शिवपुरी। अभी-अभी खबर आ रही है कि पोहरी विधान सभा के छर्च थाना अतंर्गत आने वाले एक ग्राम में एक आदिवासी बाप ने अपनी 4 माह की मासूम को चूल्है में झोंक दिया जिससे उसकी उपचार के दौरान मौत हो गई है। इस मामले में मासूम के पिता का कहना है कि बच्ची कब चूल्हे में चली गई उसे नही पता है। पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार ग्राम मोहरा निवासी दादूराम आदिवासी शनिवार की रात अपनी पत्नी के साथ मजदूरी करके घर लौटा। उन्होनें खाना बनाया और खा-पीकर सौ गए। उनकी चार माह की बच्ची अंजू भी पास में सो रही थी। अंजू के माता पिता के अनुसार आधी रात के बाद वह किसी तरह चूल्हे मेें चली गई।
अंजू आग के जलने पर रोती रही लेकिन दादूराम व उसकी पत्नि की आं ा नह खुली सुबह पडौस मेें रहने वाले लोगों ने जब दादूराम को जगाया तो अंजू चूल्हे में जली हुई अवस्था में मिली उसे इलाज के लिए पोहरी स्वास्थय केन्द्र लाया गया,जहां उसकी नाजुक हालत को देखते हुए उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल रैफर कर दिया गया जहां बच्ची की मौत हो गई। पुलिस ने मर्ग कायम कर विवेचना शुरू कर दी है।
4 माह की मासूम के माता-पिता के यह बात किसी भी तरह हजंम नही हो रही है कि बच्ची सोते-सोत चूल्हे में चली गई। एक मिनिट के लिए मान लेते है कि सोते-सोते बच्ची चूल्हे में चली गई तो क्या-क्या वह सोते-सोते ही चूल्हे में चल गई यह तो संभव नही है।
बच्ची जलते हुए चीखी और रोई भी होगी तो उस समय उसी जगह सो रहे माता-पिता की नींद नही खुली। और तो और सुबह मा-बाप ने बच्ची को चूल्हे में जलते नही देखा बल्कि पड़ोसीयो को पहले पता चल गया और मां बाप सोते ही रहे है। यह कहानी किसी एंगिल से समझ से परे है कि ऐसा कैसे संभव हो सकता है।
फिलहात छर्च पुलिस में मर्ग कायम कर लिया है और इस मामले की सभी पहुलुओं पर जांच की जा रही है।
