शिवपुरी,नरवर मे प्रसुता जमीन पर,वीडियो वायरल,स्वास्थय विभाग को टाइल्स नापनी पडी,पढिए मामला

Lalit Mudgal
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शिवपुरी। नरवर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के बाद प्रसूताओं को नवजात के साथ जमीन पर लिटाने का एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से बहुप्रसारित हो रहा है। वीडियो में दो महिलाओं को जमीन पर चादर पर लेटे हुए दिखाया गया है, जिस पर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए जा रहे थे। लेकिन अब इस मामले में नया मोड़ आ गया है। प्रमुख खंड चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नरवर डा एलडी शर्मा ने इस वीडियो को पूरी तरह भ्रामक और असत्य बताया है।

खंडन में क्या कहा बीएमओ ने?
बीएमओ नरवर ने 13 सितंबर 2026 को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी शिवपुरी को पत्र क्रमांक 3043 के माध्यम से खंडन भेजा है। पत्र में दो बड़े तर्क दिए गए हैं। पत्र में लिखा है कि सीएचसी नरवर पर सर्जन उपलब्ध न होने के कारण आपरेशन से डिलीवरी होती ही नहीं है, जबकि वायरल वीडियो में आपरेशन के बाद पलंग न देने का आरोप लगाया जा रहा है। बीएमओ का कहना है कि सीएचसी नरवर सहित पीएचसी मगरौनी और एचडब्ल्यूसी करही से वीडियो मंगवाकर मिलान किया गया। सीएचसी नरवर और पीएचसी मगरौनी के वार्ड में सफेद 6 बाई 6 इंच की टाइलें लगी हैं, जबकि एचडब्ल्यूसी करही में वाल टाइल की हाइट 6 फीट है। 

वायरल वीडियो में दिख रही वाल टाइल की हाइट और साइज इन तीनों में से किसी से भी मेल नहीं खाती, इसलिए वीडियो सीएचसी नरवर का नहीं हो सकता। बीएमओ ने पत्र में यह भी कहा कि नरवर, मगरौनी और करही तीनों डिलीवरी प्वाइंट पर पर्याप्त संख्या में पलंग उपलब्ध हैं और सभी गर्भवती एवं प्रसूता महिलाओं को पलंग दिया जाता है।

क्या कहते हैं सरकारी नियम?
-जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत सीएचसी व पीएचसी स्टाफ को 48 घंटे प्रसूताओं को स्वास्थ्य केंद्र में रखने के निर्देश दिए गए हैं। इस दौरान प्रसूता को बेड, खाना, दवा और देखभाल मुफ्त देना अनिवार्य है। यदि इसके पहले छुट्टी दी जा रही है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जमीन पर लिटाना तो 48 घंटे रखने की मूल भावना के ही खिलाफ है।  

आइपीएचएस गाइडलाइन के अनुसार प्रसवोत्तर वार्ड में प्रत्येक जच्चा-बच्चा के लिए अलग, साफ-सुथरा बेड, सैनिटाइज्ड बिस्तर और संक्रमण से बचाव की व्यवस्था होनी चाहिए। प्रसव के बाद महिला और नवजात दोनों की इम्युनिटी कमजोर होती है। जमीन पर लिटाने से उन्हें सेप्सिस और अन्य गंभीर संक्रमण का सीधा खतरा है।

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