शिवपुरी। शिवपुरी मेडिकल कॉलेज से आज एक लापरवाही भरी खबर मिल रही हैं। अस्पताल के जूनियर डाक्टरो पर ड्यूटी टाइम मे पवजी खेले रहे थे और इधर सास लेने की तकलीफ में भर्ती हुए मरीज की सांसे थम गई। इस घटनाक्रम का वीडियो मृतक के बेटे ने सोशल पर एक वीडियो भी वायरल किया हैं उस वीडियो मे स्पष्ट बोल रहा है कि डॉक्टर पबजी खेलने मे व्यस्त थे और इनकी लापरवाही के कारण मेरे पिता की मौत हो गई।
बेटे ने बताया कि मेरे पापा की हालत काफी सीरियस थी,डॉक्टर लापरवाही के कारण लगातार हालत बिगड रही थी,इस कारण उनको ग्वालियर रैफर कर दिया गया था। एम्बुलेंस के ड्राइवर से कहा कि इसकी स्पीड थोड़ी बड़ा दो,लेकिन एम्बुुलेंस वाला बोला कि 60 से ज्यादा स्पीडी नहीं कर सकता,मैंने बार—बार ड्राइवर के हाथ—पैर जोड़े,कि मेरे पापा की हालत काफी बिगड़ती जा रही हैं लेकिन एम्बुलेंस वाले ने एक भी नहीं सुनी,जिसके चलते ग्वायिर से 50 किलोमीटर पहले मेरे पिता जी की मौत हो गई।
गले में सूजन और सांस लेने में थी तकलीफ
अरूण प्रजापति निवासी खनियाधाना के ग्राम आहारबानपुरा ने शिवपुरी समाचार डॉट कॉम से बातचीत करते हुए कहा कि उनके पिता हरिराम प्रजापति उम्र 50 वर्ष बीती रात लगभग 11 बजे शरीर में सुन्नपन महसूस हुआ। उनके गले में सूजन आ रही थी और दर्द के साथ सांस लेने में भारी तकलीफ हो रही थी। हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें सबसे पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खनियाधाना ले गए। लेकिन वहां हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें शिवपुरी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
अस्पताल में नहीं मिला बेड, पबजी खेलती मिली स्टाफ नर्स
रात करीब 2 से 3 बजे के बीच जब मरीज को शिवपुरी मेडिकल कॉलेज लाया गया, तो वहां उन्हें बेड तक नसीब नहीं हुआ। अरुण का आरोप है कि वार्ड में ड्यूटी पर मौजूद प्रियंका ठाकुर नाम की स्टाफ नर्स अपने मोबाइल पर पबजी गेम खेलने में व्यस्त थी। बेटे ने कई बार गुहार लगाई कि पापा को देख लीजिए, लेकिन करीब आधे घंटे तक उन्हें पूरी तरह अनदेखा किया गया।
ऑक्सीजन की गुहार लगाता रहा बेटा, डॉक्टर ने नहीं सुनी
बाद में नर्स ने फोन करके जूनियर डॉक्टर राज यादव को बुलाया। डॉक्टर ने मरीज को देखकर लापरवाही से कह दिया कि कोई परेशानी वाली बात नहीं है, सब ठीक हो जाएगा। अरुण ने डॉक्टर से मिन्नतें कीं कि उनके पिता को सांस लेने में भारी दिक्कत हो रही है और उन्हें ऑक्सीजन की सख्त जरूरत है, लेकिन डॉक्टर ने उनकी एक न सुनी।
एंबुलेंस की लेटलतीफी और 60 की स्पीड का नियम बना काल
मरीज की हालत जब बहुत ज्यादा बिगड़ने लगी, तब सुबह लगभग 6 बजे डॉक्टरों ने उन्हें ग्वालियर रेफर कर दिया। इसके बाद एंबुलेंस तलाशने में काफी समय बर्बाद हुआ और जब एंबुलेंस आई भी तो वह काफी लेट थी।
अरुण ने बताया कि उनके पिता की हालत बेहद नाजुक थी। उन्होंने एंबुलेंस ड्राइवर के हाथ-पैर जोड़े और मिन्नतें कीं कि गाड़ी की स्पीड थोड़ी बढ़ा दें ताकि उनके पिता की जान बच सके। लेकिन ड्राइवर ने यह कहकर स्पीड बढ़ाने से साफ मना कर दिया कि वह 60 किमी/घंटा से ज्यादा तेज गाड़ी नहीं चला सकता।
रास्ते में तोड़ा दम, परिजनों में भारी रोष
इलाज में देरी और एंबुलेंस की धीमी रफ्तार के चलते ग्वालियर पहुंचने से 50 किलोमीटर पहले ही हरिराम प्रजापति ने एंबुलेंस में तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।
इस पूरी घटना ने शिवपुरी मेडिकल कॉलेज की कार्यप्रणाली और इमरजेंसी स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ड्यूटी के दौरान मोबाइल गेम खेलना, ऑक्सीजन न देना और बेड के अभाव में रेफर कर देना—यह सब एक ऐसे सिस्टम की पोल खोलता है जहां मरीज की जान की कोई कीमत नहीं है। पीड़ित परिवार ने दोषी स्टाफ, डॉक्टरों और लापरवाह कर्मियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

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