शिवपुरी। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत करीब चार लाख शिक्षकों और कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए लागू की गई ई-अटेंडेंस व्यवस्था अब केवल तकनीकी व्यवस्था नहीं रह गई है, बल्कि इसे लेकर शिक्षक संगठनों और अधिकारियों के बीच खींचतान भी सामने आने लगी है। पोर्टल की तकनीकी दिक्कतों, लॉगिन-लॉगआउट की समय सीमा और अलग-अलग जिलों में जारी किए जा रहे निर्देशों को लेकर शिक्षकों की शिकायतों के बीच मध्यप्रदेश शिक्षक संघ ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।
पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने शिवपुरी पहुंचे मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ. छत्रवीर सिंह राठौर ने सोमवार देर शाम अनौपचारिक चर्चा के दौरान ई-अटेंडेंस और टीईटी परीक्षा को लेकर संगठन की रणनीति और शिक्षकों की समस्याओं पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि शिक्षक ई-अटेंडेंस को लेकर मानसिक तनाव में न रहें। संगठन लगातार सरकार और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के संपर्क में है तथा तकनीकी एवं व्यवहारिक परेशानियों को दूर कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
कमिश्नर के निर्देशों के बावजूद अलग-अलग आदेश क्यों?
राठौर ने कहा कि ई-अटेंडेंस पोर्टल में लॉगिन और लॉगआउट की समय सीमा निर्धारित है, लेकिन इसके बावजूद कुछ जिलों और संभाग स्तर पर शिक्षकों को सुबह 10 या 10.15 बजे तक अनिवार्य रूप से लॉगिन करने के आदेश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की जानकारी शिक्षक संघ के संज्ञान में आई है। यदि आयुक्त लोक शिक्षण द्वारा निर्धारित व्यवस्था के बावजूद स्थानीय स्तर पर अलग से समय निर्धारित कर शिक्षकों को बाध्य किया जा रहा है तो यह गंभीर विषय है।
राठौर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कमिश्नर लोक शिक्षण के निर्देशों की अवहेलना कर मनमाने आदेश जारी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग शिक्षक संघ करेगा। उनका कहना था कि एक समान व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू होनी चाहिए और स्थानीय स्तर पर अलग-अलग नियम बनाकर शिक्षकों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
बाढ़ या प्राकृतिक आपदा में जान जोखिम में न डालें शिक्षक
ई-अटेंडेंस को लेकर सबसे महत्वपूर्ण संदेश देते हुए राठौर ने शिक्षकों से कहा कि किसी भी गंभीर प्राकृतिक आपदा, बाढ़ या ऐसी परिस्थिति में अपनी जान जोखिम में डालकर केवल ई-अटेंडेंस लगाने के लिए स्कूल पहुंचने की कोशिश न करें। उन्होंने कहा कि शिक्षक की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। यदि कोई शिक्षक वास्तविक रूप से स्कूल में मौजूद है, लेकिन तकनीकी कारणों से उसका लॉगिन या लॉगआउट दर्ज नहीं हो पाता है तो ऐसी स्थिति में अकारण वेतन काटे जाने की बात अधिकारियों और शिक्षा मंत्री की ओर से नहीं कही गई है। राठौर ने शिक्षकों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि तकनीकी खामी के कारण किसी शिक्षक का अकारण वेतन नहीं काटा जाएगा। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे तकनीकी समस्या को लेकर अनावश्यक मानसिक दबाव में न आएं और किसी भी परिस्थिति में अपनी सुरक्षा से समझौता न करें।
छुट्टी और ऑन ड्यूटी जैसे विकल्प भी जल्द मिलेंगे
राठौर ने बताया कि ई-अटेंडेंस सिस्टम को अधिक व्यवहारिक बनाने के लिए कई विकल्पों पर तकनीकी स्तर पर काम चल रहा है। इनमें अर्जित अवकाश, महिलाओं के विशेष अवकाश, किसी अन्य स्कूल में आकस्मिक व्यवस्था के तहत ड्यूटी, हाफ टाइम ऑन ड्यूटी सहित अन्य व्यवस्थाओं को पोर्टल पर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शामिल है। उन्होंने कहा कि इन विकल्पों के उपलब्ध होने के बाद शिक्षकों को अलग-अलग परिस्थितियों में अटेंडेंस दर्ज करने को लेकर होने वाली परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि तमाम प्रयासों के बावजूद ई-अटेंडेंस व्यवस्था में खामियां बनी रहती हैं तो शिक्षक संघ इस व्यवस्था का स्थायी और व्यवहारिक समाधान कराने के लिए आगे भी संघर्ष करेगा।
टीईटी परीक्षा को लेकर भी शिक्षकों को दिलाया भरोसा
ई-अटेंडेंस के साथ ही सोमवार को घोषित टीईटी परीक्षा कार्यक्रम को लेकर भी शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष ने शिक्षकों की चिंता दूर करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद टीईटी परीक्षा आयोजित की जानी है, लेकिन सरकार ने 2005 के बाद व्यापम परीक्षा के माध्यम से नौकरी में आए शिक्षकों को टीईटी से राहत देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में विशेष याचिका दायर की है।
ऐसे में इन शिक्षकों को राहत मिलने की संभावना है। वहीं अन्य शिक्षकों को भी परीक्षा को लेकर घबराने की आवश्यकता नहीं है। राठौर के अनुसार शिक्षकों को 2028 तक परीक्षा के पर्याप्त अवसर मिलेंगे और परीक्षा का पाठ्यक्रम भी ऐसा ही रहेगा, जो शिक्षक अपने स्कूलों में विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं।
ऑनलाइन परीक्षा पर बोले- शिक्षक को डिजिटल रूप से भी अपडेट होना होगा
टीईटी परीक्षा को ऑनलाइन कराने की संभावनाओं और कई शिक्षकों के कंप्यूटर में दक्ष नहीं होने के सवाल पर राठौर ने कहा कि वर्तमान समय डिजिटल क्रांति का है। ऐसे में शिक्षकों को भी तकनीकी रूप से खुद को अपडेट करना होगा।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जो शिक्षक कंप्यूटर के मामले में सहज नहीं हैं, उनके हित में संगठन अपनी बात सरकार के सामने रखेगा। शिक्षक संघ की मांग होगी कि ऐसे शिक्षकों के लिए ऑफलाइन परीक्षा का विकल्प भी उपलब्ध कराया जाए, ताकि केवल तकनीकी दक्षता परीक्षा में बाधा न बने।
शिवपुरी में पदाधिकारियों ने की मुलाकात
शिवपुरी के अल्प प्रवास के दौरान डॉ. छत्रवीर सिंह राठौर से मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के पदाधिकारियों सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुलाकात की। इस दौरान ई-अटेंडेंस, टीईटी परीक्षा और शिक्षकों से जुड़े अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई।
इस अवसर पर राजेन्द्र पिपलौदा, डॉ. कौशल गौतम, स्नेह रघुवंशी, नीरज सरैया, पवन अवस्थी, तारिक सिद्धकी, विपिन पचौरी, राजकुमार सरैया, अनिल गुप्ता, अरविंद सरैया, रामेश्वर गुप्ता, रामकृष्ण रघुवंशी, अवधेश सिंह तोमर और भरत धाकड़ सहित अन्य पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि मौजूद रहे।
शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष के इस बयान के बाद ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर स्थानीय स्तर पर जारी किए जा रहे अलग-अलग आदेशों और शिक्षकों की तकनीकी परेशानियों पर आने वाले दिनों में विभागीय स्तर पर कार्रवाई और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी होने की उम्मीद बढ़ गई है।
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