शिवपुरी। शिवपुरी जिले में ग्रामीणों को जमीन का मालिकाना हक दिलाने की स्वामित्व योजना अब समय के साथ दौड़ में पिछड़ती नजर आ रही है। सरकार ने 100 दिन में 2,52,505 हितग्राहियों की रजिस्ट्रियां पूरी करने का लक्ष्य रखा, लेकिन पटवारियों की करीब 20 से 22 दिन चली हड़ताल और तकनीकी अड़चनों ने अभियान की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया।
अब प्रशासन के पास लक्ष्य पूरा करने के लिए महज 60 दिन बचे हैं। ऐसे में हर दिन हजारों रजिस्ट्रियां पूरी करने की चुनौती खड़ी हो गई है। जिले के 518 पटवारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं और कलेक्टर खुद प्रतिदिन शाम 6 बजे प्रगति की समीक्षा करेंगे। लेकिन सवाल यह है कि जब अभियान की शुरुआत में एक दिन में केवल 122 रजिस्ट्रियां हो सकीं, तो क्या प्रशासन बचे हुए 60 दिनों में 2.52 लाख हितग्राहियों तक मालिकाना हक पहुंचा पाएगा?
अभियान की शुरुआती रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पटवारियों की हड़ताल खत्म होने के बाद काम शुरू हुआ तो शाम 6 बजे तक जिलेभर में केवल 122 रजिस्ट्रियां दर्ज हो सकीं। इतने बड़े लक्ष्य के मुकाबले यह संख्या प्रशासन की चिंता बढ़ाने वाली है। हालांकि, अधिकारियों को उम्मीद है कि तकनीकी समस्याएं दूर होने और पटवारियों की सक्रियता बढ़ने से काम में तेजी आएगी।
100 दिन का अभियान, 20-22 दिन हड़ताल में निकले
स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में चिह्नित भूखंडों के अभिलेख तैयार कर हितग्राहियों को उनकी संपत्ति का अधिकार सुनिश्चित करने की प्रक्रिया चल रही है। सरकार ने इसके लिए 100 दिन की समयसीमा निर्धारित की है। लेकिन जिले में पटवारियों की करीब 20 से 22 दिन चली हड़ताल के कारण काम प्रभावित हुआ। इसके चलते अब बचे हुए समय में लक्ष्य पूरा करने की चुनौती और बढ़ गई है।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि समयसीमा में हुई देरी की भरपाई के लिए काम की गति कई गुना बढ़ानी होगी। केवल प्रक्रिया शुरू कर देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि दस्तावेजों की जांच, रिकॉर्ड में सुधार, ई-केवाईसी और रजिस्ट्री की औपचारिकताएं भी तय समय में पूरी करनी होंगी।
2.52 लाख हितग्राही, हर दिन हजारों रजिस्ट्रियों का दबाव
जिले की पांच विधानसभा क्षेत्रों में कुल 1,55,895 भूखंड चिह्नित किए गए हैं, जबकि योजना के तहत 2,52,505 हितग्राहियों तक लाभ पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित है। अब प्रशासन को शेष समय में इस लक्ष्य को हासिल करना है।
दिए गए लक्ष्य और 60 दिन की समयसीमा के हिसाब से प्रतिदिन औसतन करीब 4,209 हितग्राहियों की रजिस्ट्री पूरी करनी होगी, बशर्ते अभी तक लक्ष्य में कोई उल्लेखनीय प्रगति न हुई हो। इसी वजह से अभियान के लिए रोजाना लगभग 4,000 से 4,500 रजिस्ट्रियों का लक्ष्य रखा जा रहा है। वास्तविक दैनिक आवश्यकता अब तक पूरी हो चुकी रजिस्ट्रियों की संख्या पर निर्भर करेगी।
आखिर क्यों अटक रही है रजिस्ट्री की रफ्तार?
पटवारी संघ के तहसील अध्यक्ष राहुल वर्मा के अनुसार, रजिस्ट्रियों की प्रक्रिया में देरी के पीछे मुख्य रूप से दो कारण सामने आ रहे हैं।
पहली बाधा: जमीन के रिकॉर्ड में सुधार।
कई भूखंडों के रिकॉर्ड में पति-पत्नी या अन्य सह-भूस्वामियों के नाम संयुक्त रूप से दर्ज हैं। ऐसी स्थिति में नियमों के अनुसार पहले रिकॉर्ड में संबंधित हिस्सेदारी का परिमार्जन करना पड़ता है। इसके बाद दोनों संबंधित हितग्राहियों की अलग-अलग ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी की जाती है। रिकॉर्ड सुधार और दस्तावेजों की औपचारिकताओं में अतिरिक्त समय लग रहा है।
दूसरी बाधा: सर्वर की समस्या।
मंगलवार को सर्वर डाउन रहने से काम प्रभावित हुआ। ऑनलाइन प्रक्रिया में तकनीकी समस्या आने के कारण पटवारियों को रजिस्ट्रियों और ई-केवाईसी संबंधी काम निपटाने में परेशानी हुई। अधिकारियों का दावा है कि सर्वर सामान्य होने के बाद प्रक्रिया में तेजी आएगी। हालांकि, तकनीकी बाधाएं दोबारा सामने नहीं आतीं, यह भी अभियान की सफलता के लिए जरूरी होगा।
518 पटवारियों को काम की रफ्तार बढ़ाने के निर्देश
लक्ष्य पूरा करने के लिए प्रशासन ने जिले के 518 पटवारियों को काम की गति चार से पांच गुना तक बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। जिन पटवारियों के जिम्मे लगभग 200 रजिस्ट्रियों का काम है, उन्हें अब प्रतिदिन 20 से 25 रजिस्ट्रियां पूरी करने का लक्ष्य दिया जा रहा है।
इस व्यवस्था के तहत प्रत्येक पटवारी को अपने लंबित प्रकरणों का तेजी से निराकरण करना होगा। जिन मामलों में रिकॉर्ड सुधार या ई-केवाईसी की जरूरत है, उन्हें प्राथमिकता से पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि तकनीकी और दस्तावेजी कारणों से प्रकरण लंबे समय तक लंबित न रहें।
कलेक्टर रोज शाम 6 बजे लेंगे हिसाब
अभियान की निगरानी के लिए प्रशासन ने दैनिक समीक्षा की व्यवस्था बनाई है। कलेक्टर प्रतिदिन शाम 6 बजे तक पूरी हुई रजिस्ट्रियों और ई-केवाईसी की स्थिति की समीक्षा करेंगे। इससे यह पता चल सकेगा कि किस क्षेत्र में कितना काम हुआ और कहां लक्ष्य के मुकाबले प्रगति धीमी है।
इस समीक्षा का उद्देश्य केवल आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि पिछड़ रहे क्षेत्रों की पहचान कर वहां काम में तेजी लाना भी है। हालांकि, अभियान की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि रोजाना कितने प्रकरणों का निराकरण हो रहा है और लंबित मामलों की संख्या कितनी तेजी से घट रही है।

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