शिवपुरी। जुलाई के 20 दिन निकल चुके है,लेकिन आसमान मे लदे बादल खुलकर नही बरस रहे है,शिवपुरी शहर मे बादलो की बरसने की स्पीड की बात करे तो सडके को भी नही भिगो पर रहे है। इस नखरे भरी बारिश् के कारण जिले के सभी तालाब अभी भी प्यासे है। पिछले वर्ष 20 जुलाई तक जिले के सभी डेम और तालाब आवरफ्लो हो चुके थे।
जिले का सबसे बड़ा अटल सागर मड़ीखेड़ा बांध इस सीजन में लगभग खाली पड़ा है, जबकि 110 तालाब अब भी अच्छी बारिश की आस लगाए बैठे हैं। कमजोर मानसून और अलनीनो के असर ने किसानों के साथ-साथ जल संसाधनों पर भी संकट के बादल खड़े कर दिए हैं।
बारिश का मौसम, लेकिन बारिश गायब
सोमवार को सुबह से तेज उमस और गर्मी ने लोगों को बेहाल रखा। दोपहर बाद हल्की रिमझिम और बूंदाबांदी जरूर हुई, लेकिन इससे न तो गर्मी से राहत मिली और न ही जलसंकट कम हुआ। रात में हल्की बारिश के बाद बिजली कंपनी ने शहर के पॉश इलाके कस्टम गेट क्षेत्र की बिजली बंद कर दी, जो करीब दो घंटे बाद बहाल हो सकी। इससे लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली।
जुलाई खत्म होने को, फिर भी बारिश बेहद कम
एक जून से अब तक शिवपुरी जिले में औसतन केवल 176.08 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक 735.12 मिमी वर्षा हो चुकी थी। जिले की वार्षिक औसत वर्षा 816.3 मिमी है, लेकिन अभी तक केवल करीब 30 प्रतिशत बारिश ही हो सकी है।
कम बारिश का सीधा असर खरीफ की फसलों पर दिखाई देने लगा है। खेतों में बोई गई सोयाबीन, मक्का और उड़द की फसलें पर्याप्त नमी नहीं मिलने से प्रभावित हो रही हैं। किसान अब हर दिन आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं।
अलनीनो का असर: मड़ीखेड़ा डेम की तस्वीर बदल गई
इस बार अलनीनो का प्रभाव शिवपुरी जिले में साफ नजर आ रहा है। मानसून देर से सक्रिय हुआ और उसके बाद भी अपेक्षित बारिश नहीं हुई। इसका सबसे बड़ा असर जिले के सबसे महत्वपूर्ण जल स्रोत अटल सागर मड़ीखेड़ा बांध पर दिखाई दे रहा है। 20 जुलाई की स्थिति के अनुसार मड़ीखेड़ा बांध का जलस्तर 329.55 मीटर है और इसमें केवल 57 प्रतिशत पानी मौजूद है। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मानसून सीजन में बांध में महज 20 सेंटीमीटर (करीब 8 इंच) पानी ही बढ़ा है।
पिछले वर्ष इसी तारीख पर बांध का जलस्तर 340.75 मीटर था और चार गेट खोलकर पानी छोड़ा जा चुका था। यानी इस बार बांध का जलस्तर पिछले साल की तुलना में करीब 11 मीटर नीचे है। बांध की अधिकतम भराव क्षमता 346.25 मीटर है, लेकिन फिलहाल वहां तक पहुंचना दूर की बात नजर आ रही है। वन एवं जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार सिंध नदी में बहाव बेहद कम है, जबकि अमोला पुल का कैचमेंट एरिया भी लगभग खाली पड़ा हुआ है। यही वजह है कि मड़ीखेड़ा डेम में पानी की आवक नहीं हो पा रही।
110 तालाब भी बारिश की राह देख रहे
कमजोर मानसून का असर केवल मड़ीखेड़ा पर ही नहीं, बल्कि जिले के तालाबों और छोटे जलाशयों पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
महुअर परियोजना के नावली बांध में केवल 21.54 प्रतिशत पानी है।
अकाझिरी तालाब में 20.67 प्रतिशत जलभराव है।
पारोंच तालाब में केवल 12.74 प्रतिशत पानी बचा है।
बुधना तालाब में 23.34 प्रतिशत जलभराव दर्ज किया गया है।
इसके अलावा जिले के 110 तालाब अभी भी लगभग खाली पड़े हैं, जिससे आने वाले दिनों में पेयजल और सिंचाई दोनों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
किसानों की बढ़ी चिंता
लगातार कमजोर बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई किसानों ने समय पर खरीफ की बुवाई तो कर दी, लेकिन अब फसलों को बढ़ने के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। यदि जल्द ही जोरदार बारिश नहीं हुई तो उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है। कृषि विशेषज्ञ भी मानते हैं कि अगले कुछ दिनों में अच्छी वर्षा नहीं होने पर खरीफ सीजन प्रभावित हो सकता है।
अभी भी अच्छी बारिश की उम्मीद
जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री मोहित जैन का कहना है कि इस वर्ष अब तक बारिश सामान्य से काफी कम रही है, इसलिए बांध और तालाब नहीं भर पाए हैं। हालांकि मानसून का दौर अभी जारी है और आने वाले दिनों में अच्छी बारिश की उम्मीद बनी हुई है। यदि अगले कुछ सप्ताह में जोरदार वर्षा होती है तो जलाशयों की स्थिति में तेजी से सुधार आ सकता है। फिलहाल शिवपुरी में हर किसी की निगाहें आसमान पर टिकी हैं। किसान खेतों के लिए पानी मांग रहे हैं, शहर जलाशयों के भरने की दुआ कर रहा है और मड़ीखेड़ा डेम सहित जिले के तालाब मानो बादलों से अपनी प्यास बुझाने का इंतजार कर रहे हैं।

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