शिवपुरी। अगर आप परिवार के साथ अयोध्या में रामलला के दर्शन की तैयारी कर रहे हैं और होटल या धर्मशाला की ऑनलाइन बुकिंग करने वाले हैं, तो जरा सावधान हो जाइए। गूगल पर दिखाई देने वाली हर वेबसाइट और व्हाट्सएप पर मिलने वाला हर बुकिंग नंबर असली हो, यह जरूरी नहीं है। अयोध्या में बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को निशाना बनाकर साइबर ठगी का मामला सामने आया है। शिवपुरी निवासी एक श्रद्धालु भी इसी तरह फर्जी वेबसाइट के जाल में फंसकर हजारों रुपए गंवा बैठे।
गूगल पर खोजी धर्मशाला, खुल गई ठगी की वेबसाइट
शिवपुरी निवासी संतोष कुमार 19 अगस्त को परिवार के साथ अयोध्या पहुंचे थे। रात में उन्होंने परिवार के ठहरने के लिए होटल और धर्मशाला की तलाश शुरू की। इसके लिए उन्होंने गूगल पर अयोध्या की धर्मशालाओं को सर्च किया।
इसी दौरान उन्हें बिरला धर्मशाला के नाम से एक वेबसाइट दिखाई दी। वेबसाइट देखने में वास्तविक जैसी लगी, इसलिए संतोष ने उस पर दिए गए संपर्क माध्यम से बातचीत शुरू कर दी। बातचीत व्हाट्सएप के जरिए हुई और कमरे की बुकिंग का सौदा तय हो गया। ठग ने संतोष को बताया कि तीन बेड का कमरा 1650 रुपए और दो बेड का कमरा 1250 रुपए में मिल जाएगा। दोनों कमरों के लिए कुल 2800 रुपए का भुगतान करा लिया गया।
एक भुगतान के बाद शुरू हुआ रकम ऐंठने का खेल
संतोष को लगा कि कमरे की बुकिंग हो गई है, लेकिन इसके बाद ठग ने नया बहाना शुरू कर दिया। उसने तकनीकी गड़बड़ी बताते हुए पहले 1600 रुपए और फिर 1200 रुपए अलग-अलग जमा करने के लिए कहा। इसके बाद भी ठग नहीं रुका। तीसरी बार करीब 2800 रुपए की राशि मांगी गई और कहा गया कि अतिरिक्त रकम बाद में रिफंड कर दी जाएगी। बार-बार पैसे मांगे जाने पर संतोष को शक हुआ। उन्होंने जब ठग से सवाल-जवाब शुरू किए तो वह टालमटोल करने लगा। कुछ समय बाद व्हाट्सएप के मैसेज डिलीट कर दिए गए और मोबाइल फोन बंद कर लिया गया। इसके बाद संतोष को समझ आया कि वह होटल की बुकिंग नहीं, बल्कि साइबर ठगी के जाल में फंस चुके हैं।
साइबर सेल की जांच में हरियाणा तक पहुंची लोकेशन
पीड़ित ने मामले की शिकायत यूपी साइबर सेल में दर्ज कराई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि जिस खाते में फ्रॉड की रकम पहुंची, वह शशि कुमार नाम के व्यक्ति के नाम से बताया जा रहा है। साइबर सेल की जांच में ठग की लोकेशन हरियाणा में सामने आने की जानकारी मिली है।पीड़ित की ठग से जिस मोबाइल नंबर पर बातचीत हुई, उस नंबर पर खान बॉय नाम दिखाई दे रहा था। मामले में पुलिस और साइबर सेल तकनीकी माध्यमों से ठगी करने वाले व्यक्ति तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
केवल बिरला धर्मशाला ही नहीं, दूसरे नामों से भी फर्जी पोर्टल
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक अयोध्या में मौजूद धर्मशालाओं और होटल के नाम पर फर्जी वेबपेज बनाए जाने की आशंका है। बिरला धर्मशाला के अलावा जानकी महल और मानस भवन जैसे नामों का इस्तेमाल कर भी फर्जी पोर्टल बनाए जाने की बात सामने आई है। साइबर ठग इन वेबसाइटों को इस तरह तैयार करते हैं कि पहली नजर में श्रद्धालु को यह वास्तविक बुकिंग वेबसाइट ही लगती है। श्रद्धालु जैसे ही वेबसाइट पर दिए नंबर पर संपर्क करता है, उसे व्हाट्सएप पर बुकिंग कराने के लिए कहा जाता है। इसके बाद एडवांस, सिक्योरिटी, तकनीकी समस्या या रिफंड के नाम पर रकम जमा कराने का सिलसिला शुरू हो जाता है।
रामलला के दर्शन की खुशी कहीं साइबर ठगी में न बदल जाए
अयोध्या में देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। बाहर से आने वाले परिवारों के लिए होटल या धर्मशाला की ऑनलाइन बुकिंग सुविधाजनक होती है, लेकिन इसी सुविधा का फायदा साइबर ठग उठा रहे हैं।
ऐसे में श्रद्धालुओं को किसी भी वेबसाइट पर आंख बंद करके भरोसा करने के बजाय पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बुकिंग का नंबर और वेबसाइट संबंधित होटल या धर्मशाला के आधिकारिक माध्यम से ही मिली है। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अलग-अलग खातों में रकम जमा करने से बचना चाहिए।
सबसे जरूरी बात यह है कि अगर कोई व्यक्ति बुकिंग के बाद 'तकनीकी समस्या', 'रिफंड लेने के लिए भुगतान', 'सिक्योरिटी राशि' या किसी अन्य बहाने से बार-बार पैसे मांगता है, तो तत्काल सतर्क हो जाएं। यही छोटी-सी सावधानी श्रद्धालुओं को हजारों रुपए की साइबर ठगी से बचा सकती है।
अयोध्या जाने वाले श्रद्धालु इन बातों का रखें ध्यान
गूगल सर्च में मिली वेबसाइट को ही आधिकारिक मानकर बुकिंग न करें।
होटल या धर्मशाला की बुकिंग के लिए आधिकारिक वेबसाइट और सत्यापित संपर्क नंबर की पुष्टि करें।
व्हाट्सएप पर भेजे गए अनजान लिंक से भुगतान करने से बचें।
बुकिंग के बाद बार-बार अतिरिक्त रकम मांगी जाए तो भुगतान न करें।
रिफंड लेने के लिए पहले पैसे जमा करें' जैसे झांसे से सावधान रहें।
किसी अनजान खाते में रकम भेजने से पहले उसकी पूरी जानकारी की पुष्टि करें।
ठगी होने की आशंका पर तुरंत बैंक और साइबर अपराध से संबंधित आधिकारिक माध्यमों से शिकायत करें।
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