शिवपुरी। गाराघाट पुल पर सड़क में गड्डे के कारण अनियंत्रित होकर खाई में गिरी बस दुर्घटना कांड में प्रशासन ने ढाई लाख में मामला रफादफा कर दिया। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को 50—50 हजार की मदद की घोषणा की है, लेकिन इस दुर्घटना के जिम्मेदार उन अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई जिनकी लापरवाही के कारण सड़क में गड्डे हुए।
शिवपुरी से ग्वालियर जा रही निजी बस गाराघाट पुल पर 22 मार्च को दुर्घटनाग्रस्त होने पर पांच व्यक्तियों की मृत्यु हो गई थी। उनके परिजनों को संयुक्त कलेक्टर एवं अनुविभागीय अधिकारी राजस्व शिवपुरी श्रीमती नीतू माथुर द्वारा राजस्व पुस्तक परिपत्र खण्ड 6-4 के तहत प्रत्येक मृतक के परिजनों (वारिसान) को 50 हजार रूपए की आर्थिक सहायता अनुदान राशि स्वीकृत की गई है।
- जिन पीड़ितों को 50 हजार देकर चुप कराया जा रहा है उनके नाम है
- फिजीकल रोड़ निवासी मृतक नासिर उर्फ गुड्डु पुत्र बहीद खांन की पत्नि नाजमी खांन
- सिकरावली थाना भवरपुरा जिला ग्वालियर निवासी मृतिका श्रीमती कलिया गुर्जर के पति कृष्णा पुत्र गोपाल
- तिघारी थाना भौंती तहसील पिछोर शिवपुरी निवासी मृतक लालराम पुत्र दरियाव जोशी की पत्नि मुन्नीबाई
- धर्मपुरा थाना कोलारस शिवपुरी निवासी मृतक रामहेत पुत्र रामजीलाल गुर्जर की पत्नि रामरती
- 5वें का नाम प्रशासन ने अभी तक घोषित नहीं किया।
सवाल अब भी वही है। इस मामले में यात्रियों की मौत का जिम्मेदार वो कर्मचारी नहीं है जो इस बस को चला रहा था, बल्कि वो अधिकारी है जिसने इस सड़क में गड्डे होने दिए, वो आरटीओ है जिसने बस संचालक से रोडटैक्स तो वसूला लेकिन सड़क नहीं बनवाई। शासन के नाम पर मौत की दुकान संचालित नहीं की जा सकती। यदि विभाग है, उसमें अधिकारी भी मौजूद है तो उसे जवाब देना ही होगा। जनता को चाहिए कि वो जवाब मांगे, और यदि वो बरगलाने का प्रयास करे तो न्याय के लिए संघर्ष करे। जिम्मेदारों को जिम्मेदारी का अहसास कराना अब जरूरी हो गया है। मोटी मोटी तनख्वाहों पर इन्हें ऐसे ही नहीं पाला जा सकता।
