सांसद सिंधिया जा सकते हैं इंदौर या विदिशा चुनाव लड़ने, गुना से मैदान में उतर सकती है प्रियदर्शनी राजे | SHIVPURI NEWS

Updesh Awasthee
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शिवपुरी। आगामी लोकसभा चुनाव में प्रदेश में 1984 वाला प्रयोग दोहराने के बारे में गंभीरता से विचार कर रही है। उस चुनाव में पूरे देश भर में स्व. राजीव गांधी ने विपक्ष के मजबूत उम्मीदवारों के खिलाफ दमदार प्रत्याशी मैदान में उतारे थे जिसमें कांग्रेस को सफलता हासिल हुई। 

कांग्रेस इस दिशा में पहला प्रयोग दिग्विजय सिंह को भोपाल सीट से प्रत्याशी बनाकर कर चुकी है जिसका जवाब अभी तक भाजपा नहीं दे पाई जबकि भोपाल सीट भाजपा की प्रदेश की सबसे मजबूत सीट है और 1989 से यहां से कांग्रेस को कभी सफलता हासिल नहीं हुई। 

सूत्र बताते हैं कि इसी तरह का प्रयोग कांग्रेस इंदौर और विदिशा सीट पर भी कर सकती है। 
गुना से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का अभी तक यह तय नहीं हो पाया कि पार्टी उन्हें कहां से चुनाव लड़ाएगी। जबकि माना जा रहा था कि गुना से सिंधिया की उम्मीदवारी पहली लिस्ट में ही कांग्रेस द्वारा कर दी जाएगी। 

तीन तीन सूचियां आने के बाद और 29 में से 22 प्रत्याशी घोषित होने के बाद भी सिंधिया की उम्मीदवारी तय न होने से यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि दिग्विजय सिंह की तरह उन्हें भाजपा की मजबूत सीटों में से किसी एक सीट पर उम्मीदवार बनाया जा सकता है। 

प्रदेश में भोपाल के बाद इंदौर और विदिशा भाजपा की सबसे मजबूत सीट है। इंदौर सीट से लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन चुनाव लडऩे से इंकार कर चुकी हैं वह यहां से 1989 से लगातार जीत रही हैं और अभी तक 8 लोकसभा चुनाव जीत चुकी हैं।  इंदौर सीट पर भाजपा के लिए समस्या यह है कि वह किसे चुनाव मैदान में उतारे। 

हालांकि भाजपा की ओर से महापौर मालिनी गौड़ और कैलाश विजयवर्गीय का नाम लिया जा रहा है। कांग्रेस ने भी अभी पत्ते नहीं खोले हैं और इस सीट पर कांग्रेस कब्जा जमाने के लिए गुना से लगातार चार बार जीत रहे सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को टिकट दे सकती है। 

सिंधिया भी संकेत दे चुके हैं कि पार्टी उन्हें जहां से भी उम्मीवार बनाएगी वह चुनाव लडऩे के लिए तैयार हैं। इंदोर सीट से सिंधिया के मैदान में उतरने से चुनाव काफी दिलचस्प हो जाएगा। सिंधिया को विदिशा भेजे जाने का विकल्प भी खुला हुआ है। 

सिंधिया यदि इंदौर या विदिशा में से किसी एक सीट पर चुनाव लड़ते हैं तो अनुमान है कि गुना लोकसभा सीट पर उनकी धर्मपत्नि प्रियदर्शनी राजे सिंधिया को उम्मीदवार बनाया जा सकता है और ग्वालियर से तीन बार से हार रहे अशोक सिंह पर पार्टी एक बार पुन दाव लगा सकती है। अशोक सिंह का टिकट अभी तक फाइनल न होने का कारण सिंधिया का बीटो बताया जा रहा है, लेकिन सच्चाई यह है कि अशोक सिंह एक मजबूत उम्मीदवार हैं। 

तीन बार से लगातार वह भले ही चुनाव हारे हों, लेकिन उनकी पराजय भाजपा के मजबूत से मजबूत से उम्मीदवारों से हुई है और वह भी काफी कम मतों से। दो बार यशोधरा राजे सिंधिसा से वह 36 हजार और 26 हजार मतों से हारे तथा पिछले चुनाव में उन्हें केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने 29 हजार मतों से पराजित किया। अशोक सिंह धनाढय हैं और उनका संसदीय क्षेत्र में अच्छा परिचय है। उनकी विनम्रता उनका सकारात्मक पक्ष है। 

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