शिवपुरी। शिवपुरी जिले में खूबत घाटी से ककरवाया के बीच गुजरने वाला नेशनल हाईवे अब लोगों के लिए सफर का रास्ता नहीं बल्कि मौत का कॉरिडोर बनता जा रहा है। पिछले 18 महीनों में इस हाईवे पर हुए 73 सड़क हादसों में 30 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि 80 से अधिक लोग घायल हुए हैं। लगातार बढ़ते हादसों और खराब सड़क व्यवस्था को देखते हुए नवागत एसपी यांगचेन डोलकर के निर्देश पर यातायात प्रभारी रणवीर यादव ने रविवार को एनएचएआई अधिकारियों के साथ ब्लैक स्पॉटों का निरीक्षण किया।
यातायात पुलिस और एनएचएआई की संयुक्त टीम ने खूबत घाटी, कटमई तिराहा, नोहरी रेलवे ब्रिज और पिपरसमां चौराहे का निरीक्षण कर वहां दुर्घटनाओं के कारणों का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि कई स्थानों पर चेतावनी संकेत, रिफ्लेक्टर और रोड मार्किंग का अभाव है, वहीं सड़क किनारे उगी झाड़ियां और अवैध कट हादसों की बड़ी वजह बन रहे हैं।
अधिकारियों ने हाईवे किनारे बने ढाबों और होटलों के सामने बनाए गए अवैध कटों को बंद करने, सड़क किनारे की झाड़ियों को हटाने, रेडियम पट्टी, रिफ्लेक्टर और साइन बोर्ड लगाने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का मानना है कि इन सुधारों से हादसों में कमी लाई जा सकती है।
पिपरसमां पुल बना सबसे बड़ा खतरा
निरीक्षण के दौरान सबसे गंभीर स्थिति पिपरसमां पुल पर देखने को मिली। पुल की एक साइड का निर्माण कार्य पिछले दो वर्षों से जारी है, लेकिन अब तक पूरा नहीं हो पाया है। दूसरी ओर पुल की स्थिति और अधिक खराब हो चुकी है। स्थानीय लोगों के अनुसार सबसे ज्यादा सड़क हादसे इसी क्षेत्र में हो रहे हैं। अधूरा निर्माण और संकरी आवाजाही वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा बनी हुई है।
एक माह में गड्ढे भरने और साइन बोर्ड लगाने का दावा
एनएचएआई अधिकारियों, जिनमें धनंजय उईके शामिल थे, ने आश्वासन दिया कि अगले एक माह में शिवपुरी के आसपास हाईवे पर मौजूद गड्ढों को भरने का काम शुरू कर दिया जाएगा। साथ ही खूबत घाटी पर चेतावनी साइन बोर्ड लगाए जाएंगे।
अधिकारियों ने कहा कि पिपरसमां पुल की एक साइड का निर्माण कार्य जल्द पूरा कर दूसरी साइड पर भी तेजी से काम शुरू किया जाएगा। पिछले वर्ष अधिक बारिश के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुआ था, लेकिन अब इसकी गति बढ़ा दी गई है।
हादसों पर लगाम लगाने की कोशिश
यातायात पुलिस का कहना है कि ब्लैक स्पॉटों को चिन्हित कर वहां सुरक्षा उपाय बढ़ाए जाएंगे ताकि लोगों की जान बचाई जा सके। हालांकि सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि समय रहते सड़क सुधार और पुल निर्माण पूरा हो जाता तो शायद कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

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