जो नगरपालिका नालियां नहीं बना पाती, वह सिंध जलावर्धन का काम करेगी

शिवपुरी। अपनी निर्धारित समय सीमा से लगभग 7 साल लेट चल रहा सिंध जलावर्धन योजना का काम। अब इस योजना पर काम कर रही दोशियान कंपनी से काम छीना जा सकता है। अब यह काम मुन्ना सरकार अर्थात नगरीय निकाय करेगी। मतलब यह कह सकते है कि अब बिना दूल्ले की बारात निकाली जाऐगी। जो निकाय नालिया वाटर लेवल से नही बना पाती वह इतनी बडी योजना पर काम सफलता पूर्वक कैसे करेंगी। 

यह योजना 2008-2009 में शुरू हुई थी और इस योजना को पूरा करने का टारगेट 2 वर्ष का था, लेकिन यह योजना अभी तक पूरी नही हुई है। इसमें लगातार खामियां आ रही है। बार-बार पाईन लाईन टूट रही है। बताया जा रहा है कि सतनवाडा से शिवपुरी 17 किमी की दूरी में 188 टीकरी लगाई है, इससे गुणवत्ता की अंदाजा लगता है, कुल मिलाकर अभी तक 36 घटें लगातार पानी इस इस पाईप लाईन में नही चला है और 188 छेद हो चुके है। 

शहर के प्यासे कंठो की लाईफ लाईन कहने वाली इस योजना को अपनी पूर्णता को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पडा और शहर को माधव चौक चौराहे पर धरने पर बैठना पड़ा। अब पुन: आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा रही है। जलक्रांति ने आंदोलन करने की घोषणा पूर्व से कर दी थी,अब एसडीएम से आंदोलन करने की परमिशन मांगी है। 

9 अप्रैल से जलक्रांति संस्था ने जब धरने पर बैठने की चेतावनी दी तो कैबिनेट मंत्री यशोधरा राजे शुक्रवार को मडीखेडा डैम का निरीक्षण करने पहुंच गई। उन्होंने तत्काल अफसरों की बैठक बुलाई और निर्देश जारी कर दिए कि कंसल्टेंसी से एक तकनीकी विशेषज्ञ बुलाकर प्रोजेक्ट की कमियों से संबंधित रिपोर्ट 7 दिन में भोपाल में प्रस्तुत करें। इसके बाद दोशियान से काम छीनकर नगरीय निकाय को सौंपा जाएगा। 

अगर सिंध जलावर्धन योजना का काम मुन्ना सरकार को सौंपा जाता है तो बड़े 2 सवालों का जन्म होता है कि अगर दोशियान इस मामले को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटा दिया तो समय और आगे खिसक सकता है। दूसरा नपा शिवपुरी जो शहर की नालिया वाटर लेवल से नही बना सकता वह इतनी बडी योजना पर काम कैसे करेंगा। यहां तो एक राशन कार्ड बिना वसूली के नही बनता है। 

इस योजना पर अभी तक 65 करोड रू खर्च हो चुका है योजना का बजट लगभग 100 करोड रूपए है। और पिछले 10 साल में जनता को पानी पिलाने के नाम पर इससे भी ज्यादा खर्च नगरपालिका शिवपुरी ने बोंरिग, मोटर, स्टार्टर और टैंकरों पर खर्च कर दिए है। 

अपनी निर्धारित समय सीमा से 7 साल लेट चल रही दोशियान से काम इससे पूर्व क्यो नही छीना गया। क्यो इतने साल से जनता को प्यास से तडपते रहे। अब इसकी गांरटी कौन लेगा कि अगर दोशियान से काम छीना तो वह न्यायालय में नही जाऐगी। और नपा शिवपुरी काम पूरे तकनीक और जिम्मेदारी से काम करेंगी। सवाल कई है इस मामले में..। 
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