शिवपुरी। शिवपुरी का मेडिकल कॉलेज का निर्माण हुआ था तो शिवपुरी के जनमानस को उम्मीद थी कि शिवपुरी के लोगो को अब बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी,लेकिन ऐसा नहीं है करोड़ों रुपए की लागत से बना कॉलेज एक 13 माह की मासूम के 1 यूनिट ब्लड का इंतजाम नहीं कर सका और यह मासूम ब्लड के अभाव मे तड़प तड़प कर मर गई। इस घटना से मेडिकल कॉलेज प्रबंधन पर कई सवाल खड़े करता है। शिवपुरी के समाज सेवा कर मीडिया मे प्रदर्शन करने वाले समाज के लोगों पर सवाल बनते है।
सबसे पहला और सबसे बड़ा सवाल मेडिकल कॉलेज प्रबंधन का बनता है,उस बच्ची का इलाज कर ही डॉक्टर और उसकी टीम के लिए है कि क्या पर्ची पर ब्लड की आवश्यकता लिखने भर से डॉक्टर और उसकी टीम की जिम्मेदारी खत्म हो गई थी,डॉक्टर और उसकी टीम को यह जानकारी थी कि मासूम और उसकी फैमिली शिवपुरी लोकल नहीं है,लोकल मे उसकी सर्पोट करने वाले कम ही मिलेगे तो मेडिकल प्रबंधन ने अपने स्तर से प्रयास क्यों नहीं किए। यह मासूम राजस्थान की रहने वाली थी शिवपुरी मेडिकल कॉलेज मे इलाज के लिए भर्ती हुई थी।
जानकारी के मुताबिक राजस्थान के बारा जिले के कस्बा थाना निवासी बबलू जाटव अपनी 13 महीने की बेटी नेहा जाटव को चार दिन पहले इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज शिवपुरी लेकर पहुंचे थे, जहां बच्ची भर्ती थी। पिता का कहना है कि सोमवार शाम से लेकर मंगलवार सुबह तक बच्ची की हालत सामान्य थी। मंगलवार सुबह करीब 10 बजे वह खाना लेने गया था, तभी करीब साढ़े 10 बजे डॉक्टरों ने उसे बुलाकर बताया कि बच्ची के शरीर में खून की कमी है और तत्काल एबी पॉजिटिव ब्लड की जरूरत है।
बबलू जाटव ने बताया कि वह डॉक्टरों द्वारा दिया गया पर्चा लेकर मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक पहुंचा, लेकिन वहां एबी पॉजिटिव ब्लड उपलब्ध नहीं था। इसके बाद उसे जिला अस्पताल के ब्लड बैंक भेजा गया। जब वह जिला अस्पताल पहुंचा तो वहां भी आवश्यक ब्लड उपलब्ध नहीं हो सका। पिता का आरोप है कि वह बदले में खून देने के लिए भी तैयार था, लेकिन कहीं से ब्लड की व्यवस्था नहीं हो पाई। इसी दौरान दोपहर करीब 12 बजे उसे बेटी नेहा की मौत की सूचना दे दी गई।
पीड़ित पिता का कहना है कि जब तक वह बच्ची के पास था, उसकी हालत स्थिर थी, लेकिन उसके बाहर निकलते ही अचानक खून की जरूरत बताई गई। मेडिकल कॉलेज से लेकर जिला अस्पताल तक चक्कर लगाने के बावजूद उसे एबी पॉजिटिव ब्लड नहीं मिल सका और उसकी मासूम बेटी की जान चली गई। जानकारी जुटाने पर यह भी सामने आया कि मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल, दोनों ही ब्लड बैंकों में उस समय एबी पॉजिटिव ब्लड उपलब्ध नहीं था। इस मामले ने जिले की स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वहीं मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. आशुतोष चौऋषि का कहना है कि बच्ची की हालत बेहद नाजुक थी और उसे आईसीयू में भर्ती किया गया था। बच्ची को ब्लीडिंग हो रही थी, जिसके चलते तत्काल एबी पॉजिटिव ब्लड की आवश्यकता पड़ी। उन्होंने स्वीकार किया कि मेडिकल कॉलेज में यह ब्लड ग्रुप उपलब्ध नहीं था और जिला अस्पताल में भी ब्लड नहीं मिल सका।

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