शिवपुरी,तहसील के बाबू पर डीएपी यूरिया मे घोटाला करने पर मामला दर्ज

vikas
0
shivpuri samachar

करैरा। शिवपुरी जिले की करैरा तहसील में किसान पंजीयन के नाम पर हुए बड़े फर्जीवाड़े ने प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है। तहसीलदार की आधिकारिक लॉगिन आईडी का कथित दुरुपयोग कर फर्जी फार्मर आईडी बनाई गईं, नकली किसान पंजीकृत किए गए और उनके नाम पर ई-टोकन जारी कर लाखों रुपये का डीएपी, यूरिया और एनपीके खाद उठा लिया गया। मामले के खुलासे के बाद तहसील के कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है, जबकि पूरे प्रकरण की जांच के लिए कलेक्टर ने विशेष जांच दल (SIT जैसी टीम) गठित कर तीन दिन में रिपोर्ट मांगी है।

तहसील की लॉगिन आईडी से शुरू हुआ पूरा खेल
जानकारी के अनुसार करैरा तहसीलदार की लॉगिन आईडी का इस्तेमाल कर ई-विकास पोर्टल पर फर्जी फार्मर आईडी तैयार की गईं। इसके बाद ऐसे लोगों के नाम किसान पंजीयन कर दिए गए, जिनका न संबंधित गांव से कोई संबंध था और न ही उनके नाम कृषि भूमि दर्ज थी। इन्हीं फर्जी पंजीयनों के आधार पर ई-टोकन जारी किए गए और सरकारी खाद का उठाव कर लिया गया। प्रारंभिक जांच में लाखों रुपये मूल्य का डीएपी, यूरिया और एनपीके खाद फर्जी तरीके से उठाए जाने की बात सामने आई है।

गलती स्वीकारने के बाद कबूलनामा लेकर भागने का आरोप
मामले के उजागर होने के बाद करैरा तहसील के बाबू प्रदीप कुमार शर्मा ने करैरा थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मवीर लोधी, निवासी ग्राम वीरा (हाल निवासी करैरा), के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।

एफआईआर के अनुसार धर्मवीर लोधी को किसानों के लिए ई-विकास पोर्टल पर खाद वितरण संबंधी टोकन जारी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। आरोप है कि उसने इस अधिकार का दुरुपयोग करते हुए फर्जी किसान पंजीयन और टोकन जारी किए एफआईआर में यह भी उल्लेख है कि पूछताछ के दौरान धर्मवीर ने लिखित रूप से अपनी गलती स्वीकार की थी, लेकिन बाद में मौका देखकर वह अपना कथित कबूलनामा (मूल बयान) कार्यालय से लेकर फरार हो गया। इससे पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।

तहसीलदार के निर्देशों की अनदेखी का आरोप
जांच में सामने आया है कि तहसीलदार ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि व्हाट्सएप पर ओटीपी प्राप्त होने के बाद संबंधित हल्का पटवारी से सत्यापन कराकर ही टोकन सत्यापित किए जाएं। आरोप है कि कंप्यूटर ऑपरेटर ने इस पूरी प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए बिना सत्यापन के फर्जी पंजीयन और टोकन जारी कर दिए। एफआईआर में इसे तकनीकी भूल नहीं, बल्कि सुनियोजित आपराधिक साजिश बताया गया है।

चार नामों ने खोली पूरे घोटाले की पोल
जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि जिन चार लोगों—सेतु लोधी, महेश, यशवंत और छोटू के नाम पर खाद वितरण के लिए टोकन जारी किए गए, वे संबंधित क्षेत्र के निवासी ही नहीं हैं। हल्का पटवारियों की आधिकारिक रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन चारों के नाम पर उस क्षेत्र में कोई कृषि भूमि दर्ज नहीं है। अधिकारियों का मानना है कि यही तथ्य पूरे फर्जीवाड़े की सबसे मजबूत कड़ी साबित हो सकता है।

ऑपरेटर ने लगाए तहसीलदार पर गंभीर आरोप
दूसरी ओर आरोपी कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मवीर लोधी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। धर्मवीर का कहना है कि 23 जून को एसडीएम के आदेश से उसकी ड्यूटी सीएम हेल्पलाइन और शिकायत शाखा में लगा दी गई थी। इसके बावजूद तहसीलदार ने कार्यालय समय समाप्त होने के बाद उसे बुलाकर किसान पंजीयन का काम कराया। उसका आरोप है कि बाद में तहसीलदार ने खुद को बचाने के लिए उससे मनमाफिक बयान लिखवाने का दबाव बनाया। जब उसने ऐसा करने से इनकार किया तो उसके खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज करा दी गई।

कलेक्टर ने बनाई जांच टीम, तीन दिन में मांगी रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर अर्पित वर्मा ने रविवार को विशेष जांच दल गठित कर दिया है। जांच दल में करैरा एसडीएम अनुपम शर्मा को नोडल अधिकारी बनाया गया है। टीम में अनुविभागीय कृषि अधिकारी मनोज रघुवंशी, तहसीलदार ललित शर्मा, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, संबंधित क्षेत्र के पटवारी और कृषि विस्तार अधिकारी को शामिल किया गया है। कलेक्टर ने टीम को तीन दिन के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

अन्य तहसीलों में भी होगी जांच
जिला किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के उप संचालक मुनेश शाक्य ने बताया कि करैरा में फर्जी किसान पंजीयन के जरिए खाद उठाने का मामला सामने आया है। पुलिस में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और कलेक्टर के निर्देश पर जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि केवल करैरा ही नहीं, बल्कि जिले की अन्य तहसीलों में हुए किसान पंजीयनों की भी जांच कराई जाएगी, ताकि यदि कहीं और भी इसी तरह का फर्जीवाड़ा हुआ हो तो उसका भी खुलासा किया जा सके।

जांच के घेरे में पूरी व्यवस्था
यह मामला सिर्फ एक कंप्यूटर ऑपरेटर तक सीमित नहीं माना जा रहा। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि बिना पटवारी सत्यापन के फर्जी किसान पंजीयन कैसे स्वीकृत हुए, ई-टोकन कैसे जारी हुए और लाखों रुपये का खाद वितरण होने तक किसी स्तर पर अनियमितता क्यों नहीं पकड़ी गई। ऐसे में जांच रिपोर्ट आने के बाद इस घोटाले में और भी अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।



Post a Comment

0Comments

प्रतिक्रियाएं मूल्यवान होतीं हैं क्योंकि वो समाज का असली चेहरा सामने लातीं हैं। अब एक तरफा मीडियागिरी का माहौल खत्म हुआ। संपादक जो चाहे वो जबरन पाठकों को नहीं पढ़ा सकते। शिवपुरी समाचार आपका अपना मंच है, यहां अभिव्यक्ति की आजादी का पूरा अवसर उपलब्ध है। केवल मूक पाठक मत बनिए, सक्रिय साथी बनिए, ताकि अपन सब मिलकर बना पाएं एक अच्छी और सच्ची शिवपुरी। आपकी एक प्रतिक्रिया मुद्दों को नया मोड़ दे सकती है। इसलिए प्रतिक्रिया जरूर दर्ज करें।

Post a Comment (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!