शिवपुरी। शिवपुरी नगर पालिका के पूर्व सीएमओ कमलेश शर्मा और अदिति सेल्स एंड हार्टीकल्चर इंदौर के पाप का बोझ अब शहर की जनता की कंधो पर है। कंपनी ने सीएमओ के साथ मिलकर खेल खेला और जब भुगतान अटका तो हाईकोर्ट चली गई। मामला हाईकोर्ट मे पहुंचा तो जिम्मेदारों ने अपना पक्ष हाईकोर्ट मे मजबूती से नहीं रखा इस कारण अब करोडो रूपए का बोझ शिवपुरी शहर की जनता पर पड़ेगा,बताया जा रहा है कि हाईकोर्ट के द्वारा आदेश को चुनौती देने के लिए भी करोडो रूपए अवार्ड राशि के रूप मे जमा करने होंगे,इधर नगर पालिका को कर्मचारियों को वेतन देने के लिए भी हर माह जूझना होता है,ऐसे मे नगर पालिका को अब राज्य शासन से मदद की उम्मीद है।
ऐसे समझे इस मामले को
नगर पालिका शिवपुरी में वर्ष 2015 में खरीदी गई स्वच्छता मशीनों का मामला अब करोड़ों रुपए के घोटाले और कानूनी संकट में बदल गया है। उस समय करीब 71.69 लाख रुपए में खरीदी गई मशीनों पर अब ब्याज सहित 4.32 करोड़ रुपए का भुगतान आदेश जारी हो चुका है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन 8 मशीनों के नाम पर यह पूरा भुगतान विवाद खड़ा हुआ, उनमें से 4 मशीनें नगर पालिका को कभी मिली ही नहीं।
अब यह मामला नगर पालिका के लिए गले की फांस बन चुका है। अदिति सैल्स एंड हार्टीकल्चर इंदौर द्वारा हाईकोर्ट में नगर पालिका के खिलाफ 8 अवमानना याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनकी सुनवाई 11 मई को प्रस्तावित है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक हलकों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। कलेक्टर अर्पित वर्मा ने कहा है कि मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
नियमों को तोड़कर की गई खरीदी, परिषद को रखा अंधेरे में
जांच रिपोर्ट के अनुसार उस समय नगर पालिका अधिकारियों ने परिषद की अनुमति और ऑनलाइन निविदा प्रक्रिया से बचने के लिए खरीदी को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट दिया। नियम के मुताबिक 10 लाख रुपए से अधिक की खरीदी के लिए ऑनलाइन टेंडर अनिवार्य था, लेकिन अधिकारियों ने ऑफलाइन टेंडर जारी कर पूरा खेल कर दिया। बताया जा रहा है कि 27 जून 2015 को सभी टेंडर जारी किए गए और उसी दिन बिल भी प्राप्त कर लिए गए। इससे यह आशंका मजबूत हुई कि पूरी प्रक्रिया अदिति सैल्स एंड हार्टीकल्चर इंदौर की फर्म को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से की गई थी। इस मामले में तत्कालीन सीएमओ कमलेश शर्मा, स्वास्थ्य अधिकारी और स्टोर कीपर की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि सभी ने मिलकर नियमों को ताक पर रखकर खरीदी प्रक्रिया को अंजाम दिया।
8 में से 4 मशीनें गायब, फिर भी करोड़ों का दावा
नगर पालिका रिकॉर्ड और जांच में सामने आया कि जिन मशीनों के नाम पर भुगतान और ब्याज की मांग की जा रही है, उनमें से चार मशीनें मौके पर मौजूद ही नहीं हैं। इनमें एफआरपी मटेरियल से बने मूत्रालय, मिनी स्काई लिफ्ट जैसी मशीनें और उपकरण शामिल बताए जा रहे हैं। इसके बावजूद कंपनी ने एमएसएमई काउंसिल से भारी भरकम ब्याज सहित भुगतान आदेश हासिल कर लिया। एमएसएमई काउंसिल ने मूल राशि पर तीन गुना चक्रवृद्धि ब्याज जोड़ते हुए करीब 4 करोड़ 32 लाख रुपए की देनदारी तय कर दी।
ईओडब्ल्यू की एंट्री, एफआईआर की तैयारी
यह मामला अब आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ग्वालियर तक पहुंच चुका है। अभिभाषक संघ अध्यक्ष विजय तिवारी की शिकायत पर ईओडब्ल्यू ने नगर पालिका से पूरे मामले के दस्तावेज तलब किए हैं। सूत्रों के मुताबिक दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की तैयारी चल रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि मशीनों की खरीदी, सप्लाई और भुगतान प्रक्रिया में किस स्तर तक मिलीभगत हुई।
कोर्ट में अपील के लिए चाहिए 3.24 करोड़, नपा की हालत खराब
नगर पालिका ने इस आदेश के खिलाफ कमर्शियल कोर्ट ग्वालियर में अपील तो दायर कर दी है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के तहत सुनवाई शुरू कराने के लिए अवार्ड राशि का 75 प्रतिशत यानी करीब 3.24 करोड़ रुपए जमा करना अनिवार्य है। स्थिति यह है कि आर्थिक संकट से जूझ रही नगर पालिका के पास कर्मचारियों को समय पर वेतन देने तक के पैसे नहीं हैं। ऐसे में अब शासन से आर्थिक सहायता मांगी गई है ताकि कोर्ट में ड्राफ्ट जमा कर नगर पालिका अपना पक्ष रख सके।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर नगर पालिका की कार्यप्रणाली, पुराने भ्रष्टाचार और प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर में चर्चा है कि अगर समय रहते इस मामले की जांच होती तो जनता के टैक्स का करोड़ों रुपए का नुकसान रोका जा सकता था।

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