माधव टाइगर रिजर्व में इस समय आठ बाघ मौजूद हैं, जिनमें दो शावक भी शामिल हैं। ऐसे में वन विभाग किसी भी प्रकार का जोखिम लेने के मूड में नहीं है। कान्हा में सामने आए केनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) के खतरे को देखते हुए यहां लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। यह वायरस आमतौर पर कुत्तों में पाया जाता है, लेकिन संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने से यह वन्यजीवों और बाघों तक भी पहुंच सकता है।
गांवों में कुत्तों और मवेशियों के वैक्सीनेशन की तैयारी
माधव टाइगर रिजर्व प्रबंधन अब पार्क क्षेत्र से लगे गांवों में कुत्तों और मवेशियों का वैक्सीनेशन कराने की तैयारी कर रहा है। इसका मकसद संक्रमण को जंगल तक पहुंचने से पहले ही रोकना है। वन विभाग का मानना है कि यदि गांवों के पालतू जानवर संक्रमित हुए तो यह वायरस वन्यजीवों तक पहुंच सकता है, जिससे टाइगर रिजर्व में बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
ये पांच गांव बने संवेदनशील
माधव टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद अधिकांश गांवों का विस्थापन हो चुका है, लेकिन अभी भी पांच गांव ऐसे हैं जो पार्क क्षेत्र के दायरे में बने हुए हैं। इनमें लखनगवां, डोगर, अर्जुनगवां, बाम्होरी और हरनगर शामिल हैं। वन विभाग के अनुसार ये गांव सबसे ज्यादा संवेदनशील हैं, क्योंकि यहां वन्यजीवों की आवाजाही बनी रहती है। कई बार ग्रामीणों और वन्यजीवों का आमना-सामना भी हो चुका है। यही वजह है कि इन गांवों में विशेष निगरानी रखी जा रही है।
डीएफओ बोले- हर गतिविधि पर नजर
माधव टाइगर रिजर्व के डीएफओ हरिओम ने बताया कि रिजर्व क्षेत्र में लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। चिन्हित गांवों पर विशेष फोकस रखा गया है और वन अमला हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए है। जरूरत पड़ने पर गांवों में वैक्सीनेशन अभियान भी चलाया जाएगा, ताकि बाघों और अन्य वन्यजीवों को संक्रमण से सुरक्षित रखा जा सके।

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