शिवपुरी। मध्यप्रदेश सरकार ने सिनेमाघरों (सिनेमैटोग्राफ) के संचालन और लाइसेंसिंग प्रक्रिया को और अधिक स्पष्ट व सख्त बनाने के लिए "मध्यप्रदेश सिनेमा (विनियमन) संशोधन अधिनियम' लागू कर दिया है।
इस नए कानून के तहत अब नगर निगम क्षेत्रों में कमिश्नर और अन्य क्षेत्रों में कलेक्टर या उनके द्वारा अधिकृत एसडीएम स्तर के अधिकारी को लाइसेंसिंग अथॉरिटी का अधिकार दिया गया है। इसके साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले सिनेमाघर संचालकों के खिलाफ जुर्माने के प्रावधानों को भी कड़ा कर दिया गया है। शासन ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंसिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से यह संशोधन प्रभावी किया गया है। सिनेमा संचालकों को निर्धारित गाइडलाइंस और सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा।
कौन जारी करेगा लाइसेंस ?
1. नगर निगम क्षेत्रः नगर पालिक निगम की सीमाओं के भीतर अब कमिश्नर (आयुक्त) अनुज्ञापन प्राधिकारी होंगे।
2. नगर पालिका, नगर परिषद व अन्य क्षेत्रः नगर पालिका परिषद, नगर परिषद और ग्रामीण इलाकों के लिए जिला मजिस्ट्रेट (कलेक्टर) या उनके द्वारा अधिकृत कार्यपालिक मजिस्ट्रेट (जो एसडीएम / डिप्टी कलेक्टर से नीचे के रैंक के नहीं) लाइसेंस जारी करेंगे।
3. नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्मानाः यदि कोई सिनेमाघर संचालक अधिनियम या बनाए गए नियमों की शतों का उल्लंघन करता है, तो उस पर 50,000 रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। यदि उल्लंघन निरंतर जारी रहता है, तो प्रति दिन के हिसाब से 5,000 रुपए का अतिरिक्त दंड देना होगा।
अब तक आबकारी विभाग के अंतर्गत सिनेमा घर आते थे और साथ अन्य व्यवस्थाओं को अमली जामा पहनाते थे। लेकिन अब यह निर्णय सीधे कलेक्टर ले वहीं इसके संचालन के साथ सकेंगे और वे जिला स्तर पर अधिकारी को नियुक्त कर एसडीएम या डिप्टी कलेक्टर को कार्य भार सौंपेंगे।

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