शिवपुरी/कोलारस. गुणवत्ताविहीन निर्माण कार्यों एवं भ्रष्ट कारगुजारियों के लिए हमेशा चर्चा में रहने वाली जनपद पंचायत कोलारस में कमीशनखोरी का मर्ज इतना लाईलाज हो गया है कि केन्द्र सरकार द्वारा संचालित इंदिरा अवास योजना यहां पूरी तरह से दम तोड़ चुकी है। हर साल आने वाले इंदिरा आवास योजना के आधा करोड़ रूपए के बजट का इतने सुनियोजित तरीके से बंदरवॉट किया जा रहा है जिसके चलते इंदिरा आवास की कुटीरें जमीन पर बनने की बजाय कागजी आंकड़ों के मकडज़ाल में उलझकर रह गई हैं।
वर्ष 2010-11 हेतु कोलारस जनपद पंचायत में इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत 51 लाख 31 हजार रूपए 114 कुटीर बनाने के लिए जिला पंचायत द्वारा भेजे गए लेकिन बास्तविकता के धरातल पर एक भी कुटीर का निर्माण नहीं हो सका। इसी तरह वर्ष 2009-10 में 98 कुटीर मंजूर की गई। केन्द्र सरकार द्वारा प्रति कुटीर के मान से 45 हजार रूपए प्रति हितग्राही को दिए जाते हैं। हरिजन-आदिवासी बाहुल्य कोलारस विधानसभा क्षेत्र में जनपद की मशीनरी द्वारा दलित एवं आदिवासियों का एक सुनियोजित ढंग से इतना शोषण किया जा रहा है कि बिना कमीशन के किश्त की राशि खाते में नहीं भेजी जाती लिहाजा हितग्राही को मजबूर होकर जनपद के नुमाइंदों को रिश्वत देना पड़ती है।
रिश्वत देने के बाद हितग्राही के हाथ में इतना पैसा नहीं बचता कि जिससे वह अपनी कुटीर का निर्माण कर सके। कोलारस जनपद पंचायत में हर वर्ष आधा करोड़ रूपया इंदिरा आवास योजना के तहत हितग्राहियों के लिए आ रहा है मगर जनपद पंचायत के तथाकथित अधिकारी व कर्मचारियों की भ्रष्ट नीतियों के कारण कुटीरों का निर्माण कार्य न किया जाकर पैसे का बंदरवॉट किया जा रहा है। कुछेक चालबाज सरपंच-सचिव एवं अधिकारी कर्मचारी मिलकर इस योजना को पलीता लगाने में लगे हुए हैं।
जिनके पहले से मकान, उन्हें दी गईं कुटीर
इंदिरा आवास योजना अंतर्गत हितग्राहियों का चयन करने के लिए जो प्राथमिकताएं तय की हैं उनमें सर्वप्रथम बंधुआ मजदूर, प्रताडि़त अजा, जजा के परिवार, इसके अलावा प्राकृतिक आपदाओं के पीडि़त परिवार एवं गरीबी रेखा के नीचे बसर करने वाले परिवार आते हैं। लेकिन कोलारस जनपद पंचायत में इन प्राथमिकताओं के उलट सरपंच-सचिवों के कहने पर अधिकारियों द्वारा हितग्राहियों का चयन किया जाता है। ग्राम पंचायत बैढ़ारी व गुणा आदिवासी बाहुल्य पंचायत है। इस पंचायत के आदिवासियों को छत की छाया भी नसीब नहीं है। रामचरण आदिवासी महाराज आदिवासी ने बताया कि जिनके पास रहने के लिए मकान हैं उन्हें कुटीरे दी जाती हैं।
बेंहटा, पड़ोरा, कुल्हाड़ी, सिंघराई विजरावन, राई, पहाड़ी, धुंवा, कुमरौआ, अनंतपुर, टीला, दीगोद के ग्रामीणों ने बताया कि इंदिरा आवास के तहत हर साल हितग्राही के चयन में मनमानी की जाती है। गणेशखेड़ा पंचायत के ग्रामीणों ने सरपंच-सचिव की कार्यप्रणाली पर रोष जाहिर करते हुए बताया कि वर्ष 2010-11 में सात कुटीर स्वीकृत हुईं जिनमें से पांच कुटीरों का चयन ऐसे लोगों के नाम किया गया जिनके पहले से ही रहने लायक मकान हैं। राई पंचायत के गांव बूढ़ी राई में दो कुटीरों को मंजूर किया लेकिन एक भी नहीं बनी। शासन के पैसे का दुरूपयोग किया गया। रांछी पंचायत में पांच कुटीरों का नियम विरूद्व चयन कर शासन के धन की बर्वादी की गई।
लुकवासा पंचायत में एक भी कुटीर का निर्माण नहीं कराया गया। जिन लोगों के पहले से खासे मकान बने हैं उन्हें कुटीरों के लिए चयनित किया गया। सरजापुर एवं साखनौर पंचायत में भी नियम विरूद्व हितग्राही का चयन किया गया। कुलामिलाकर कोलारस जनपद पंचायत में केन्द्र सरकार की इंदिरा आवास योजना को अधिकारी और पंचायत के सरपंच-सचिव मिलकर पलीता लगाने में लगे हुए हैं। जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को यह भलिभांति ज्ञात है कि कुटीरों की रिपोर्ट जारी करने में कमीशनखोरी हो रही है इसके बावजूद वह कुछ नहीं देख रहे हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
क्या कहते हैं अधिकारी
इंदिरा आवास योजना के हितग्राहियों का चयन प्रतीक्षा सूची के आधार पर किया गया। हितग्राही के खाते में राशि जमा होती है। हितग्राही यदि कुटीर का निर्माण नहीं करे तो कार्रवाई का प्रावधान नहीं है।
आरके श्रीवास्तव
सीईओ जनपद कोलारस
आरके श्रीवास्तव
सीईओ जनपद कोलारस

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