माधवचौक की निज भूमि को बताकर ठोके नोटिस, दुकानदारो ने दिया ज्ञापन

Updesh Awasthee
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शिवपुरी। गांधी चौक के हनुमान मंदिर और उससे संलग्न दुकानदारों को एसडीएम के आदेश पर नगरपालिका द्वारा कल अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी किया गया। 

ये दुकानदार उन 150 से अधिक नपा द्वारा चिन्हित अतिक्रामकों में शामिल हैं जिन्हें नोटिस जारी किया गया है। नोटिस मिलने के बाद आज इन दुकानदारों ने कलेक्ट्रेट जाकर एसडीएम रूपेश उपाध्याय को अपना पक्ष स्पष्ट किया और बताया कि उनकी निजी स्वामित्व की जमीन को अतिक्रमण बता कर तोडऩे का प्रयास किया जा रहा है। 

इन दुकानदारों का नेतृत्व कर रहे रघुवरदास गोयल और विष्णु अग्रवाल ने इस संबंध में प्रशासन को रजिस्ट्री की छायाप्रति भी प्रस्तुत की और अपने आप को निर्दोष बताया। 

एसडीएम रूपेश उपाध्याय ने दुकानदारों का पक्ष सुनने के बाद मु य नगर पालिका अधिकारी रणवीर कुमार को आदेश दिया कि संबंधित पक्षों की सुनवाई करने के बाद वह अतिक्रमण तोडऩे के लिए गाईड लाईन बनायें और न्याय पूर्ण ढंग से कार्यवाही करें। इस अवसर पर एसडीओपी जीडी शर्मा और राजस्व विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित थे।

हनुमान मंदिर से संलग्न दुकानों के आठ दुकानदारों को नोटिस जारी किया गया है। जिनमें अग्रवाल एपलाईसेंस के विष्णु अग्रवाल, पंजाब इलैक्ट्रिकल्स के नरेश सढ़ाना, यादव मिष्ठान भण्डार के लाखन यादव, आशीष जैन त बाकू बाले, प्रेम स्टोर के अमित जैन आदि शामिल हैं। 

बताया जाता है कि ये दुकानदार रघुवरदास गोयल हनुमान मील बालों के किरायेदार हैं। एसडीएम से मिलने आये इन दुकानदारों के साथ रघुवरदास गोयल भी थे। श्री गोयल ने बताया कि सन् 1959 के पूर्व उनके स्वामित्व की जमीन पर चबूतरा बना हुआ था और श्री गोयल ने उस समय नगरपालिका के नक्शे को भी एसडीएम को दिखाया। 

उन्होंने बताया कि 1959 के बाद उन चबूतरों पर नगरपालिका से अनुमति लेकर दुकानें बनाई गई। उनका कहना था कि चबूतरे उनके स्वामित्व की जमीन है और उस समय भी रोड़ की चौड़ाई 36 फिट थी और दुकान बनने के बाद भी आज भी 36 फिट है। 

उनका सवाल था कि जब स्वामित्व की जमीन पर दुकानें बनाई गई तो फिर हम अतिक्रामक कैसे हुए। उनका पक्ष सुनने के बाद एसडीएम रूपेश उपाध्याय ने मु य नगरपालिका अधिकारी को निर्देशित किया कि वह अतिक्रमण हटाने के लिए गाईड लाईन बनाकर निर्णय लें। 


हाईकोर्ट के आदेश पर नपा हुई सक्रिय 
शहर से अतिक्रमण हटाने के लिए नगरपालिका इसलिए सक्रिय हुई क्योंकि शहर में बढ़ते अतिक्रमणों के कारण माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका ल िबत है और उच्च न्यायालय ने अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया है। 

इस मामले में 26 मार्च तक उच्च न्यायालय में नगरपालिका को अपना पक्ष स्पष्ट करना है। इसी कारण प्रशासन आनन फानन में कार्यवाही करने के मूड में है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अतिक्रमण तोड़े जाने के पूर्व अतिक्रमण सिद्ध करना भी आवश्यक है।
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