अमानवीयता: किराए के ठेले पर मासूम लाश ले गया मजबूर पिता | Shivpuri News - Shivpuri Samachar | No 1 News Site for Shivpuri News in Hindi (शिवपुरी समाचार)

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3/26/2019

अमानवीयता: किराए के ठेले पर मासूम लाश ले गया मजबूर पिता | Shivpuri News

शिवपुरी। जिला अस्पताल प्रबंधन की संवेदनहीनता और अमानवीयता कल रात उस समय उजागर हुई जब अपनी डेढ़ माह की पुत्री की लाश को एंबुलेंस से घर ले जाने को उसके माता और पिता बिलखते रहे, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने एंबुलेंस की व्यवस्था कराने से इंकार कर दिया। 6 घंटे तक अनुनय विनय करने के बाद भी जब एंबुलेंस नहीं मिली तो लाचार बेबश और गरीब आदिवासी पिता ने 150 रूपए किराए पर लेकर हाथ ठेले में रखकर लाश ले जाने का निर्णय लिया। परंतु इसकी जानकारी जब प्रभारी मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को लगी तो वे स्वंय घटनास्थल पर पहुंचे और उनके आदेश के बाद अस्पताल प्रबंधन ने फिर एंबुलेंस मुहैया कराई। इसके बाद बच्ची की लाश एंबुलेंस में रखकर उसके परिजन उनके गृह गांव बेदमऊ ले गए। 
हुआ यूं कि सोमवार की सुबह शिवपुरी से 80 किमी दूर रन्नौद क्षेत्र में आने वाले बेदमऊ के एक आदिवासी परिवार ने अपनी डेढ़ माह की बच्ची देवकी आदिवासी की तबियत खराब होने के कारण जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। जिसकी शाम 4 बजे मौत हो गई थी। इसके बाद डॉक्टरों ने पीडि़त परिवार को घर जाने की सलाह दे दी, लेकिन उसके पास घर जाने के लिए रूपए नहीं थे जिस पर उन्होंने एंबुलेंस की मांग की तो उन्हें 6 घंटे तक अस्पताल प्रबंधन एंबुलेंस सेवा के लिए टहलाता रहा और इसी के चलते रात हो गई और जब उसे अस्पताल प्रबंधन से कोई आशा नहीं दिखाई दी तो वहां मौजूद लोग उसकी सहायता के लिए आगे आए और मृत बालिका के पिता प्रकाश आदिवासी ने अपनी बच्ची की लाश गांव ले जाने के लिए 150 रूपए में एक ठेला किराए से कर लिया और उसे अपने गांव ले जाने के लिए रवाना हुआ।

इसी दौरान वहां कुछ लोगों ने शिवपुरी प्रवास पर आए प्रभारी मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को फोन पर सूचना दे दी। जिन्होंने मानवीयता और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए तुरंत ही अस्पताल की ओर कूच कर दिया। जहां उन्होंने पीडि़त परिवार से चर्चा की और उन्हें चाय नाश्ता कराकर तुरंत ही एंबुलेंस की व्यवस्था कराने के निर्देश सीएमएचओ अर्जुन लाल शर्मा को दिए और इसके बाद बच्ची की लाश एंबुलेंस में रखकर उसके गांव बेदमऊ ले जाई गई। 


मां और दादी विलाप करती रहीं, लेकिन अस्पताल प्रबंधन को दया नहीं आई 

शाम 4 बजे देवकी की मौत के बाद उसकी मां राजाबेटी और दादी अस्पताल चौकी के सामने बैठे रहे। जो देवकी की लाश के सामने विलाप कर रहे थे जिन्हें देखकर वहां मौजूद अस्पताल के कर्मचारियों और लोगों का मन नहीं पसीजा। उन्हें विलाप करते करते रात हो गई तब वहां मौजूद कुछ लोगों ने उनकी सुध ली और उनसे पूछा कि वह दोपहर से किस कारण यहां बैठे है जब प्रकाश ने उन्हें बताया कि उसकी बेटी की मौत हो गई है और अस्पताल प्रबंधन से वह घर जाने के लिए एंबुलेंस की मांग कर रहे है जो उन्हें पिछले 6 घंटों से एंबुलेंस आने की बात कहकर रूके हुए हैं। प्रकाश ने लोगों को बताया कि उसके पास घर जाने तक के लिए पैसे नहीं है और इस कारण वह सरकारी मदद के लिए बैठे हुए हैं। 

मंत्री के निर्देश के बाद भी 45 मिनट बाद पहुंची एंबुलेंस 

सहरिया क्रांति के संयोजक संजय बैचेन द्वारा आदिवासी परिवार की परिस्थिति की जानकारी मिलने पर उन्होंने प्रभारी मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को फोन पर घटना की गंभीरता से अवगत कराया। जिस पर श्री तोमर बड़ी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के साथ रात 11 बजे अस्पताल पहुंचे। जहां उन्होंने पीडि़त पिता प्रकाश आदिवासी से चर्चा की और बेहोश पड़ी मृत बालिका की मां राजाबेटी को होश में लाने के लिए स्वंय पानी पिलाया। 

इसके बाद परिवार के सदस्यों से पूछा गया तो उन्होंने अस्पताल प्रबंधन की पोल खोलकर रख दी। इसके बाद परिवार के तीनों सदस्यों को प्रभारी मंत्री ने चाय और पानी पिलाया और मौके पर सीएमएचओ श्री शर्मा और सिविल सर्जन गोविंद सिंह को बुलाने के लिए कहा, लेकिन सिविल सर्जन का मोबाइल बंद होने के कारण वह वहां नहीं आ सके, लेकिन सीएमएचओ श्री शर्मा वहां आ गए जिन्होंने एंबुलेंस की व्यवस्था कराई, लेकिन उनके कहने के बाद भी लगभग 45 मिनट बाद एंबुलेंस वहां पहुंची तब कहीं जाकर मृत बालिका का शव और उसके परिजनों को बेदमऊ भिजवाया गया। 

रूपए नहीं थे इसलिए मैंने ठेला किराये से लिया : प्रकाश आदिवासी 

मृत बालिका के पिता प्रकाश आदिवासी ने प्रभारी मंत्री को बताया कि उसकी आर्थिक स्थिति काफी खराब है और ऐसी स्थिति में उसके पास घर जाने के लिए रूपए नहीं थे। उसने डॉक्टरों और अस्पताल के कर्मचारियों से एंबुलेंस के लिए काफी मिन्नतें की, लेकिन उन्होंने उन्हें यह कहते हुए टहलाते रहे कि एंबुलेंस आने वाली है, लेकिन जब देवकी की लाश अकडऩे लगी तो उसने ठेले से लाश को घर ले जाने का निर्णय लिया और वहां मौजूद कुछ लोगों ने उसे 150 रूपए भी दे दिए। इसके बाद वह ठेला किराए से लेकर आया और 80 किमी दूर अपने गांव जाने के लिए रवाना होने लगा। 

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