गिफ्ट में मिला शहर अध्यक्ष का पद छोड़ सकते है राकेश आमोल

shailendra gupta
शिवपुरी। प्रदेश में विधान सभा चुनाव में करारी हार के बाद लोकसभा चुवाव मे शिवपुरी में शिवपुरी विधानसभा से सिंधिया की हार से सगंठन के लिए संकट खड़ा हो गया था। जिम्मेदारों को तत्काल जि मेदारी लेते हुए अपना इस्तीफा देना चाहिए था। लेकिन राकेश जैन आमोल अब इस्तीफा देने जा रहै है ऐसी खबरे आ रही है।

दोनो चुनावो में करारी हार के बाद संगठन में बदलाव होने का अंदाजा लगाया जा रहा था। यह मामला टलता गया और जिला अध्यक्ष रामसिंह यादव भी विधायक बन जाने के कारण दोनो जिम्मेदारी उठाने में असमर्थ होते दिख रहै है ओर वे अपना मन ज्योदिरादित्या सिंधिया को भी बता चुके है।

शहर कांग्रेस अध्यक्ष राकेश जैन आमोल को अध्यक्ष पद एक तरह से गि ट में मिला था। संगठन के चुनाव में तो शहर अध्यक्ष राकेश गुप्ता बनाए गए थे, लेकिन अपनी सार्वजनिक छींछालेदर से आहत राकेश गुप्ता ने संगठन के कार्य से हाथ खींच लिए थे। इसके बाद राकेश जैन आमोल को यह महत्वपूर्ण दायित्व दिया गया था, लेकिन सूत्र बताते हैं कि अध्यक्ष के रूप में स्वतंत्र होकर वह कभी कार्य नहीं कर पाए।

उन पर अल्पसं यक वर्ग की एक लॉबी लगातार दबाव बनाए रही तथा सार्वजनिक स्थलों पर उनका इस लॉबी से जुड़े लोगों से विवाद भी हुआ था। लोकसभा चुनाव में शहर से कांग्रेस की पराजय के निष्कर्ष ने भी उनके मन को चोट पहुंचाई थी। श्री सिंधिया ने शहर से अपनी हार को काफी गंभीरता से लिया था और उन्होंने हार के कारणों की अपने स्तर पर जांच कराई।

बताया जाता है कि शिवपुरी में अनेक लोगों के पास फोन आए और उनसे पूछा गया कि श्री सिंधिया क्यों पराजित हुए। शहर के प्रभारी मोहन सिंह राठौर को बनाया गया और वह तीन-चार बार शिवपुरी आ चुके हैं और उन्होंने कहा कि श्री सिंधिया शहर से इसलिए चुनाव हारे, क्योंकि कांग्रेसियों को उनके प्रचार में जितनी ताकत लगानी चाहिए थी उतनी नहीं लगाई। बकौल मोहन सिंह राठौर, श्री सिंधिया क्षेत्र के लिए अनेक योजनाएं लेकर आए हैं।

जिनका अधिकांश फायदा शिवपुरी शहर को हुआ। लेकिन इसके बाद भी यदि श्री सिंधिया की पराजय हुई है तो इसके लिए संगठन ही जि मेदार है जो कार्यकर्ताओं में ऊर्जा नहीं फूंक पाया। इन तमाम कारणों से राकेश जैन ने हार की जि मेदारी स्वीकार करते हुए श्री सिंधिया से पद छोडऩे की इच्छा व्यक्त कर डाली। लेकिन इस पर श्री सिंधिया की प्रतिक्रिया क्या थी? यह स्पष्ट नहीं हो पाया।

शायद नपा चुनाव के बाद हो बदलाव
जिले के एक प्रभावशाली कांग्रेसी नेता ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शायद नपा चुनाव के बाद बदलाव हों। क्योंकि पार्टी संगठन बगावत की आशंका से कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि सब कुछ श्री सिंधिया की इच्छा पर र्नि ार है।


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