शिवपुरी की लाइफ लाइन को खीचने मे हाफ रही है बूढी मोटरे, CMO की इंजीनियरों को FIR की चेतावनी

vikas
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CMO Municipal Corporation Shivpuri Inshak Dhakad

शिवपुरी।
भीषण गर्मी के बीच शिवपुरी शहर एक बार फिर पेयजल संकट की मार झेल रहा है। जिस सिंध जलावर्धन योजना को शहर की लाइफ लाइन कहा जाता है, वही अब बार-बार तकनीकी खराबियों के कारण लड़खड़ाने लगी है। सतनवाड़ा फिल्टर प्लांट की पुरानी मोटरों के लगातार खराब होने से जलापूर्ति व्यवस्था चरमरा गई है और हजारों परिवार पानी के लिए परेशान हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि सीएम हेल्पलाइन पर पानी से जुड़ी शिकायतें एक महीने में चार गुना तक बढ़ गई है,इधर पेयजल की आपूर्ति होने के कारण नगर पालिका प्रबंधन पर प्रेशर बढ रहा है इस कारण सीएमओ ने नगर पालिका के इंजीनियरों का एफआईआर और सस्पेंड करने तक की चेतावनी दे डाली। 

रोज चाहिए 4 करोड़ लीटर पानी

आंकड़ों के अनुसार शिवपुरी शहर को प्रतिदिन करीब 40 एमएलडी पानी की आवश्यकता होती है। आसान भाषा में समझें तो

1 एमएलडी = 10 लाख लीटर पानी

10 एमएलडी = 1 करोड़ लीटर पानी

यानी 40 एमएलडी = 4 करोड़ लीटर पानी प्रतिदिन

अर्थात शहरवासी रोजाना घरेलू उपयोग के लिए करीब 4 करोड़ लीटर पानी खर्च करते हैं।

सिंध जलावर्धन योजना ही शहर का सबसे बड़ा सहारा

शिवपुरी की प्यास बुझाने में सबसे बड़ी भूमिका सिंध जलावर्धन योजना निभाती है। इस योजना से प्रतिदिन लगभग 35 से 40 एमएलडी पानी सप्लाई किया जाता है। इसके अलावा बाणगंगा फिल्टर प्लांट से 5 एमएलडी और शहर के 494 सक्रिय बोरवेल करीब 10 एमएलडी पानी उपलब्ध करा रहे हैं।

शहर में पानी वितरण के लिए 18 ओवरहेड टैंक और 9 संपवेल बनाए गए हैं, जबकि करीब 25 हजार वैध पानी कनेक्शन संचालित हैं। लेकिन पूरे सिस्टम का सबसे बड़ा आधार सिंध जलावर्धन योजना ही है। यही कारण है कि इसकी सप्लाई में थोड़ी भी रुकावट पूरे शहर में संकट खड़ा कर देती है।

15 साल पुरानी मोटरों पर बढ़ा बोझ

सतनवाड़ा फिल्टर प्लांट पर लगी 350 से 500 एचपी क्षमता की तीन मोटरें करीब 15 साल पुरानी हो चुकी हैं। गर्मी बढ़ने के साथ पानी की मांग भी बढ़ गई है, जिसके चलते इन मोटरों को रोजाना 20 से 22 घंटे तक लगातार चलाना पड़ रहा है। ज्यादा लोड के कारण मोटरें बार-बार गर्म होकर बंद हो रही हैं और सप्लाई बाधित हो रही है। पिछले एक महीने में दो बार मोटर खराब होने से कई इलाकों में पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया। लोगों को टैंकरों और हैंडपंपों के भरोसे रहना पड़ा।

सीएम हेल्पलाइन पर शिकायतों की बाढ़

नगरपालिका से जुड़ी सीएम हेल्पलाइन पर हर महीने सामान्य तौर पर 250 से 300 शिकायतें आती हैं। इनमें पहले पानी से जुड़ी शिकायतें सिर्फ 30 से 40 होती थीं, लेकिन अब यह आंकड़ा बढ़कर 150 तक पहुंच गया है। यानी हर दूसरी शिकायत पानी संकट को लेकर दर्ज हो रही है। जनता की नाराजगी और वरिष्ठ अधिकारियों की फटकार के बाद अब नगर पालिका प्रशासन एक्शन मोड में आ गए है।


CMO का अल्टीमेटम- 7 दिन में सुधार करो

नगर पालिका सीएमओ इशांक धाकड़ ने सहायक यंत्री सचिन चौहान सहित चार जोन प्रभारियों को नोटिस जारी कर 7 दिन के भीतर जल व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए हैं। गांधी पार्क, सब्जी मंडी, राव की बगिया और फिजीकल क्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारियों को साफ चेतावनी दी गई है कि यदि समय पर सुधार नहीं हुआ तो एफआईआर और निलंबन जैसी कार्रवाई की जाएगी।

नई मोटरों के लिए 4.5 करोड़ का टेंडर

नगरपालिका ने संकट से निपटने के लिए 700 एचपी क्षमता की तीन नई मोटरें खरीदने हेतु करीब 4.5 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया है। हालांकि नई मोटरें आने में अभी करीब डेढ़ महीने का समय लगेगा। तब तक शहर को पुरानी मोटरों के भरोसे ही चलना पड़ेगा।

क्यों कहलाती है शिवपुरी की लाइफ लाइन ?

पूरे आंकड़ों का निष्कर्ष साफ है—शिवपुरी की जल व्यवस्था पूरी तरह सिंध जलावर्धन योजना पर निर्भर है। जैसे ही इस योजना की सप्लाई रुकती है, शहर में करोड़ों लीटर पानी की कमी पैदा हो जाती है और हालात हाहाकार जैसे बन जाते हैं। यही वजह है कि सिंध जलावर्धन योजना को शिवपुरी की लाइफ लाइन कहा जाता है।

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