शिवपुरी। शिवपुरी जिले की नगरीय राजनीति में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार सरकार ने नगर पालिका शिवपुरी सहित जिले की सभी 10 नगर परिषदों में एल्डरमैन (मनोनीत पार्षद) नियुक्त कर दिए हैं। हालांकि इन नियुक्तियों का समय कई सवाल खड़े कर रहा है, क्योंकि अधिकांश निकायों का कार्यकाल अब अपने अंतिम चरण में है और नगर पालिका शिवपुरी की परिषद का केवल एक वर्ष का कार्यकाल शेष है। ऐसे में लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि जब पूरे कार्यकाल में नियुक्तियां नहीं हुईं, तो अब अंतिम वर्ष में एल्डरमैन नियुक्त करने से विकास को कितना लाभ मिलेगा।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उप सचिव द्वारा जारी आदेश में शिवपुरी नगर पालिका के लिए छह एल्डरमैन नियुक्त किए गए हैं। इनमें पूर्व पार्षद हरिओम नरवरिया (वार्ड-28), भाजपा नेता प्रभात मिश्रा (वार्ड-5), पूर्व पार्षद छत्रपाल गुर्जर (वार्ड-19), विवेक अग्रवाल (वार्ड-2), पूर्व पार्षद लालजीत आदिवासी (वार्ड-16) तथा मुकेश गोयल (वार्ड-37) शामिल हैं।
एक साल तक इंतजार, अब नियुक्ति पर उठे सवाल
शहर में चर्चा है कि सरकार ने पूरे एक साल तक अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं को एल्डरमैन नियुक्त करने में देरी की। अब जबकि परिषद का कार्यकाल समाप्ति की ओर है, तब यह फैसला लिया गया है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि नए मनोनीत पार्षद शहर के विकास में कितना प्रभावी योगदान दे पाएंगे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह नियुक्तियां परिषद के शुरुआती वर्षों में होतीं तो योजनाओं की निगरानी, विकास कार्यों में सुझाव और जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाया जा सकता था।
पहले से विवादों में रही नगर पालिका
नगर पालिका शिवपुरी पिछले एक वर्ष से लगातार राजनीतिक खींचतान का केंद्र बनी हुई है। भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों ने नगर पालिका अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चाबंदी की थी, जिसके बाद परिषद में समन्वय की कमी साफ दिखाई दी। विकास कार्यों की गति प्रभावित हुई और कई योजनाएं अधूरी रहीं। वहीं शासन स्तर पर लंबित जांचों पर भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे माहौल में एल्डरमैन की नियुक्ति को लेकर विपक्ष और आम नागरिकों के बीच मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई लोगों का कहना है कि यह फैसला विकास से ज्यादा राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश नजर आता है।
एल्डरमैन की भूमिका क्या होगी ?
मनोनीत पार्षद परिषद की बैठकों में हिस्सा लेकर शहर की समस्याओं को उठा सकते हैं, विकास कार्यों पर सुझाव दे सकते हैं और सरकार की योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में सहयोग कर सकते हैं। हालांकि उनकी भूमिका सलाहकार होती है और वास्तविक प्रभाव उनकी सक्रियता तथा परिषद के साथ समन्वय पर निर्भर करेगा।
जिले की पुरानी नगर परिषदों में ये बने एल्डरमैन
कोलारस:ओपी भार्गव, जसवंत पोल, पद्म जैन, संजीव चौधरी।
बदरवास: प्रकाश ओझा, हित कुमार श्रीवास्तव, मोहित सिंघल, सुरेश सोनी।
पिछोर:रामती अहिरवार, सत्येंद्र पाठक, केपी कुशवाह, अनिल सोनी।
खनियाधाना:उर्मिला यादव, मयंक जैन, अजय झा, हिमांशु झा।
पोहरी:आनंद धाकड़, कुसुम लखन, अशोक गुर्जर, पूरन कुशवाह
बैराड़: विजय यादव, अनीता ओझा, राजकुमार शर्मा, हाकिम सेन।
करैरा:अटल तिवारी, नरेश चौरसिया, दीपक गुप्ता, सुनीता अहिरवार।
नरवर: विकास जैन और प्रेमवती खटीक।
नई नगर परिषदों में भी नियुक्तियां
हाल ही में गठित नई नगर परिषदों रन्नौद और मगरौनी में भी चार-चार एल्डरमैन नियुक्त किए गए हैं।
रन्नौद:शिवेंद्र सिंह जाट, भूपत यादव, वीरेंद्र भदौरिया और गौरव तिवारी।
मगरौनी: परमाल सिंह गुर्जर, खेमराज कुशवाह, गुड्डन सोनी और पंजाब सिंह।
शिवपुरी समाचार स्पेशल:
एल्डरमैन की नियुक्ति के साथ जिले की सभी नगरीय निकायों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये मनोनीत पार्षद शेष एक वर्ष में शहर और नगर परिषदों के विकास को नई दिशा दे पाएंगे, या फिर यह नियुक्तियां केवल राजनीतिक संदेश बनकर ही रह जाएंगी। आने वाले महीनों में उनकी सक्रियता और परिषदों के कामकाज से इसका जवाब मिलेगा।

प्रतिक्रियाएं मूल्यवान होतीं हैं क्योंकि वो समाज का असली चेहरा सामने लातीं हैं। अब एक तरफा मीडियागिरी का माहौल खत्म हुआ। संपादक जो चाहे वो जबरन पाठकों को नहीं पढ़ा सकते। शिवपुरी समाचार आपका अपना मंच है, यहां अभिव्यक्ति की आजादी का पूरा अवसर उपलब्ध है। केवल मूक पाठक मत बनिए, सक्रिय साथी बनिए, ताकि अपन सब मिलकर बना पाएं एक अच्छी और सच्ची शिवपुरी। आपकी एक प्रतिक्रिया मुद्दों को नया मोड़ दे सकती है। इसलिए प्रतिक्रिया जरूर दर्ज करें।