कलेक्टर की कार्रवाई का हरसूं हो रहा जिक्र | कभी नसबंदी का टारगेट, कभी लिंगानुपात की फिक्र

shailendra gupta
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सेन्ट्रल डेस्क
शिवपुरी कलेक्टर की आखिर मंशा क्या है, लोग समझ नहीं पा रहे हैं। एक तरफ तो नसबंदी के लिए इस कदर पिल पड़े हैं कि लगता है उन्हें कुछ दिखाई ही नहीं दे रहा और दूसरी ओर कार्यशालाओं में लिंगानुपात पर चिंता जता रहे हैं। सवाल केवल यह है कि जब नसबंदी ही हो जाएगी तो कन्या का जन्म होगा कैसे..? नसबंदी के लिए मच रही हायतौबा तो आप रोज ही पढ़ रहे हैं, अब देखिए क्या खबर आ रही है शिवपुरी ऑफिस की ओर से :-
कलेक्टर ने लिंगानुपात पर चिंता जताई
गर्भ धारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीकी, लिंग चयन प्रतिबंध अधिनियम 1994 पर आज एक दिवसीय कार्यशाला जिला कलेक्टर श्री जॉन किंग्सली के मुख्य आतिथ्य में समपन्न हुई कार्यशाला में वक्ताओं ने कन्या भ्रूण हत्या रोकने एवं इस अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर अपने-अपने विचार व्यक्त किये। कार्यशाला में चिकित्सा विभाग के चिकित्सकगण, अल्ट्रासोनोग्राफी केन्द्रों एवं नर्सिगहोमों के संचाकलगण तथा महिला चिकित्सक तथा संबंधित विभागों के अधिकारीगण आदि उपस्थित थे।

जिलाधीश जॉन किंग्सली ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि जिले में पुरूषों की अपेक्षा महिलाओं का अनुपात कम है जो चिंता का विषय है। उन्होने कहा कि कन्या भु्रण हत्या रोकने में समाज के सभी वर्गों को सहयोग करना होगा। इसके लिये विभिन्न माध्यमों से समाज की सोच में भी बदलाव लाना होगा और हमें बालिकाओं के संरक्षण पर विशेष ध्यान देना होगा। 

अपर कलेक्टर आर.बी. प्रजापति ने कहा कि महिलाओं के प्रति भेदभाव एवं असमानता देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी है, लेकिन हमारे देश में यह कुछ अधिक है। इसके पीछे सामाजिक कूप्रथाएं एवं परम्पराएं भी है, जो समाज को कलंकित करती है। उन्होंने कहा कि समाज एवं परिवार को महिलाओं के प्रति भेदभाव दूर करने हेतु समाज को जागरूक करने की भी आवश्यकता है। 

सिविल सर्जन डॉ. गोविन्द सिंह ने कहा कि लिंग अनुपात का असतुलन एक गंभीर मुददा है जो सामाजिक परिवेश को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि अल्ट्रासाउड मशीन की खोज का मुख्य उद्देश्य गर्भ में शिश्ुा की विकृति को मालूम करना था, लेकिन इसका गलत प्रयोग लिंग परीक्षण में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लिंग परीक्षण में क्रोमोसोम अहम भूमिका निभाते हैं। डॉ. गोविन्द सिंह ने कहा कि राज्य सरकार की महिला सशक्तिकरण की योजनाओं के कारण समाज में महिलाओं के प्रति सोच में बदलाव आया है। 

एडवोकेट सुश्री शैला अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि हमे महिलाओं को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि धार्मिक कार्यों में बेटी की अपेक्षा बेटों को महत्व दिया जाता है समाज को इस सोच को बदलना होगा। सुश्री विद्या पांडे ने पीसी एण्ड पीएनडीटी एक्ट की विस्तार से जानकारी देते हुए अधिनियम के तीन पहलू पंजीयन, दस्तावेजीकरण, निगरानी व दण्ड के प्रावधानों की जानकारी दी। 

कार्यक्रम के शुरू में डॉ. संजय ऋषिश्वर ने देश एवं प्रदेशों में सेक्स रेशो की जानकारी देते हुए कहा कि देश में 1981 के बाद सेक्स रेशो तेजी से कम हुआ है। बांग्लादेश, श्रीलंका, जापान जैस देशों का सेक्स रेशो भारत की अपेक्षा काफी अधिक है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.एस.दण्डौतिया ने कार्यशाला पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित लोगों से कन्या भु्रण हत्या नहंीं करने का संकल्प पत्र भरवाये। 

कार्यक्रम के अंत में डॉ. श्रीमती अल्का त्रिवेदी ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किये। कार्यक्रम में कन्या भ्रुण हत्या रोकने पर केन्द्रित डॉक्यूमेन्ट्री फिल्मों का भी प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में अनुविभागीय दण्डाधिकारी पिछोर उमेश शुक्ला विशेष रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आर.के. श्रीवास्तव ने किया।
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