लाईफ लाईन की सहारे अपनी नेतागिरी की लाईफ बढा रहे है सिद्धार्थ लढ़ा

Updesh Awasthee
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शिवपुरी। इन दिनो शहर कांग्रेस का एक ही टारगेट है लाईफ लाईन एक्सप्रेस। या यू कह लो कि लाईफ लाईन एक्सप्रेस के सहारे ही अपनी नेतागिरी की लाईफ बढा रहे है शहर काग्रेंस अध्यक्ष सिद्धार्थ लढ़ा। 

पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया बड़ा भरोसा जताकर शहर कांग्रेस की कमान सिद्धार्थ को सौंपी है लेकिन वह सिंधिया की आशाओं पर खरे नहीं उतरे। लगभग दो माह हो गए है अब भी तक ना तो शहर की टीम तैयार हुई और ना ही शहर कांग्रेस में वरिष्ठ कांग्रेसी शामिल हुए है. कई नेता आज भी इस युवा नेता से खासे नाराज है, हालांकि वह स्पष्ट तौर पर तो कुछ नहीं कहते लेकिन वह कार्यक्रमों में अनुपस्थित देकर अपने इन अरमानों को पूरा कर देते है। 

शहर की ही लगभग 1 लाख से अधिक की आबादी में महज 6 हजार मरीजों के पंजीयन कर भले ही शहर कांग्रेस अपनी पीठ थपथपाए, लेकिन हकीकत इससे भी उलट है क्योंकि जिन पंजीयनों की बात की जा रही है।  उसमें अधिकांशत: महज कागजी खानापूर्ति है जिन्हें ना तो लाईफ लाईन एक्सप्रेस से कोई सरोकार है और ना ही उन्हें किसी प्रकार की जानकारी, कि उनका क्यों और किसलिए भरवाया गया है। कागजी आंकड़ों को जिस प्रकार से शहर कांग्रेस ने सिंधिया के सामने 6 हजार का बताकर वाहवाही लूटी है यदि वास्तविक वजह जानेंगें तो परिणाम कुछ  और ही नजर आएगा।

नहीं मिल रहे चिकित्सक, मरीज परेशान
जिस लाईफ लाईन एक्सप्रेस को के.माधवराव सिंधिया के परमार्थ के माध्यम से जनसेवा का रूप दिया जा रहा है आज वही लाईफ लाईन उन मरीजों के लिए मुसीबत का कारण बनी। जो प्रात: 9 बजे से मानस भवन पहुंचकर आंखों का इलाज कराने आए लेकिन यहां चिकित्सक लगभग 2 घंटे इंतजार के बाद पहुंचे। ऐसे में समझा जा सकता है कि लाईफ लाईन में मरीजों की क्या दुर्दशा हो रही है और मरीजों को क्या सुविधाऐं मिल रही है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है। मरीज के परिजनों का इस बारे में कहना था कि ऐसी लाईफ लाईन एक्सप्रेस का क्या जो केवल कागजी दिखावे के लिए आई हो। 

स्वास्थ्य व्यवस्था को कोसकर लाईफ लाईन की प्रशंसा कर गए सिंधिया 
स्वास्थ्य सेवाओं की बात की जाए तो पहले से ही प्रदेश में विभिन्न प्रकार के रोग और नि:शुल्क दवाओं की व्यवस्था है लेकिन इसे सिंधिया बर्दाश्त नहीं कर रहे गत दिवस उन्होंने लाईफ लाईन एक्सप्रेस का उद्घाटन कर यह कह गए कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाऐं वेंटिलेंटर से भी खतरनाक है ऐसे में अब उनकी इस लाईफ लाईन को क्या कहेंगें जो शुरूआती दौर में ही मरीजों की सेवा करने के बजाए अपने मनमर्जी यालों में ही पुलाव पकाते रहते है। 

जो मरीज अपनी बीमारी का इलाज कराने आए वह भी उन चिकित्सकों का दो घंटे तक इंतजार करें जिन्हें विशेष रूप से इस लाईफ लाईन के द्वारा इन मरीजों का उपचार करना है।

ऐसे में समझा जा सकता है कि प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाओं और लाईफ लाईन में आने वाले मरीजों की स्थिति क्या है, यह तो स्वयं सांसद सिंधिया ही भलीभांति समझ सकते है महज कोरे बयानबाजी करने से कुछ नहीं अमले की दुरूस्ती से काम किया जाता है। 
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