शिवपुरी का नया ट्रेंड, टावर पर चढ़कर ध्यान ध्यानाकर्षण, यहां तो कचरे से परेशान था

vikas
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shivpuri samachar

शिवपुरी। एक समय था जब मोबाइल टावर की पहचान सिर्फ इतनी होती थी कि वह मोबाइल में बेहतर नेटवर्क और तेज इंटरनेट पहुंचाता है। टावर पर लगी 4जी और 5जी की डिवाइस लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी देती थीं। लेकिन शिवपुरी जिले में अब मोबाइल टावर की पहचान बदलती नजर आ रही है। यहां टावर अब केवल सिग्नल नहीं, बल्कि सरकारी सिस्टम को सिग्नल देने का माध्यम बनते जा रहे हैं।

बीते 03 दिनों में जिले में दो ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें अपनी समस्या का समाधान नहीं मिलने से परेशान लोग सीधे मोबाइल टावर पर चढ़ गए। ऐसा लगने लगा है कि शिकायतों की फाइलें भले ही दफ्तरों में दब जाएं, लेकिन टावर पर चढ़ते ही पूरा प्रशासन हरकत में आ जाता है,कुल मिलाकर यह भी लिख सकते है कि शिवपुरी मे मोबाइल टावर पर चढ कर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया जाता है। 

पहली घटना: जमीन विवाद और तहसील से सीधे टावर तक
3 दिन पहले नरवर तहसील में जमीन के सीमांकन और बंटवारे को लेकर विवाद में एक युवक तहसीलदार से बहस के बाद तहसील परिसर में लगे मोबाइल टावर पर चढ़ गया। ग्रामीण कृष्णा रावत** का कहना था कि जमीन उसके पिता की मेहनत की कमाई है और वह उसे किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेगा। करीब एक घंटे तक युवक टावर पर बैठा रहा। नीचे पुलिस, प्रशासन और परिजन उसे मनाते रहे। उसकी मां तो बेटे को बचाने की गुहार लगाते हुए तहसील कार्यालय में रखे तख्त पर सिर पटकने लगी। आखिरकार अधिकारियों के आश्वासन के बाद युवक नीचे उतरा।

दूसरी घटना: कचरे के ढेर से परेशान युवक चढ़ा टावर पर
इस घटना के महज 24 घंटे बाद शुक्रवार शाम सिरसौद थाना क्षेत्र के खरई-खोरघार गांव में फिर वही दृश्य देखने को मिला। कुलदीप परिहार अपने घर के रास्ते पर लंबे समय से पड़े कचरे के ढेर से परेशान था। कई बार पंचायत में शिकायत करने के बावजूद जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो उसने गांव के मोबाइल टावर पर चढ़कर विरोध दर्ज करा दिया। टावर पर युवक के चढ़ते ही पूरे गांव में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। पुलिस मौके पर पहुंची और करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद युवक को सुरक्षित नीचे उतारा गया।

क्या टावर ही बनेंगे नई जनसुनवाई
इन दोनों घटनाओं ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आखिर ऐसी नौबत क्यों आ रही है कि लोगों को अपनी बात सुनाने के लिए 100 फीट ऊंचे टावर पर चढ़ना पड़ रहा है? क्या पंचायत, तहसील और प्रशासनिक दफ्तरों में शिकायतों का समाधान समय पर नहीं हो रहा? क्या आम आदमी को यह भरोसा नहीं रह गया कि उसकी समस्या बिना हंगामा किए भी सुनी जाएगी?

व्यंग्य यही है कि जिस टावर का काम मोबाइल तक सिग्नल पहुंचाना था, वह अब जनसुनवाई टावर बनते जा रहे है प्रशासन नही सुन रहा तो टावर पर ऊपर चढ़ जाओ! शिवपुरी में 3 दिन के भीतर सामने आई ये दो घटनाएं महज संयोग नहीं, बल्कि व्यवस्था के लिए चेतावनी हैं। यदि छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान समय पर नहीं होगा तो मोबाइल टावरों की यह नई पहचान आने वाले दिनों में और भी खतरनाक रूप ले सकती है। आखिर किसी भी समस्या का समाधान टावर पर चढ़ना नहीं, बल्कि प्रशासन का समय पर नीचे उतरकर जनता की बात सुनना है।

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