शिवपुरी। चार बच्चों की मौत के बाद भी परिवार पर मंडराया बीमारी का साया अभी खत्म नहीं हुआ है। पिछले करीब 15 दिनों में फिजिकल थाना क्षेत्र के सामने और हम्माल मोहल्ला क्षेत्र से जुड़े परिवार में चार बच्चों की मौत के बाद अब बुधवार देर शाम उसी परिवार के चार और बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। हालत गंभीर होने पर सभी को बेहतर उपचार के लिए ग्वालियर रेफर किया गया है। सबसे चिंता की बात यह है कि बीमारी की असली वजह अब तक सामने नहीं आ सकी है।
बुधवार को स्वास्थ्य विभाग द्वारा लिए गए परिजनों के 50 ब्लड सैंपल की रिपोर्ट में डेंगू, मलेरिया समेत किसी बीमारी की पुष्टि नहीं हुई है। सभी रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी बच्चों में बुखार, पेट दर्द और अन्य स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें सामने आ रही हैं। एक बच्ची के लिवर में भी परेशानी बताई गई है, जिसके चलते चिकित्सकों ने सभी चार बच्चों को बेहतर जांच और इलाज के लिए ग्वालियर भेजने का निर्णय लिया।
चार मौतों के बाद चार बच्चों की तबीयत बिगड़ी
जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले दोनों परिवार कोलारस क्षेत्र के गोरा टीला झरने पर पिकनिक मनाने गए थे। इसके बाद परिवार में बच्चों की तबीयत खराब होने का सिलसिला शुरू हुआ और एक के बाद एक चार बच्चों की मौत हो गई। घटना सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया।
बुधवार को कलेक्टर अर्पित वर्मा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएमएचओ डॉ. संजय ऋषिश्वर को निर्देश दिए कि पिकनिक पर गए सभी परिजनों की स्वास्थ्य जांच कराई जाए। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सकों की दो टीमें गठित कर परिवार और संपर्क में आए लोगों के करीब 50 ब्लड सैंपल लिए। रिपोर्ट आने के बाद राहत की बात यह रही कि किसी भी सैंपल में डेंगू, मलेरिया या अन्य जांची गई बीमारी की पुष्टि नहीं हुई। लेकिन इसी बीच बुधवार शाम चार बच्चों की तबीयत बिगड़ने से प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चिंता फिर बढ़ गई।
बुखार-पेट दर्द की शिकायत, एक बच्ची के लिवर में दिक्कत
जिन चार बच्चों को ग्वालियर रेफर किया गया है, उनमें अयान पुत्र असर मोहम्मद, इनायत पुत्री रजा मोहम्मद, आफिया बानो पुत्री आसिफ खान और ताशीन पुत्री तौकीर अहमद शामिल हैं। बताया गया है कि इन बच्चों में बुखार, पेट दर्द सहित अन्य शिकायतें सामने आ रही थीं। हालत में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर चिकित्सकों ने उन्हें ग्वालियर रेफर किया। सीएमएचओ के अनुसार इनमें एक बच्ची के लिवर में परेशानी सामने आई है, इसलिए सभी बच्चों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा के लिए भेजा गया है।
गोरा टीला झरने के पानी को लेकर प्रशासन सतर्क
चार बच्चों की मौत के बाद गोरा टीला झरना भी जांच के दायरे में आ गया है। दोनों परिवार 16 अगस्त को कोलारस के गोरा टीला झरने पर गए थे। यहां उन्होंने नहाने के साथ पिकनिक भी मनाई थी। इसके बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ने के कारण प्रशासन ने झरने के पानी के सैंपल भी जांच के लिए लिए हैं।
कोलारस एसडीएम शिवदयाल धाकड़ ने प्रशासनिक अमले, पटवारी, सरपंच और ग्रामीणों के साथ सिद्ध बाबा बरसाती नाले से निकलने वाले झरने और गोरा टीला क्षेत्र का सघन निरीक्षण किया। स्वास्थ्य विभाग को गांव में सर्वे करने और ग्रामीणों की लगातार स्वास्थ्य निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि अभी तक यह साबित नहीं हुआ है कि बच्चों की बीमारी या मौत का कारण झरने का पानी ही है। पानी के नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
रिपोर्ट निगेटिव, फिर बीमारी का कारण क्या
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि जब परिजनों के ब्लड सैंपल में डेंगू, मलेरिया या अन्य जांची गई बीमारियां नहीं मिलीं, तो आखिर बच्चों की तबीयत लगातार क्यों बिगड़ रही है?
स्वास्थ्य विभाग अब अन्य संभावित कारणों की भी पड़ताल कर रहा है। चिकित्सकों की निगाह बच्चों के लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और अन्य जांच रिपोर्टों पर है। चार नए बच्चों को ग्वालियर भेजे जाने के बाद अब वहां होने वाली विस्तृत जांच से बीमारी के कारण को लेकर महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है।
सीएमएचओ डॉ. संजय ऋषिश्वर का कहना है कि मंगलवार को परिजनों के सैंपल लिए गए थे, जिनमें डेंगू, मलेरिया या अन्य बीमारी नहीं मिली। बुधवार को रेफर किए गए बच्चों में एक बच्ची के लिवर में परेशानी थी, इसलिए सभी को बेहतर इलाज के लिए ग्वालियर भेजा गया है। स्वास्थ्य विभाग बीमारी का कारण पता करने में जुटा हुआ है।
मृतकों के परिवार को डेढ़ लाख की मदद
इधर जिला प्रशासन ने इस संकट की घड़ी में मृतक बच्चों के परिवारों को आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई है। प्रशासन की ओर से दोनों परिवारों को रेडक्रॉस के माध्यम से कुल डेढ़ लाख रुपए की राहत राशि दी गई। अपर कलेक्टर दिनेश चंद शुक्ला और स्वास्थ्य विभाग की टीम परिवारों के पास पहुंची और उन्हें सहायता राशि प्रदान की। अधिकारियों ने परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।
जांच रिपोर्ट आने तक झरने से दूर रहने की अपील
प्रशासन ने एहतियात के तौर पर ग्रामीणों और आम लोगों से अपील की है कि जांच रिपोर्ट आने तक गोरा टीला झरने के पानी का उपयोग न करें। झरने के पानी में नहाने, पीने या घरेलू काम में इस्तेमाल करने से बचने की चेतावनी दी गई है।
अब सबकी नजर पानी के सैंपल और ग्वालियर भेजे गए बच्चों की मेडिकल जांच पर टिकी है। चार बच्चों की मौत के बाद चार और बच्चों के बीमार पड़ने से परिवार में दहशत का माहौल है, जबकि स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती बीमारी की असली वजह तक पहुंचना है।

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