शिवपुरी के न्यू दर्पण कॉलोनी मे रहने वाले एक युवक पर महिला ने झूठे आरोप लगाकर उसकी छवि खराब करने का प्रयास किया है। युवक का कहना है कि उसकी पुलिस मे झूठी शिकायते की गई है। एक महिला उस पर दबाब बना रही है युवक ने बताया कि उक्त महिला से उसका किसी भी प्रकार का लेनदेन नही है। परेशान युवक ने शिवपुरी पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
क्या है पूरा मामला
न्यू दर्पण कॉलोनी निवासी कमल सिंह (पुत्र रामजीलाल) ने गुरुवार, 10 सितंबर को एसपी कार्यालय में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई है। कमल सिंह का कहना है कि कुसुम ओझा नाम की एक महिला उनके खिलाफ लगातार मनगढ़ंत और तथ्यहीन आरोप लगा रही है। महिला का दावा है कि उसने कमल सिंह से ₹10,000/- उधार लिए थे और इसके एवज में अपने सोने-चांदी के आभूषण उनके पास गिरवी रखे थे।
कमल सिंह ने एसपी को दिए आवेदन में स्पष्ट किया है कि यह आरोप पूरी तरह से निराधार और असत्य है। उनका कहना है, मैंने उक्त महिला को न तो कोई कर्ज दिया है और न ही उसका कोई जेवर मेरे पास गिरवी रखा है। हमारे बीच कभी कोई लेन-देन हुआ ही नहीं है।
सामाजिक प्रतिष्ठा खराब करने की साजिश
पीड़ित युवक ने आशंका जताई है कि महिला किसी व्यक्तिगत रंजिश, दुर्भावना या किसी अन्य गलत इरादे से उस पर यह झूठा दबाव बना रही है। कमल सिंह ने अपने आवेदन में लिखा है कि वह एक कानून का पालन करने वाला नागरिक है। यदि महिला के इन झूठे आरोपों के आधार पर बिना जांच किए पुलिस कोई भी कार्रवाई करती है, तो इससे समाज में उसकी प्रतिष्ठा, मान-सम्मान और पारिवारिक जीवन पर गहरा आघात पहुंचेगा।
अगर आरोप सच्चे हैं, तो सबूत पेश करे महिला
कमल सिंह ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि महिला द्वारा लगाए जा रहे आरोपों की सत्यता जांची जाए। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा है कि यदि महिला के पास इस कथित लेन-देन से जुड़ा कोई भी वैध दस्तावेज, लिखित अनुबंध, रसीद या कोई गवाह है, तो उसे पुलिस के सामने पेश करना चाहिए। युवक ने दावा किया है कि चूंकि ऐसा कोई लेन-देन कभी हुआ ही नहीं, इसलिए महिला के पास कोई सबूत नहीं हो सकता।
झूठी शिकायत पर हो कार्रवाई
आवेदन के अंत में कमल सिंह ने एसपी से विनम्र प्रार्थना की है कि इस पूरे मामले की गहराई और निष्पक्षता से जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की है कि यदि जांच में महिला के आरोप झूठे पाए जाते हैं और यह सिद्ध होता है कि उसने जानबूझकर एक निर्दोष को फंसाने की कोशिश की है, तो उसके खिलाफ भी भारतीय कानून के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
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