शिवपुरी। एक समय अपनी खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध शिवपुरी शहर इन दिनों दुर्दशा का शिकार बना हुआ है। सीवेज प्रोजेक्ट का कार्य चलने से सड़कें खोद दी गईं हैं और शहर में चारों ओर धूल ही धूल बिखरी हुई है। अतिक्रमण का बोलबाला है और बीच सड़क पर धड़ल्ले से प्रशासन की नाक के नीचे कारोबार चल रहा है।
यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। आचार संहिता के कारण प्रशासन भी हाथ पर हाथ रखे बैठा है और राजनेता भी बेफिक्र बने हुए हैं। सवाल यह है कि आचार संहिता हटने के बाद क्या शहर की तस्वीर बदलेगी। इस हेतु मात्र दो-तीन माह का ही समय बाकी है। इसके बाद नगरपालिका चुनाव की आचार संहिता लग जाएगी।
प्रशासन और राजनीत का शिकार हुई शहर की सड़कें और अतिक्रमण
शिवपुरी एक ऐसा शहर है जिसे प्रकृति ने अपने खूबसूरत हाथों से सजाया और संवारा है। सिंधिया राजवंश की कभी ग्रीष्मकालीन राजधानी रही शिवपुरी की बनावट भी महानगरों की तरह रही और यहां अधिकतर बाजारों में चौड़ी-चौड़ी सड़कें हैं, लेकिन पिछले 10-5 सालों में इस शहर की दशा काफी खराब हो गई है। इसके लिए जहां प्रशासन और राजनीति की अनदेखी जि मेदार है, वहीं नागरिकों में नागरिक बोध का अभाव भी मु य कारण है। पिछले तीन-चार माह से तो सीवेज प्रोजेक्ट की खुदाई के कारण शहर की सड़कें बुरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं। रही सही कसर क्रियान्वयन एजेंसी की लापरवाही के कारण पूरी हो रही है। जिसने बीच सड़क में खुदाई कर उसका मलवा पूरी सड़क पर फैला दिया है।
यहां हुआ अतिक्रमण, अब बने कब्जे
यही कारण है कि आंधी और हवा के कारण लाल मिट्टी उड़-उड़कर न केवल गंदगी बढ़ा रही है, बल्कि इससे नागरिकों का स्वास्थ्य भी बिगड़ रहा है। समझदार लोग तो एलर्जी की गोली खाकर जैसे तैसे काम चला रहे हैं, लेकिन अधिकांश लोग धूल के कारण बीमार बने हुए हैं। शिवपुरी एक ऐसा शहर है जहां कोई देखने-सुनने वाला नहीं है। इसी कारण शहर में धड़ल्ले से अतिक्रमण बढ़ रहे हैं और नगरपालिका तथा प्रशासन लापरवाह बने हुए हैं। कोर्ट रोड, सदर बाजार, लखेरा गली, बताशा गली, टेकरी गली, आर्य समाज रोड, कमलागंज, पुरानी शिवपुरी आदि क्षेत्रों में अतिक्रमण का बोलबाला है। शहर की सबसे चौड़ी सड़क कोर्ट रोड पर है। इसके बाद भी यहां दिन में अनेकों बार जाम लगता है। खासकर लड़ा साहब की दुकान के सामने और सब्जी मण्डी के सामने हालात खासे खराब हैं। ऐसा क्यूं इसका एकमात्र कारण है कि यहां के दुकानदारों ने सड़कों पर अतिक्रमण कर लिया है। सब्जी मण्डी के सामने तो बीच सड़क पर फल मण्डी संचालित हो रही है। सुबह तो हालात ऐसे हो जाते हैं कि पूरी सड़क गायब हो जाती है और थोक फल बिक्रेता अतिक्रमण कर लेते हैं जिससे यहां काफी देर तक यातायात बाधित रहता है।
स्कूल बसें भी करती ट्रेफिक को अनियंत्रित
खासकर स्कूल जाने वाली बसें इनके आतंक से परेशान हैं। कभी-कभी तो मरीज को लेकर आने वाली ए बुलेंस भी जाम लगने के कारण खड़ी रहती है। बाजारों में नाली के बाहर भी सैंकड़ों दुकानदारों ने अतिक्रमण कर लिया है। यही स्थिति माधवचौक और गांधी चौक क्षेत्र में है। माधवचौक में तो अपनी दुकान के बाहर दुकानदारों ने 5-5, 7-7 फीट का अतिक्रमण कर रखा है। माधवचौक से पुराना प्राइवेट बस स्टेण्ड जाने की सड़क की भी हालत अतिक्रमण के कारण बिगड़ी हुई है। विवाह-शादी होने पर यहां घंटों जाम अक्सर लगा रहता है। इस स्थिति से कैसे निपटा जाए यह एक बड़ा सवाल है। शहर में इसी कारण अनेक बार अतिक्रमण विरोधी अभियान चल चुका है, लेकिन जब भी किसी प्रभावशाली हस्ती के अतिक्रमण हटाने की बात आती है तो यह अभियान टांय-टांय फिस्स हो जाता है। इसके बाद भी यदि प्रशासन चाहे तो स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित कर सकता है इससे कम से कम शहर की यातायात व्यवस्था ठीक हो सकती है, वहीं सुंदरता भी निखर सकती है।
अतिक्रमण मुक्त हो शहर तभी बनेंगी व्यव्स्थाऐं
प्रशासन को आचार संहिता हटने के बाद सबसे पहले अस्थाई अतिक्रमणों को हटाने की ओर ध्यान देना होगा। बाजार में नाली के प्रोजेक्शन के बाद किए गए अस्थाई अतिक्रमणों को यदि हटा दिया जाए तो व्यवस्थाएं काफी ठीक हो सकती हैं। जहां तक जीर्णशीर्ण सड़कों का सवाल है तो यह संभावना काफी कम है कि आचार संहिता के बाद नई सड़कें बनेंगी। इसका कारण यह है कि अभी तो पानी की लाइन की खुदाई का काम भी होना है। उच्च न्यायालय के फैसले के बाद सिंध परियोजना के क्रियान्वयन पर लगी रोक हट गई है, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हुआ है और काम शुरू होने के बाद भी कम से कम दो-तीन माह इसमें लग सकते हैं। इसके बाद बरसात शुरू हो जाएगी और फिर नगरपालिका चुनाव की आचार संहिता लग जाएगी। इस कारण सड़कों का कार्य जल्दी शुरू होगा। इसकी संभावना कम है, लेकिन अस्थाई अतिक्रमण हटाकर कम से कम यातायात व्यवस्था को ठीक करने की पहल तो की ही जा सकती है।