ललित मुदगल/शिवपुरी। आम लोकसभा चुनावों की रणभेरी बज चुकी है परन्तु इस चुनाव की चर्चा से ज्यादा सेक्स स्कैंडल का भूत चर्चित है। सोशल मीडिया द्वारा चर्चा में आए इस मामले मेें मुख्यत: शहर के प्रतिष्ठित व्यापारीयों को नाम इशारों-इशारों में आ रहा है।
इस सेक्स स्कैंडल को लेकर शहर में कई तरह की चर्चाए हो रही है। ग्वालियर से प्रकाशित एक सामाचार पत्र में प्रतिदिन इस स्कैंडल की खबरे प्रकाशित की जा रही है। खबर का मूल मुद्दा यह है कि शहर के कुछ व्यपारियों द्वारा शहर की लड़कियों को अपने व्यापार हित के लिए कॉलगर्ल बनाया जा रहा है। उनका एमएमएस बनाकर लगातार दैहिक शोषण किया जा रहा है। ऐसा प्रकाशित किया जा रहा है।
यह सामाचार पत्र दावा कर रहा है कि कई लड़कियों का जबरन मोबाईल में एमएमएस बनाकर उन्है और उनके परिवारो की बदनामी का डर दिखाकर लगातार इन व्यापारियों द्वारा अपने व्यापार हित के लिए परोसा जा रहा है।
इस सेक्स स्कैंडल में लगातार एक लोहा व्यापारी, एक मिठाई बेचने वाला, लोहा व्यापारी, जमीनों का व्यापारी, मिर्ची व्यापारी, मेडिकल विक्रेता, आरामशीन का काम करने वालो के नाम शोसल मीडिया और सामाचार पत्र मेें प्रकाशित किये जा रहे है।
सामाचार पत्र यह भी दावा कर रहा है कि सेक्स स्कैंडल चर्चा में आने के कारण इन व्यापारियों द्वारा एक लड़की के घर आठ लाख रूपये तक का ऑफर भी आ चुका है। और उसकी दर्द भरी दास्ता कभी भी शहर के सामने आ सकती है। वह अपनी दास्ता को प्रदेश के मुखिया को सुनाना चाहती है। कभी भी प्रकट हो सकती है, जूली।
अब सवाल यह खड़ा होता है कि अगर किसी सामाचार पत्र या किसी भी सोशल वर्कर के पास ऐसे किसी भी सेक्स स्कैंड़ल के कोई भी प्रमाणित तथ्य है। तो वह प्रकाशित क्यो नही करता है। या कोई भी जूली, टीना, मीना या और भी कोई नाम की लड़की है तो उसे बताता क्यों नहीं कि एसपी शिवपुरी का ऑफिस इसी शहर में है किसी अन्य देश में नही।
शिवपुरी सामाचार डॉट कॉम किसी व्यापारी या व्याक्ति को क्षमा नही करेगा जो किसी भी ऐसे सेक्स स्केण्डर में संलिप्त हो परन्तु इस पूरे प्रकरण को देखकर यह अवश्य कहना चाहेगा कि कोई मिठाई वाला, कोई मिर्ची वाला, कोई लोहा व्यापारी या कोई आरामशीन व्यापारी कैसे किसी लड़की को परोसकर मिठाई बेच सकता है या मिर्ची बेच सकता है, लोहा बेच सकता है यह प्रश्न सभी शहरवासियों के जेहन में है। अगर किसी समाचार पत्र के पास इस सैक्स स्केण्डल की जानकारी है या तथ्य है तो वह शीघ्र प्रकाशित करें या फिर तब तक प्रतीक्षा करे जब तक कि उसके पास पर्याप्त साक्ष्य ना हों।