शिवपुरी। मप्र के एक्स सीएम की 2 साल पुरानी शिवपुरी नगर पालिका को नगर निगम मे कनवर्ड करने की योजना पर पुन:कागजी कार्यवाही शुरू हो चुकी है। अब कागजो मे शहर के विस्तार के बाद संभावित
फायनल नक्शा भी उभर कर सामने आ गया है। अब शिवपुरी शहर के समीप सटे 16 गांव को शिवपुरी को नगर निगम का उदय कराने के लिए मिलाया जाऐगा,इस कारण अब 39 वार्ड से 60 वार्ड होने की संभावना है। नगरीय प्रशासन विभाग के निर्देश पर जिला प्रशासन को 30 दिन में वार्डों का परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया पूरी कर प्रस्ताव भोपाल भेजना है।
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वर्ष 2024 में पोलो ग्राउंड पर आयोजित सभा में शिवपुरी को नगर निगम बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद तत्कालीन कलेक्टर रवींद्र कुमार चौधरी ने 27 जून 2025 को शासन को प्रस्ताव भेजा था। इसमें शिवपुरी जनपद के 12 और कोलारस जनपद के 4 गांवों को शामिल करने का प्रस्ताव था। इन गांवों को जोड़ने पर प्रस्तावित निगम क्षेत्र की आबादी 2 लाख 73 हजार 326 बताई गई थी। हालांकि, प्रस्ताव भेजे जाने के करीब 15 महीने बाद भी नगर निगम का दर्जा नहीं मिल सका है। अब परिसीमन और आरक्षण की तैयारी से इस प्रक्रिया के आगे बढ़ने की उम्मीद जगी है।
हर वार्ड की औसत आबादी 4,700 रखने की तैयारी
नए परिसीमन में वार्डों की आबादी के बीच असमानता कम करने पर जोर रहेगा। प्रस्ताव के अनुसार, प्रत्येक वार्ड की औसत आबादी करीब 4,700 रखने की योजना है। इसमें 15 प्रतिशत तक कमी या बढ़ोतरी की छूट का प्रावधान प्रस्तावित है। इससे वार्डों का गठन आबादी के अपेक्षाकृत संतुलित वितरण के आधार पर किया जा सकेगा। परिसीमन, आरक्षण और नगर निगम गठन पर अंतिम निर्णय शासन को लेना है।
एक वार्ड में 14,783 तो दूसरे में सिर्फ 1,815 की आबादी
वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, शिवपुरी के वार्ड क्रमांक 15 की आबादी 14,783 थी, जबकि वार्ड क्रमांक 33 की आबादी महज 1,815 दर्ज की गई थी। दोनों वार्डों की आबादी में आठ गुना से भी अधिक अंतर था। आबादी के इस अंतर के कारण सफाई, पेयजल और अन्य नागरिक सुविधाओं की जरूरतें भी अलग-अलग हो सकती थीं।
अब नए परिसीमन में आबादी के आधार पर वार्डों की सीमाएं तय करने की तैयारी है। इससे वार्डों के प्रतिनिधित्व में संतुलन लाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, विकास कार्यों के लिए प्रत्येक वार्ड को कितना बजट मिलेगा, यह संबंधित आवंटन नियमों और शासन के निर्णय पर निर्भर करेगा।
16 गांव जुड़ेंगे, शहरी सीमा का होगा विस्तार
प्रस्तावित नगर निगम में शिवपुरी जनपद के चंदनपुरा, नोहरीकला, सिंहनिवास, ठर्र, दर्शनी, ईटमा, पिपरसमा, रायश्री, सतेरिया, बांसखेड़ी, बड़ागांव और रातौर गांवों को शामिल करने की योजना है। इसी तरह कोलारस जनपद के पड़ौरा सड़क, सेसई सड़क, बेहटा और खोकर गांवों को भी निगम सीमा में शामिल करने का प्रस्ताव है।
इन गांवों के शामिल होने से शिवपुरी का शहरी क्षेत्र विस्तृत हो जाएगा। लेकिन ग्रामीण क्षेत्र से शहरी सीमा में आने वाले लोगों के सामने सड़क, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट और अन्य बुनियादी सुविधाओं का सवाल भी रहेगा। निगम गठन के बाद इन सुविधाओं का विस्तार किस समयसीमा में होगा, यह महत्वपूर्ण होगा।
दूर के गांवों को लेकर सीमा में बदलाव की संभावना
प्रस्तावित निगम में शामिल किए जाने वाले कोलारस जनपद के चार गांव शहर से करीब 18 से 20 किलोमीटर दूर बताए गए हैं। पूर्व सीएमओ रामनिवास शर्मा के अनुसार, जनगणना के नए आंकड़े सामने आने के बाद निगम की सीमा में बदलाव की संभावना पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, किसी गांव को शामिल करने या हटाने तथा निगम की सीमा में परिवर्तन का फैसला संबंधित नियमों और सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी पर निर्भर करेगा।
तीन लाख के पार पहुंच सकती है आबादी
वर्ष 2025 में शासन को भेजे गए प्रस्ताव में शिवपुरी शहर की आबादी 2.24 लाख बताई गई थी। इसमें प्रस्तावित 16 गांवों की 48,542 आबादी जोड़ने पर कुल आबादी 2 लाख 73 हजार 326 हो गई थी। वर्तमान में जनगणना का काम चल रहा है। शहर की आबादी करीब 2.67 लाख होने का अनुमान है। ऐसे में यदि प्रस्तावित गांवों को भी शामिल किया जाता है, तो निगम क्षेत्र की कुल आबादी तीन लाख से अधिक होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, अंतिम आंकड़े आधिकारिक जनगणना और स्वीकृत सीमा के आधार पर ही स्पष्ट होंगे।
अधिकारी का कहना है
तत्कालीन कलेक्टर के कार्यकाल में 16 ग्राम पंचायतों को शामिल करते हुए नगर निगम बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। शासन से नए दिशा-निर्देश मिलते ही परिसीमन और आरक्षण की समयबद्ध कार्रवाई पूरी की जाएगी।
सौरभ गौड़, डूडा अधिकारी, शिवपुरी

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