शिवपुरी। शिवपुरी शहर में बीते 4 दिन से चला झंडा विवाद आखिरकार शांत हो गया। बुधवार शाम माधव चौक चौराहा एक बार फिर भगवा रंग में रंगा हुआ नजर आया, जब हिंदू संगठनों और प्रशासन की मौजूदगी में पूरे सम्मान के साथ केसरिया ध्वज दोबारा फहराया गया। जैसे ही ध्वज लहराया, मौके पर मौजूद लोगों ने जयघोष किया, जय जय श्री राम के जयकारे लगाए और माहौल धार्मिक उत्साह में बदल गया।
दरअसल, इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 14 अप्रैल को हुई थी, जब डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के मौके पर भीम आर्मी द्वारा छत्री पर नीला झंडा फहराया गया। इसके बाद परशुराम जयंती पर सर्व ब्राह्मण समाज और अन्य संगठनों ने प्रशासन से नीला झंडा हटाकर वहां भगवा ध्वज स्थापित कर दिया। लेकिन यह मामला यहीं नहीं थमा-भीम आर्मी ने इसका विरोध किया और प्रशासन पर दबाव बना।
तनाव उस समय और बढ़ गया जब कलेक्टर दवाब में आ गए और चौराहे से भगवा ध्वज उतार दिया। भीम आर्मी के विध्नसंतोषियों ने इस अवसर पर नारेबाजी करके ऐसे प्रदर्शित किया, मानो उन्होंने कोई जंग जीत ली हो। इसके कारण शहर में सवर्ण समाज, करणी सेना और ब्राह्मण समाज के लोगों में नाराजगी फैल गई। संगठनों ने 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि ध्वज पुनः स्थापित नहीं किया गया तो उग्र प्रदर्शन किया जाएगा।
बुधवार को माहौल निर्णायक मोड़ पर पहुंचा। हिंदू संगठनों ने कलेक्टर से मुलाकात कर ध्वज पुनः फहराने की मांग रखी, जिस पर प्रशासन ने सहमति जताई। शाम होते-होते माधव चौक पर महाआरती की घोषणा के बीच न केवल भगवा ध्वज दोबारा लगाया गया, बल्कि नगर पालिका की क्रेन की मदद से बड़े आकार का ध्वज भी फहराया गया। ध्वज फहराने के बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुटे और इसे “सनातन आस्था की जीत” बताया।
सर्व ब्राह्मण समाज के जिला अध्यक्ष भरत शर्मा का कहना था कि सबसे पहले हिंदू राष्ट्र की कल्पना हमारे मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज ने की थी वह भगवा ध्वज के नीचे हिंदू राष्ट्र के लिए कई युद्ध लड़े थे। सनातन धर्म का प्रतीक हमारा केसरिया ध्वज है और शिवपुरी मे मराठा राजा कैलाश वाली माधौ महाराज की छत्री से भगवा ध्वज को उतारना बडा ही शर्म का विषय था। हमारे विरोध के बाद प्रशासन ने हमारी भावनाओं का सम्मान किया और माधो महाराज की छतरी पर पुन:भगवा ध्वज को फहरा दिया। हम शिवपुरी प्रशासन को धन्यवाद देते है।
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