करैरा। शिवपुरी जिले के करैरा विकासखण्ड में स्थित छितीपुर गांव के शासकीय हाईस्कूल मे बुधवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कार्यक्रम के तहत आयरन की गोलिया बच्चो को दी गई थी। इन गोलियो को खाने के कारण 4 बच्चो की अचानक से तबीयत बिगड गई, बीमार स्टूडेंटस में तीन छात्राएं और एक छात्र शामिल हैं। स्कूल प्रबंधन ने बिना देर किए चारों को उपचार के लिए करैरा स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उनका उपचार किया। फिलहाल सभी विद्यार्थियों की हालत स्थिर बताई जा रही है।
एक-एक गोली देने की बात, फिर कैसे बिगड़ी तबीयत
स्कूल के प्राचार्य जगत राय के अनुसार विद्यार्थियों को आयरन की एक-एक गोली दी गई थी। गोली खाने के कुछ समय बाद चार विद्यार्थियों ने तबीयत खराब होने की शिकायत की। इसके बाद उन्हें तत्काल स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। प्राचार्य ने आशंका जताई है कि संभव है कि कुछ विद्यार्थियों ने आपस में गोलियां लेकर निर्धारित मात्रा से अधिक सेवन कर लिया हो।
स्कूलों में दी जाती है आयरन की गोली
आयरन-फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन का उद्देश्य बच्चों और किशोरों में एनीमिया की रोकथाम और नियंत्रण करना है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कार्यक्रम में स्कूल जाने वाले 10 से 19 वर्ष के किशोर-किशोरियों को निर्धारित कार्यक्रम के तहत आयरन-फोलिक एसिड की गोली दी जाती है,लेकिन यह प्रक्रिया निगरानी मे कराई जाती है। यही वजह है कि स्कूलों में दवा वितरण के दौरान किस विद्यार्थी को कितनी गोली दी गई, गोली उसी विद्यार्थी ने खाई या नहीं और किसी विद्यार्थी ने अतिरिक्त गोली तो नहीं ले ली, इन बातों पर निगरानी रखना महत्वपूर्ण है।
स्वास्थ्य विभाग ने किया स्कूल का निरीक्षण
चार विद्यार्थियों की तबीयत बिगड़ने की सूचना के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने स्कूल का निरीक्षण किया। बीएमओ डॉ. नारायण कुशवाह ने चार विद्यार्थियों के बीमार होने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों को करैरा स्वास्थ्य केंद्र में उपचार दिया गया और अब उनकी हालत स्थिर है।
बीएमओ ने स्वयं भी स्कूल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। स्वास्थ्य विभाग अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि विद्यार्थियों की तबीयत किस वजह से बिगड़ी। इसमें यह भी देखा जा रहा है कि विद्यार्थियों ने कितनी मात्रा में दवा का सेवन किया था और क्या चारों में सामने आए लक्षण आयरन की गोली के सामान्य दुष्प्रभाव से जुड़े थे या इसके पीछे कोई अन्य कारण था।
घटना ने दवा वितरण की निगरानी पर उठाए सवाल
स्कूल में आयरन की गोलियां बांटे जाने के बाद चार विद्यार्थियों के एक साथ बीमार पड़ने की घटना ने दवा वितरण की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि अभी किसी स्तर पर लापरवाही की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन घटना के बाद यह जरूर सामने आया है कि विद्यार्थियों को दवा देने के साथ-साथ उसके सेवन की निगरानी भी बेहद जरूरी है।
फिलहाल छितीपुर स्कूल के चारों विद्यार्थियों की हालत स्थिर है,स्कूल और स्वास्थ्य विभाग ने अपना पहला स्पष्टीकरण दे दिया है कि हो सकता है कि बच्चो ने आपस मे गोलिया बांट ली हो और निर्धारित मात्रा से अधिक गोलियो का सेवन कर लिया हो इस कारण बच्चो की तबीयत बिगडी है,लेनिक इस पूरे मामले को लेकर सवाल भी खडे रहे है।
क्या प्रशासन ने बांटी गई आयरन की गोलिया जब्त की है उनकी जांच की जाऐगी,वही दूसरा ओर अहम सवाल बच्चो को आयरन की गोलिया बांटी जा रही थी उस समय निगरानी कौन कर रहा था,अगर बच्चो ने एक से अधिक गोलियो का सेवन किया है तो इसमे किसकी गलती है बच्चो की या फिर स्कूल प्रबंधन की,इस पूरे प्रकरण मे स्कूल प्रबंधन यह स्टेटमेंट देकर बच नही सकता है कि हो सकता है कि बच्चो ने एक से अधिक मात्रा मे गोलियो का सेवन कर लिया हो
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