शहर में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि जब किसी सर्वे नंबर पर प्रशासनिक रोक लगी है, खसरे में स्पष्ट उल्लेख दर्ज है और पटवारी द्वारा 12 नंबर कॉलम में भी प्रतिबंध अंकित किया जा चुका है, तो आखिर रजिस्ट्री किस नियम के तहत हो रही है?
39 वार्डों में अवैध कॉलोनियों का जाल
पूर्व कलेक्टर द्वारा शिवपुरी शहर के सभी 39 वार्डों में मौजूद कई अवैध कॉलोनियों में भूखंडों के क्रय-विक्रय पर रोक लगाई गई थी। आदेश में स्पष्ट कहा गया था कि प्रतिबंधित जमीनों की न तो रजिस्ट्री होगी और न ही नामांतरण। इसके बावजूद शहर में प्लॉटों की खरीद-फरोख्त बदस्तूर जारी है।
नियमों के अनुसार किसी कॉलोनी को वैध घोषित करने के लिए कॉलोनाइजर को जमीन का डायवर्सन कराना, टीएनसीपी से नक्शा पास कराना और रेरा की अनुमति लेना जरूरी होता है। लेकिन शिवपुरी में दो-तीन कॉलोनियों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश कॉलोनियां बिना वैधानिक अनुमति के काटी जा रही हैं।
प्रतिबंधित क्षेत्रों में भी जारी है रजिस्ट्री का खेल
नोहरीखुर्द, राजपुरा, रेलवे स्टेशन के आसपास, झींगूरा के सर्वे नंबर 71 और 78, स्टार वैली, नमो नगर और मेडिकल कॉलेज के पीछे सहित शहर के एक सैकड़ा से अधिक क्षेत्रों में प्रशासन ने जमीनों के क्रय-विक्रय पर रोक लगा रखी है।
इसके बावजूद रजिस्ट्रार कार्यालय में इन क्षेत्रों के प्लॉटों की रजिस्ट्री रोजाना हो रही है। प्रशासन को रजिस्ट्रियों से स्टांप ड्यूटी के रूप में राजस्व मिलता जा रहा है, लेकिन जब खरीदार नामांतरण कराने तहसील पहुंचते हैं तो उन्हें पता चलता है कि जमीन पर रोक लगी है। इसके बाद महीनों तक तहसील और राजस्व कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
तहसील में लंबित पड़े हैं सैकड़ों नामांतरण
शिवपुरी तहसील में ही करीब एक सैकड़ा से अधिक नामांतरण ऐसे हैं जो सर्वे नंबर पर रोक होने के कारण लंबित पड़े हैं। परेशान खरीदार कभी पटवारी तो कभी तहसील कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। आरोप यह भी हैं कि कुछ मामलों में रिश्वत के दम पर नामांतरण कराने का खेल भी चल रहा है। वहीं दूसरी ओर भू-माफिया बिना किसी डर के लगातार प्लॉट बेच रहे हैं। प्रशासनिक कार्रवाई न होने से उनके हौसले बुलंद हैं।
तीन साल पहले लगी रोक, फिर भी हो गई रजिस्ट्री
नोहरीकलां और रातौर रोड के आसपास कई ऐसे सर्वे नंबर हैं जिन पर वर्ष 2022-23 से रोक लगी हुई है। नियम के अनुसार इन जमीनों की रजिस्ट्री नहीं होनी चाहिए, लेकिन रजिस्ट्रार कार्यालय में इनकी रजिस्ट्रियां लगातार हो रही हैं। जानकारी के मुताबिक तीन माह पहले ही रातौर रोड क्षेत्र के एक प्रतिबंधित सर्वे नंबर में तीन से अधिक रजिस्ट्रियां हुईं, जबकि उस जमीन पर वर्ष 2023 से रोक लगी हुई थी।
सस्ते प्लॉट के लालच में फंस रहे लोग
भूमाफिया बाजार मूल्य से कम कीमत में प्लॉट बेचकर लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। अधिकांश खरीदार दस्तावेजों की जांच-पड़ताल किए बिना जमीन खरीद लेते हैं। बाद में जब नामांतरण रुक जाता है, तब उन्हें अपनी गलती का एहसास होता है।
एसडीएम बोले- कार्रवाई भी कर रहे हैं
एसडीएम आनंद सिंह राजावत ने कहा कि शहर में कुछ सर्वे नंबरों पर प्रशासन द्वारा रोक लगाई गई है क्योंकि वे अवैध कॉलोनियां हैं। कुछ मामलों में न्यायालयीन विवाद के कारण भी रोक लगती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि जमीन खरीदने से पहले दस्तावेजों की पूरी जांच करें। साथ ही प्रशासन अवैध कॉलोनियां काटने वाले कॉलोनाइजरों पर कार्रवाई भी कर रहा है।

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