सत्येन्द्र उपाध्याय/शिवपुरी। इस समय मप्र बोर्ड की परीक्षाए चल रही है। जिले के नकल माफियाओं से लोहा लेेने के लिए कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव ने तेज तर्रार आईएएस नेहा मारव्या को परीक्षा प्रभारी बनाया है लेकिन वह कलेक्टर के इस टास्क को पास नही सकी। सारी दुनिया को नियमानुसार चलाने वाली नेहा मारव्या परीक्षाओं को नियमानुसार संचालित नहीं करवा पा रहीं हैं। अब ये उनका प्रशासनिक फेलियर है या इसके पीछे कोई राज है। यह तो अध्ययन का विषय है।
जैसा कि विदित है कि पोहरी और बैराड़ क्षेत्र में ठेके पद्वति से संचालित स्कूलों में हजारों एडमिशन है, पास करवाने वाले ठेके में यह स्कूल इतने कुख्यात है कि इस जिले से ज्यादा दीगर जिलो के एडमिशन इन स्कूलो में है। इन स्कूलों का प्रचार स्लोगन मुहं जुबानी इन स्कूलों से ज्यादा फेमस है कि हम पढाते नही बल्कि पास कराते है।
बताया जा रहा है कि बैराड के लखेश्वर और विजयानंद स्कूल और अमोलपठा में आर्दश जीवन हायर सेकेन्ड्री स्कूल में इसी तर्ज पर चलते है। यह स्कूल नकल मामले में सबसे ज्यादा कु यात है। प्रशासन में इनकी इतनी घुसपैठ है कि कौन सा उडन दस्ते के पहिए किस दिशा में घूम रहे है। इनको जानकारी रहती है। और इनके स्कूलो के सेंटरो पर कौन सा उडन दास्ता चैक करने आऐगा। एनओसी भी यह नकल माफिआ ही देेते है।
मप्र बोर्ड के संस्कृ़त का पेपर सुबह 8:30 बजे शुरू हुआ,बच्चो को उत्तर पुस्तिकाए 8:20 मिनिट पर मिली। पर इस पेपर में क्या आने वाला है इसके उत्तर बच्चा को पूर्व से ही ज्ञात था। इस पेपर की वस्तुनिष्ठ प्रश्र, जोडी, सही गलत और रिक्त स्थानो की ऑटी बच्चो को पहले से ही नकल माफिआओ ने नोट भी करा दी थी। इस नकल माफिया के गुर्गा सेंटर पर मुंह बाधतें कर ऑटी पास करता हुआ शिवपुरी समाचार डॉट कॉम के कैमरे में भी कैद हुआ और प्रकाशित भी किया गया।
कुल मिलाकर इन इस बार भी जिले में जमकर नकल हो रही है। सेंटरो पर नकल कराई जाने की खबरे भी मिल रही है। ऐसा नही है कि परीक्षा प्रभारी नकल रोकने का प्रयास नही कर रही हो वह पूरा प्रयास कर रही है।
परीक्षा प्रभारी नकल रोकने के लिए कोई योजना बनाती है या जो भी दिशा निर्देश देती है, वह तत्काल नकल माफिआ के पास पहुंच जाता होगा या परीक्षा प्रभारी अपने अमले से तालमेल नहीं बैठा पा रही है। कुल मिलाकर वह नकल रोकने में नकामयाब रही है। अब आगे देखना यह है कि आगे के होने वाले पेपरो में परीक्षा प्रभारी क्या करती है।