शिवपुरी। गणेश चतुर्थी के पर्व में अब कुछ ही दिन शेष हैं और शहर में चारों तरफ गणपति बप्पा के स्वागत की तैयारियां जोर पकड़ने लगी हैं। 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा। इसके साथ ही शहर और आसपास के इलाकों में गणेश प्रतिमाओं की स्थापना की तैयारियां भी तेज हो गई हैं। जहां एक ओर गणेश उत्सव समितियां पंडाल सजाने और आयोजन की तैयारियों में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर मूर्तिकार दिन-रात मेहनत कर भगवान गणेश की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं।
शिवपुरी के फिजिकल क्षेत्र में इन दिनों गणेश प्रतिमाओं को आकार देते मूर्तिकारों के यहां रौनक दिखाई दे रही है। अकेले फिजिकल क्षेत्र में ही 25 से अधिक मूर्तिकार छोटी-बड़ी करीब 5 हजार से अधिक गणेश प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं। इनमें 200 से अधिक बड़ी प्रतिमाएं शामिल हैं। कई प्रतिमाओं पर रंग-रोगन और सजावट का काम चल रहा है, जबकि कुछ प्रतिमाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
दो महीने से चल रही तैयारी, अब दिन-रात काम
मूर्तिकारों के मुताबिक गणेश प्रतिमाएं तैयार करने का काम करीब दो माह पहले शुरू कर दिया गया था, लेकिन पिछले 15 दिनों से काम में अचानक तेजी आई है। गणेश चतुर्थी जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे मूर्तिकारों पर समय से प्रतिमाएं तैयार करने का दबाव बढ़ता जा रहा है। फिजिकल रोड स्थित श्रीविहार कॉलोनी निवासी मूर्तिकार अमनलाल शाक्य ने बताया कि इस बार 5 फीट से लेकर 15 फीट तक की करीब 200 बड़ी गणेश प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं।
इनमें करीब 30 प्रतिमाएं 15 फीट ऊंचाई की हैं। इसके अलावा छोटी प्रतिमाओं की संख्या भी हजारों में है। मूर्तिकारों का कहना है कि इस बार काम तो अच्छा है, लेकिन लगातार बढ़ती महंगाई ने लागत बढ़ा दी है। प्रतिमा बनाने में इस्तेमाल होने वाले बांस, मिट्टी, रंग और अन्य सामग्री के दाम पहले की तुलना में बढ़ गए हैं। इसका सीधा असर प्रतिमाओं की कीमत पर पड़ा है।
70 हजार तक की गणेश प्रतिमा, छोटी मूर्तियां 50 रुपए से शुरू
इस बार गणेश प्रतिमाओं की कीमत उनके आकार और डिजाइन के हिसाब से तय की जा रही है। अमनलाल शाक्य के मुताबिक 5 फीट की गणेश प्रतिमा करीब 8 से 10 हजार रुपए में उपलब्ध है, जबकि छोटी प्रतिमाएं 50 रुपए से लेकर 500 रुपए तक की कीमत में मिल रही हैं।
वहीं बड़ी और आकर्षक प्रतिमाओं की कीमत हजारों रुपए तक पहुंच रही है। शहर के कमलागंज क्षेत्र के लिए तैयार की जा रही सबसे बड़ी प्रतिमाओं में से एक की कीमत करीब 70 हजार रुपए बताई जा रही है। 15 फीट ऊंची इन प्रतिमाओं को तैयार करने में मूर्तिकारों को कई दिनों तक लगातार मेहनत करनी पड़ती है।
बारिश ने बढ़ाई परेशानी, प्रतिमाएं सुखाना बना चुनौती
गणेश प्रतिमाएं तैयार करने के काम में इस समय बारिश सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। लगातार बारिश और वातावरण में नमी के कारण मिट्टी से बनी प्रतिमाओं को सुखाने में मूर्तिकारों को काफी परेशानी हो रही है। मूर्तिकारों का कहना है कि जिन प्रतिमाओं को पहले ही तैयार कर लिया गया था, उन्हें तो किसी तरह सुरक्षित रखा जा रहा है, लेकिन अभी जिन प्रतिमाओं का निर्माण चल रहा है, उनके लिए पर्याप्त समय में सूखना मुश्किल हो रहा है। प्रतिमाओं को बारिश से बचाने के लिए मूर्तिकारों को अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ रहे हैं। बारिश के कारण काम की रफ्तार भी प्रभावित हो रही है। प्रतिमा तैयार होने के बाद उसके पूरी तरह सूखने में समय लगता है और उसके बाद ही रंग-रोगन तथा अंतिम सजावट का काम किया जा सकता है।
पीओपी की प्रतिमाओं की बाजार में मौजूदगी पर सवाल
एक तरफ स्थानीय मूर्तिकार मिट्टी से गणेश प्रतिमाएं तैयार करने में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ बाजार में प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी प्रतिमाओं की मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। मूर्तिकारों का कहना है कि प्रशासन द्वारा पीओपी से बनी प्रतिमाओं के निर्माण पर लंबे समय से प्रतिबंध की बात कही जाती रही है, लेकिन इसके बावजूद बाजार में बड़ी संख्या में पीओपी की प्रतिमाएं पहुंच रही हैं।
उनका दावा है कि शहर में टीवी टावर के नीचे भी पीओपी की प्रतिमाएं बनाए जाने का काम चल रहा है। इसके अलावा गुना, ग्वालियर और आगरा जैसे शहरों से भी पीओपी की प्रतिमाएं शिवपुरी पहुंच रही हैं। स्थानीय मूर्तिकारों का कहना है कि इससे मिट्टी की प्रतिमाएं तैयार करने वाले कारीगरों के सामने प्रतिस्पर्धा बढ़ती है।
एक तरफ आस्था, दूसरी तरफ कारीगरों की मेहनत
गणेश चतुर्थी से पहले शिवपुरी में तैयार हो रही हजारों प्रतिमाएं केवल मिट्टी, रंग और आकार का रूप नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे मूर्तिकारों की कई सप्ताह की मेहनत जुड़ी हुई है। सुबह से देर रात तक कारीगर भगवान गणेश की प्रतिमाओं को अलग-अलग रूप और आकार देने में जुटे हैं।
अब मूर्तिकारों की नजर मौसम पर टिकी है। उन्हें उम्मीद है कि गणेश चतुर्थी तक मौसम साथ देगा और तैयार की जा रही प्रतिमाएं समय पर सूखकर रंग-रोगन के बाद श्रद्धालुओं और गणेश उत्सव समितियों तक पहुंच सकेंगी। शहर में गणपति बप्पा के स्वागत की तैयारियां जैसे-जैसे अंतिम चरण में पहुंच रही हैं, वैसे-वैसे मूर्तिकारों के हाथों से निकल रही प्रतिमाएं भी श्रद्धालुओं के घरों और पंडालों तक पहुंचने लगी हैं।
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