उपचुनाव में सिंधिया सारथी बने थे महेन्द यादव के, लेकिन अब परिवर्तन होंगा: सुरेन्द्र शर्मा

शिवपुरी। सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की मेहनत और अपने पिता स्व. रामसिंह यादव की पुण्याई से उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी महेन्द्र यादव कोलारस विधानसभा क्षेत्र से भले ही मामूली अंतर से चुनाव जीत गए हों, लेकिन विधायक बनने के बाद वह जनमानस में अपनी छाप छोडऩे में असफल रहे हैं।  उपचुनाव में सिंधिया सारथी बन गए थे महेन्द्र सिंह यादव के लेकिन अब ऐसा नही हो सकता हैं। जब मप्र में 2 ही चुनाव थे। लेकिन आम चुनावो में पूरा मप्र चुनावी समर में होगा। यह कहना है भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुरेन्द्र शर्मा का।

उनका कहना है कि इस बार कोलारस में भाजपा चुनाव अवश्य जीतेगी, भले ही प्रत्याशी कोई भी हो। उपचुनाव में हार के बावजूद भी भाजपा ने जो-जो वायदे किए थे उन्हें लगातार पूरा किया जा रहा है। विधायक की निष्क्रियता और सरकार के काम के भरोसे भाजपा को उम्मीद है कि इस बार कोलारस में परिवर्तन देखने को मिलेगा। 

पिछले विधानसभा चुनाव में जिले की पांच सीटों में से सर्वाधिक मतों से कोलारस विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी स्व. रामसिंह यादव ने विजयश्री हासिल की थी। भाजपा की लहर में भी वह 25 हजार से अधिक मतों से विजयी हुए थे। उनकी असामायिक मौत के बाद कांग्रेस ने सहानुभूति लहर का फायदा उठाने के लिए उनके अराजनैतिक और व्यवसायिक पुत्र महेन्द्र यादव को चुनाव मैदान में उतारा जिनका राजनीति से कभी कोई लेना देना नहीं रहा। 

उनकी अचानक उम्मीद्वारी से कोलारस विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस टिकट के दावेदारों को तगड़ा झटका लगा था, लेकिन सिंधिया ने उपचुनाव को प्रतिष्ठा का सवाल बनाया और मतदाताओं में यह संदेश दिया कि चुनाव महेन्द्र यादव नहीं, परंतु वह स्वयं लड़ रहे हैं। इसका परिणाम यह हुआ कि महेन्द्र यादव उपचुनाव तो जीत गए, लेकिन उनकी जीत का अंतर काफी घट गया। 

पिछले चुनाव की तुलना में कांग्रेस की जीत का अंतर लगभग एक तिहाई हो गया। महेन्द्र यादव 8 हजार मतों से भाजपा प्रत्याशी देवेन्द्र जैन से विजयी हुए। भाजपा ने हार के बावजूद भी 2018 के लक्ष्य को लेकर अपना काम शुरू किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया से पहले कोलारस में मतदाताओं को धन्यवाद देने के लिए आए और उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि हार के बावजूद भी जो-जो वायदे उन्होंने किए हैं वह पूरे किए जाएंगे। 

इसके परिणाम स्वरूप बदरवास में महाविद्यालय का शुभारंभ, रन्नौद को नगर पंचायत बनाया गया, कोलारस में सिंध के पानी की योजना का शुभारंभ हुआ, बेरखेड़ी तालाब और गुंजारी नदी के सौंदर्यीकरण के टेंडर हुए। बदरवास में इंदौर इंटरसिटी ट्रेन का स्टॉपेज प्रारंभ हुआ। इसके अलावा स्थानीय भाजपा नेताओं की भी विधानसभा क्षेत्र में सक्रियता तेजी से बढ़ी है। 

भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुरेन्द्र शर्मा चाहे टोल टैक्स की समस्या हो या कोलारस की अन्य समस्या उसके लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का दरबाजा खटखटाने में संकोच नहीं कर रहे। जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष और टिकट के दावेदार जितेन्द्र जैन गोटू निरंतर जनसंपर्क के बहाने कोलारस की समस्याओं पर नजर रख रहे हैं। पूर्व विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी भी गांव-गांव छान रहे हैं जबकि भाजपा की तुलना में कांग्रेस की तैयारी लगभग सुसुफ्तावस्था में है। 

विधायक महेन्द्र यादव अराजनैतिक होने के कारण राजनीति से तालमेल नहीं बिठा पा रहे। उनका अक्खड़ स्वभाव और कार्यकर्ताओं से दूरी कांग्रेस की बड़ी समस्या बनी हुई है। यहां तक बताया जाता है कि सजातीय मतदाताओं में भी उनके विरोध के स्वर उनके व्यवहार के कारण उठने लगे हैं। कोलारस के लोगों का आरोप है कि विधायक फोन तक नहीं उठाते हैं जिससे वह किसे अपनी समस्याएं बताएं। इन कारणों से कोलारस में भाजपा को माहौल अपने अनुकूल लग रहा है और यही कारण है कि इस विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लडऩे वालों की संख्या भाजपा में एकाएक काफी बढ़ गई है। 

भाजपा को इन नेताओ को है टिकिट की आस 
हालांकि पिछले तीन विधानसभा चुनाव से भाजपा टिकट पर लड़ रहे पूर्व विधायक देवेन्द्र जैन ने दो चुनावों में पराजय के बाद 2018 के चुनाव में अपनी उम्मीद्वारी वापस ले ली है, लेकिन इसके बाद भी भाजपा में लगभग एक दर्जन टिकट के दावेदार हैं। ं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जितेन्द्र जैन गोटू, पूर्व विधायक वीरेन्द्र  रघुवंशी, भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुरेन्द्र शर्मा, आलोक बिंदल, रामस्वरूप रावत रिझारी, भाजपा जिलाध्यक्ष सुशील रघुवंशी और प्रदेश कार्य समिति सदस्य अजीत जैन शामिल हैं।
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