शिवपुरी। देशभर में शनिवार को स्वतंत्रता दिवस का उत्साह था। शहरों में तिरंगे लहराए, स्कूलों में देशभक्ति के कार्यक्रम हुए और विकास की तस्वीर पेश की गई। लेकिन शिवपुरी जिले के ग्रामीण इलाकों से सामने आए कुछ वीडियो ने इस जश्न के बीच गांवों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए।
नरवर तहसील के देहरेटा सानी गांव में बच्चे हाथों में तिरंगा लेकर जिस रास्ते से स्कूल पहुंचे, वह बारिश के बाद कीचड़ से इस कदर सराबोर था कि पैदल चलना भी मुश्किल नजर आया। वहीं शिवपुरी तहसील के ठर्रा गांव में शासकीय स्कूल परिसर और स्कूल तक पहुंचने वाले रास्ते में जलभराव ने बच्चों की मुश्किलें बढ़ा दीं। दोनों गांवों से सामने आए वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं।
तिरंगा हाथ में था,लेकिन राह कीचड़ से भरी थी
नरवर जनपद पंचायत क्षेत्र के भैंसा अंतर्गत देहरेटा सानी गांव में ग्रामीणों द्वारा जारी किए गए वीडियो में बच्चे कीचड़ से भरे रास्ते पर चलते हुए नजर आ रहे हैं। बच्चों के हाथों में स्वतंत्रता दिवस का तिरंगा है, लेकिन उनके पैरों के नीचे सड़क के बजाय कीचड़ है।
बारिश के बाद गांव की स्थिति ऐसी हो जाती है कि स्कूल जाने वाले बच्चों को इसी रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में समस्या और गंभीर हो जाती है। कई जगह रास्ते पर पानी और कीचड़ जमा हो जाता है, जिससे बच्चों के कपड़े खराब होने के साथ उनके फिसलने और चोटिल होने का खतरा भी बना रहता है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की सड़क की समस्या नई नहीं है। सरपंच, सचिव और स्थानीय प्रशासन के सामने कई बार समस्या रखी जा चुकी है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ।
15 अगस्त के दिन भी नहीं मिली आसान राह
स्वतंत्रता दिवस पर बच्चों को स्कूल पहुंचना था। कार्यक्रम में शामिल होने और तिरंगा फहराने की तैयारियों के बीच उम्मीद थी कि कम से कम स्कूल तक पहुंचने का रास्ता सुविधाजनक होगा, लेकिन तस्वीर इसके उलट दिखाई दी। तिरंगा लेकर कीचड़ में चलते बच्चों का वीडियो अब ग्रामीण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब बच्चों को रोज इसी रास्ते से स्कूल जाना है तो स्कूल तक सुरक्षित और सुगम रास्ता उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए।
ठर्रा में स्कूल परिसर ही बना जलभराव का मैदान
इधर शिवपुरी तहसील के ठर्रा गांव से भी स्कूल व्यवस्था की ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश के दौरान शिक्षा व्यवस्था की मुश्किलें उजागर कर दीं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में शासकीय स्कूल परिसर और स्कूल तक पहुंचने वाले रास्ते में पानी भरा नजर आ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बच्चों को स्कूल पहुंचना था, लेकिन जलभराव के कारण उन्हें बदहाल और कच्चे रास्ते का सहारा लेना पड़ा। ग्रामीणों ने स्कूल परिसर की स्थिति के साथ-साथ शौचालयों की खराब व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
स्कूल के आसपास कथित शराब बिक्री का भी आरोप
ठर्रा गांव के ग्रामीणों ने स्कूल के पास स्थित एक दुकान पर कथित तौर पर अवैध शराब बिक्री होने का आरोप भी लगाया है। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की जांच कराने की मांग की है।
पंचायत से प्रशासन तक शिकायत, फिर भी समस्या जस की तस
दोनों गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि सड़क, जल निकासी और स्कूल की मूलभूत सुविधाओं को लेकर संबंधित जिम्मेदारों से शिकायत की जा चुकी है। इसके बावजूद बारिश आते ही वही पुरानी समस्या सामने खड़ी हो जाती है।
ग्रामीणों की मांग है कि सिर्फ अस्थायी तौर पर रास्ता ठीक करने के बजाय स्थायी सड़क, उचित जल निकासी और स्कूल परिसर में जलभराव रोकने की व्यवस्था की जाए।
विकास के दावों के बीच बड़ा सवाल
स्वतंत्रता दिवस पर सामने आई इन तस्वीरों ने विकास के दावों के बीच एक सीधा सवाल खड़ा कर दिया है—जब गांव के बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए बारिश में कीचड़ और जलभराव से जूझना पड़े, तो विकास की असली तस्वीर आखिर कहां दिखाई देगी?

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