टॉपेज तक मांग सीमित नहीं रखी है। स्टेशन की मौजूदा यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए दूसरे प्लेटफॉर्म और फुटओवर ब्रिज की मांग भी की गई है। समिति के अनुसार, यात्रियों की संख्या और भविष्य में बढ़ने वाली रेल गतिविधियों को देखते हुए स्टेशन पर अतिरिक्त प्लेटफॉर्म की जरूरत है। फुटओवर ब्रिज बनने से यात्रियों को एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाने में सुविधा होगी और रेलवे ट्रैक पार करने जैसी जोखिमपूर्ण स्थिति से भी बचा जा सकेगा। इसके अलावा यात्रियों के लिए बड़ा टीनशेड, टिकट आरक्षण काउंटर और कोच डिस्प्ले बोर्ड लगाने की मांग की गई है, ताकि स्टेशन पर यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
आरपीएफ आउट पोस्ट और रैक प्वाइंट की मांग
समिति ने बदरवास में आरपीएफ आउट पोस्ट स्थापित करने की मांग भी की है। इसके पीछे स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बताई गई है। वहीं व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए स्टेशन पर माल परिवहन के लिए रैक प्वाइंट बनाने का सुझाव दिया गया है। समिति का मानना है कि यदि यहां से व्यापारिक माल की लोडिंग-अनलोडिंग की सुविधा विकसित होती है तो स्थानीय व्यापार और उद्योग को इसका सीधा फायदा मिल सकता है।
अमृत भारत स्टेशन योजना में शामिल करने की मांग
बदरवास रेलवे स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए समिति ने इसे अमृत भारत स्टेशन योजना में शामिल करने की मांग की है। समिति का कहना है कि बदरवास का भौगोलिक और आर्थिक महत्व देखते हुए स्टेशन का आधुनिक तरीके से विकास किया जाना चाहिए। यात्रियों के लिए बेहतर प्रतीक्षालय, प्लेटफॉर्म सुविधाएं, सूचना प्रणाली और अन्य आधुनिक व्यवस्थाएं विकसित होने से स्टेशन की तस्वीर बदल सकती है।
सिर्फ स्टॉपेज नहीं, नई ट्रेनों का भी प्रस्ताव
रेलवे सुविधा संघर्ष समिति ने अपने 11 सूत्रीय मांग-पत्र में सिर्फ मौजूदा ट्रेनों के ठहराव की मांग नहीं की, बल्कि क्षेत्र की कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए नई ट्रेनों के संचालन और मौजूदा ट्रेनों के विस्तार का भी सुझाव दिया है। समिति ने गुना-ग्वालियर के बीच मेमू ट्रेन चलाने की मांग की है। इसके साथ ही दिल्ली-इंदौर के बीच वंदे भारत अथवा अन्य ट्रेन चलाने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा इंदौर-उज्जैन से अयोध्या के लिए गुना-शिवपुरी होकर नई ट्रेन चलाने की मांग की गई है। समिति ने मालवा एक्सप्रेस और इंदौर-बरेली एक्सप्रेस को भी गुना-शिवपुरी होकर चलाने का सुझाव दिया है।
कई ट्रेनों के फेरे बढ़ाने और विस्तार की मांग
समिति ने इंदौर-ऊना हिमाचल एक्सप्रेस को प्रतिदिन चलाने की मांग की है। इसके अलावा उधना-बनारस और ग्वालियर-दौंड एक्सप्रेस का संचालन सप्ताह में चार दिन करने का आग्रह किया गया है। वहीं कोटा-इटावा एक्सप्रेस को कानपुर तक, ग्वालियर-बीना पैसेंजर को कटनी-जबलपुर तक और ग्वालियर-भोपाल इंटरसिटी को दिल्ली तक विस्तारित करने का सुझाव भी दिया गया है।
विद्यार्थियों से लेकर मरीजों और व्यापारियों तक को फायदा
समिति के गोविंद अवस्थी, मनीष बैरागी और कपिल परिहार ने कहा कि बदरवास में रेल सुविधाओं का विस्तार केवल यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर क्षेत्र की शिक्षा, रोजगार, व्यापार, चिकित्सा, कृषि, उद्योग और पर्यटन पर भी पड़ेगा। समिति के गोविंद अवस्थी ने बताया कि बदरवास स्टेशन से आसपास के हजारों लोग जुड़े हुए हैं और रेल उनके लिए आवागमन का महत्वपूर्ण साधन है। महत्वपूर्ण ट्रेनों के ठहराव के अभाव में उन्हें गुना या शिवपुरी जाना पड़ता है। इसलिए रेल मंत्रालय से मांग की गई है कि क्षेत्र की जरूरत को देखते हुए मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जाए।

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