पहले भी कई दिग्गज चूम चुके हैं बीएसपी के चरण, फिर लौटकर...

shailendra gupta
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शिवपुरी। 2003 के विधानसभा चुनाव में करैरा से आश्चर्यजनक रूप से बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी लाखन सिंह बघेल क्या विजयी हुए सभी पद लोलुप नेताओं को लगने लगा कि उनकी महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति बहुजन समाज पार्टी से संभव है। इसके बाद बसपा में टिकट की हशरत में आयातित नेताओं की बाढ़ आ गई।

कांग्रेस, भाजपा के लगभग 1 दर्जन नेताओं ने बसपा की शरण ली और बसपा ने भी इस मौके को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन मतदाताओं ने ऐसे दलबदलुओं को पसंद नहीं किया। बसपा में आया एक भी दलबदलू प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत सका। परिणाम यह हुआ कि आयातित नेता पुन: अपने मूल दल में वापिस लौट गए हैं।

टिकट की महत्वाकांक्षा में बसपा में आने वाले नेताओं में पूर्व विधायक हरिवल्लभ शुक्ला, स्व. शीतल प्रकाश जैन, विजय प्रताप सिंह चौहान, चंद्रभान सिंह यादव, कौशल किशोर शर्मा, राकेश लोधी आदि प्रमुख थे। इनमें से हरिवल्लभ शुक्ला ने 2008 के विधानसभा चुनाव में बसपा टिकट पर पोहरी से चुनाव लड़ा था। स्व. शीतल प्रकाश जैन कांग्रेस से नाता तोड़कर बसपा में शामिल हुए थे और उन्होंने शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र से भाग्य आजमाया था।

2003 के विधानसभा चुनाव में विजय प्रताप सिंह चौहान शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र से बसपा टिकट पर मैदान में आए। 2008 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने पहले कांग्रेस से आयतित राकेश लोधी को उ मीदवार बनाया और बाद में उनका टिकट काटकर कौशल किशोर शर्मा को मैदान में उतार दिया, लेकिन मतदाताओं ने इसे पसंद नहीं किया। परिणाम यह हुआ कि बसपा के इन उ मीदवारों को न तो पार्टी के परंपरागत मत मिल सके और न ही सवर्ण वर्ग ने इसे पसंद न कर उ मीदवारों को नकार दिया।

2003 के विधानसभा चुनाव में विजय प्रताप सिंह चौहान की जमानत जप्त हुई और 2008 में पोहरी से हरिवल्लभ शुक्ला 20 हजार से अधिक मतों से पराजित हो गए। शिवपुरी से शीतल प्रकाश जैन ने भी बुरी तरह मात खाई। कौशल किशोर शर्मा को जमानत से हाथ धोना पड़ा। आयातित नेताओं की बड़ी दुर्गति बसपा में आने के बाद हुई। इससे सबक लेते हुए ये सभी नेता नए ठिकाने तलाशने लगे। हरिवल्लभ कांग्रेस में आ गए। शीतलप्रकाश जैन ने बसपा की शरण ली। विजय प्रताप सिंह पुन:भाजपा में आ गए। राकेश लोधी मूल दल कांगेे्रस में लौट गए। जबकि कौशल किशोर शर्मा ने भाजपा को पुन: अपना आशियाना बनाया।

2008 में कोलारस से चंद्रभान सिंह यादव ने टिकट के लिए काफी जोर आजमाइश की, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला। 2013 में वह टिकट लेने में सफल हो गए। लेकिन परिणाम वही रहा जो अन्य आयातित नेताओं का हुआ। इसके बाद चंद्रभान सिंह भी 7 साल बसपा में रहने के बाद कांग्रेस में लौट आए। बसपा में अब पार्टी के परंपरागत कार्यकर्ता हैं। गुना लोकसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक लाखन सिंह बघेल बसपा टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। विधानसभा चुनाव में श्री बघेल ने पोहरी से चुनाव लड़ा था और वह 35 हजार से अधिक मत लेने में सफल रहे थे। वह पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं। जबकि ग्वालियर से आलोक शर्मा अपना भाग्य आजमा रहे हैं। आलोक शर्मा आयातित नेता हैं और कांग्रेस से आकर उन्होंने बसपा की सदस्यता ली है।

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