भोपाल। शिवपुरी-श्योपुर जिले की सीमा पर स्थित कूनो नेशनल पार्क मे आज मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने सोमवार को कूनो नेशनल पार्क में चीता प्रोजेक्ट के तहत दो चीतों को खुले जंगल में छोड़ा। ये चीते अफ्रीकी देश बोत्सवाना से लाए गए थे। कूनो नेशनल पार्क केवल विदेशी चीतों का पुनर्वास केन्द्र नही रहा है बल्कि साढ़े तीन साल में विदेशी चीतो से इंडियन चीतों का युग शुरू हो चुका है।
ज्वाला, गामिनी और आशा जैसी मादा चीताओं की संतानों ने अब शावकों को जन्म देकर यह साबित कर दिया है कि भारतीय जंगलों में चीता प्रजाति स्वाभाविक रूप से खुद को स्थापित करने लगी है। 11 मई 2026 की स्थिति में कूनो में चीतों की संख्या बढ़कर 54 हो चुकी है, जबकि पूरे देश में यह आंकड़ा 57 तक पहुंच गया है। इनमें 23 शावक ऐसे हैं जिनकी उम्र एक वर्ष से कम है और वे फिलहाल अपनी माताओं के साथ सुरक्षित बाड़ों और नियंत्रित क्षेत्रों में रह रहे हैं।
साढ़े तीन साल में 49 शावकों का जन्म
कूनो में पिछले साढ़े तीन वर्षों के दौरान कुल 49 शावकों का जन्म हुआ है, जिनमें से 37 जीवित और स्वस्थ हैं। वन्यजीव विशेषज्ञ इसे विश्व स्तर पर सबसे सफल चीता पुनर्स्थापन अभियानों में गिन रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि केवल वन्यजीव संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे श्योपुर जिले की पहचान भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदल रही है। वन विभाग और सरकार को उम्मीद है कि आने वाले समय में चीता पर्यटन यहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था की नई रीढ़ बन सकता है।
भारतीय मूल की मादा चीताओं ने रचा इतिहास
प्रोजेक्ट चीता की सबसे बड़ी सफलता भारत में जन्मीं मादा चीताओं का मां बनना माना जा रहा है। KCGP-12, जो गामिनी की बेटी है, उसने 11 अप्रैल 2026 को खुले जंगल में चार स्वस्थ शावकों को जन्म दिया। इससे पहले भारत में जन्मी पहली मादा चीता मुखी ने 20 नवंबर 2025 को पांच शावकों को जन्म देकर इतिहास रच दिया था। वन्यजीव विशेषज्ञ इसे सेकंड जनरेशन यानी भारतीय मूल की दूसरी पीढ़ी का उदय मान रहे हैं। इसका अर्थ यह है कि अब चीते केवल संरक्षित बाड़ों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भारतीय जंगलों में प्राकृतिक रूप से अपनी आबादी बढ़ाने लगे हैं।
5000 वर्ग किलोमीटर तक फैला चीतों का दायरा
कूनो के चीते अब करीब 5000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैल चुके हैं। यह क्षेत्र श्योपुर, मुरैना और ग्वालियर वन मंडलों से होते हुए राजस्थान सीमा तक पहुंच गया है। वर्तमान में 15 चीते पूरी तरह खुले जंगल में रह रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार ये चीते अब अपने नए वातावरण में सहज होकर घूम-फिर रहे हैं और शिकार भी प्राकृतिक तरीके से कर रहे हैं।
अब प्रोजेक्ट चीता 2.0 की तैयारी
चीतों की बढ़ती संख्या के साथ अब वन विभाग का फोकस “जेनेटिक डायवर्सिटी” यानी आनुवंशिक विविधता पर है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ और मजबूत आबादी बनाए रखने के लिए अलग-अलग देशों के चीते का मिश्रण जरूरी है। इसी रणनीति के तहत नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से लाए गए चीते की आनुवंशिक विविधता को भारतीय मूल की नई पीढ़ी के साथ संतुलित किया जाएगा। इससे इनब्रीडिंग का खतरा कम होगा और चीते बीमारियों व पर्यावरणीय बदलावों के प्रति अधिक मजबूत बन सकेंगे।
बोत्सवाना से कुल 9 चीते कूनो लाए गए
हाल ही में अफ्रीकी देश बोत्सवाना से कुल 9 चीते कूनो लाए गए थे, जिनमें 5 मादा और 4 नर शामिल थे। भारत लाए जाने के बाद, इन सभी चीतों को कूनो नेशनल पार्क के क्वारंटाइन बाड़ों में रखा गया था।
एक महीने की निगरानी और क्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बाद, सभी चीतों को सॉफ्ट बाड़ों में स्थानांतरित कर दिया गया था। सोमवार को इन्हीं में से दो मादा चीतों को पहली बार खुले जंगल में छोड़ा गया है। शेष 7 चीते अभी भी सॉफ्ट बाड़ों में निगरानी में हैं।

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