जिसके मन मे दूसरे के प्रति करुणा का भाव नही वह इंसान होकर भी इंसान नहीं: मुनि अजितसागर

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शिवपुरी। पंचकल्याणक में अभी तक खूब राग-रंग की बातें चल रही थीं, परन्तु आज से तप कल्याणक महोत्सव के दिन से वैराग्य का सफर शुरू हो जाता है। आज से समझ आता है, जिस वैभव को तुम अपना मान रहे थे वास्त्व में उससे तुम्हारा कोई बास्ता है ही नहीं, मात्र स्वयं का आत्म तत्व ही तुम्हारा अपना है, जिसे पाने का पुरुषार्थ हमेंशा करना चाहिये। इस पंचकल्याणक के माध्यम से अपने आत्म स्वरुप को समझकर अपने मान-अभिमान को छोडक़र अपने व्यक्तित्व को निखारने के कार्य करना चाहिए। 

आप यदि दूसरे के कल्याण के बारे में सोचते हो, तो स्वयं का कल्याण भी हो जाता है। जब निस्वार्थ भाव से दूसरों की सेवा और वैय्यावृत्ति कार्य किया जाता है, तो उसका फल इस लोक में तो मिलता ही है, अगले भव में भी वह जीव निरोगी और बलशाली काया को प्राप्त करता है। कोई भी धर्म कार्य मात्र प्रर्दशन के लिये नहीं किया जाता अपितु कहीं न कहीं उसमें जन कल्याण और परोपकार की भावना भी छिपी होती है। 

यही कारण है कि कल यहाँ मात्र प्रदर्शन का कार्य नही हुआ बल्कि कल जन्मकल्याण के साथ-साथ चिकित्सा शिविर और दयोदय किसान गौशाला सम्मेलन जैसे जन कल्याण और परमार्थ के कार्य भी यहां किये गए, जिससे जन्म कल्याणक जन-जन के कल्याण का कारण बन गया। 
उन्होनें कहा कि मात्र धन, वैभव के द्वरा जीवन नही जिया जाता। जिसके मन मे दूसरे के दु:ख दूर करने के भाव नही आये। वह इंसान होकर भी इंसान नहीं है। आज मनुष्य की जिंदगी ऐसी है कि वह वर्तमान में तो जी रहा है, परन्तु सोच कल के बारे में रहा है। जबकि कल हमारे हाथ मे है ही नही। कल की सोचने में वर्तमान भी समाप्त होता जा रहा है। जैन दर्शन कहता है, कि आप करोड़पति बनो न बनो, पर अपने आत्मा के पति बन जाओं जाओ यह बड़ी बात है।

आदिकुमार की बारात का भव्य जुलूस कोलारस में निकला।
पंचकल्याणक में कल का दिन बहुत खास रहा। कल दिनांक 27 नवंबर सोमवार को सर्वप्रथम युवराज आदिकुमार की बारात कोलारस में बड़ी धूमधाम और भव्यता के साथ निकाली गई। जिसमें महती धर्म प्रभावना के साथ हाथी, घोड़ें, बघ्घी, बैंड, दिव्यघोष के साथ युवराज आदिकुमार हाथी पर सवार होकर चल रहे थे। युवराज की बारात में विशाल जनसमूह तो शामिल था ही उसे देखने के लिये भी लोगों का जन सैलाब उमड़ पड़ा। आयोजन को सफल बनाने में चौधरी देवेन्द्र जैन, प्रमोद जैन, अमित जैन, जीवंधर जैन, बंटी खरैह, दीपक लाईटऔर उनकी टीम की महती भूमिका रही। 

बालक आदिकुमार बने मुनि आदिसागर
बारात समाप्ति के विवाहोत्सव मनाया गया। राज्याभिषेक के बाद जैसे ही नीलांजना नृत्य, हुआ और राजा आदिकुमार ने दीक्षा के लिए वन प्रस्थान किया उस समय दीक्षा की अनुमोदना के लिये पूरा पांडाल जयकारों से गूँज गया, और स्वर्ग से लौकान्तिक देवों ने आकर सर्वप्रथम आदिकुमार की पालकी उठाई। तत्पश्चात पूज्य मुनिसंघ द्वारा दीक्षा संस्कार की विधि सम्पन्न कराई गई। 

इसके पूर्व 26 नवंबर को लगाये गये चिकित्सा शिविर में जिन डॉ. ने अपना योगदान दिया था उनका सम्मान पंचकल्याणक समिति द्वारा किया गया। उल्लेखनिय है कि दिगम्बर जैन समाज के अतिशय क्षेत्र श्री सेसई जी में इन दिनों पंचकल्याणक महोत्सव का आयोजन मुनिश्री 108 अजितसागर जी महाराज, ऐलक दयासागर महाराज और ऐलक विवेकानंद सागर महाराज के सान्निध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य अभय भैया एवं सह प्रतिष्ठाचार्य पं. सुगनचंदजैन आमोल के निर्देशन में महती धर्म प्रभावना के साथ चल रहा है।
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