शिवपुरी। शिवपुरी के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. संजय ऋषिश्वर को ग्वालियर हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा न्यायालय अवमानना के मामले में जारी किए गए उनके निलंबन आदेश के प्रभाव पर हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। 16 साल पुराने पेंशन विवाद से जुड़े मामले में निलंबित किए गए सीएमएचओ ने कोर्ट में दलील दी कि आदेश का पालन राज्य स्तर पर होना था और उन्होंने बतौर नोडल अधिकारी अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी थी। हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद मंगलवार देर शाम डॉ. ऋषिश्वर ने दोबारा पदभार ग्रहण कर लिया।
यह है पूरा मामला
स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत कर्मचारी रामप्रताप सिंह भदौरिया की नियुक्ति 1972 में हुई, लेकिन वो 1992 में नौकरी पर आए। उसके बाद वह 2017- 18 में रिटायर हो गए। विभाग के बाबुओं सहित भोपाल तक इस बात पर चर्चा होती रही कि पेंशन 1972 से बनेगी या 1992 से। इस पर रामप्रताप भदौरिया द्वारा अपनी ड्यूटी सं संबंधित सेवाकाल के संबंध में ग्वालियर हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। जिसमें मप्र शासन के तत्कालीन अपर मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को अन्नावेदक के रूप में संयोजित किया गया है।
उक्त रिट याचिका क्रमांक 7460/2010 की सुनवाई के उपरांत 3 जनवरी 2018 को एक आदेश पारित किया था। विभाग द्वारा उक्त आदेश का पालन नहीं किया, जिस पर न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की गई। उक्त याचिका में विभाग की ओर से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी शिवपुरी को संपर्क अधिकारी नियुक्त है। संपर्क अधिकारी नामांकित होने से सीएमएचओ को पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने की कार्रवाई करनी थी, परंतु हाई कोर्ट में पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के लिए लगाई गई 20 अप्रैल 2026 की तारीख पर प्रकरण में पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके फलस्वरूप उच्च न्यायालय द्वारा 20 अप्रैल को आलोच्य आदेश पारित किया।
इसके बाद सुनवाई हेतु नियत आगामी तिथि को आदेश का पालन सुनिश्चित नहीं होने की दशा में सीएमएचओ को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने के आदेश दिया। इसके अलावा अनावेदक के विरुद्ध आरोप तय कर आगामी कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया गया। इसी के चलते आयुक्त धनराजू एस ने सीएमएचओ डा ऋषिश्वर को निलंबित किया गया।
ऐसे मिली सीएमएचओ काे अंतरिम राहत
उच्च न्यायालय में याचिकाकर्ता सीएमएचओ डा संजय ऋषिश्वर की ओर से अधिवक्ता नितिन अग्रवाल ने निवेदन किया कि, उन्हें इस आधार पर निलंबित किया गया है कि डब्ल्यूपी संख्या 7460/2010 में इस न्यायालय द्वारा 3 जनवरी 2018 को पारित आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने में विफल रहे हैं। उन्होंने निवेदन किया कि प्रारंभिक अनुपालन रिपोर्ट बहुत पहले, 8 जुलाई 2021 को ही दाखिल कर दी गई थी, जो कि फरवरी, 2025 में याचिकाकर्ता की पदस्थापना से भी काफी पहले का समय है। यह अनुपालन राज्य स्तर पर किया जाना था। नोडल अधिकारी होने के नाते, याचिकाकर्ता से यह अपेक्षित था कि वह इस न्यायालय के आदेशों/निर्देशों की सूचना राज्य सरकार को प्रेषित करे, और यह कार्य विधिवत रूप से संपन्न किया गया था।

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