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2/08/2019

गुना-शिवपुरी सीट से सिंधिया या उनकी धर्मपत्नी फायनल, BJP को नही मिल रहा प्रत्याशी | Shivpuri News

शिवपुरी। सिंधिया परिवार के लिए सुरक्षित समझी जाने वाली गुना शिवपुरी लोकसभा सीट पर यह लगभग तय लग रहा है कि कांग्रेस की ओर से चार बार से लगातार जीत रहे सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया अथवा उनकी धर्मपत्नि प्रियदर्शनी राजे सिंधिया चुनाव लड़ेंगी, लेकिन भाजपा की ओर से अभी कोई रणनीति स्पष्ट नहीं है। 

हालांकि गुना शिवपुरी और अशोकनगर जिले के वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता चाहते हैं कि पार्टी यहां से या तो पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अथवा केंद्रीय मंत्री उमा भारती को उम्मीदवार बनाए जिससे कम से कम सिंधिया की घेराबंदी इस संसदीय क्षेत्र में अवश्य हो सके, लेकिन भाजपा आलाकमान की ओर से अभी तक कोई रणनीति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। 

पार्टी के किसी दमदार नेता ने सिंधिया के मुकाबले चुनाव लडऩे में दिलचस्पी भी नहीं दिखाई है। कोलारस विधायक वीरेंद्र रघुवंशी अवश्य सिंधिया से मुकाबले की इच्छा व्यक्त कर चुके हैं, लेकिन बताया जाता है कि पार्टी ने किसी विधायक को लोकसभा चुनाव में न उतारने की पॉलिसी बनाई है। जिससे उनके चुनाव लडऩे की संभावना भी काफी कम है। 

ग्वालियर चंबल संभाग में हाल में संपन्न हुए विधानसभा के चुनाव के जो परिणाम स्पष्ट हुए हैं वह कांग्रेस के लिए काफी आशानुकूल हैं। कांग्रेस ने संभाग की 34 विधानसभा सीटों में से 26 सीटों पर विजयश्री प्राप्त की। ग्वालियर संसदीय क्षेत्र की 8 सीटों में से कांग्रेस को 7 और गुना संसदीय क्षेत्र की 8 सीटों में कांग्रेस को 6 सीटें मिली। ग्वालियर संसदीय क्षेत्र से पिछले तीन चुनावों से कांग्रेस पराजित हो रही है। 

इस कारण कांगे्रस गुना और ग्वालियर दोनों सीटों से सिंधिया परिवार के सदस्यों को उम्मीदवार बनाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। जिससे यह संभावना है कि सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की धर्मपत्नि  प्रियदर्शनी राजे सिंधिया अपने पति के संसदीय क्षेत्र गुना से चुनाव मैदान में उतरेंगी और ग्वालियर से ज्योतिरादित्य सिंधिया स्वयं मोर्चा संभाल सकते हैं। इस रणनीति से कांग्रेस गुना और ग्वालियर दोनों सीटों पर कब्जा करने की फिराक में हंैं। जबकि दूसरी ओर भाजपा में हताशा और निराशा का वातावरण है। 

गुना संसदीय क्षेत्र में तो भाजपा के पास कोई ऐसा मजबूत स्थानीय प्रत्याशी नहीं है जो सांसद सिंधिया को चुनौती दे सके। इसी कारण 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बाहरी मजबूत प्रत्याशियों क्रमश: पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा और जयभान सिंह पवैया को चुनाव मैदान में उतारा, लेकिन श्री मिश्रा जहां ढाई लाख मतों से और वहीं मोदी लहर में पवैया 1 लाख 20 हजार से अधिक मतों से चुनाव हार गए। चुनाव हारने के बाद पवैया का मनोबल इतना कमजोर हुआ कि उन्होंने गुना शिवपुरी संसदीय क्षेत्र की ओर पीछे मुडक़र भी नहीं देखा। 

हालांकि 2014 के चुनाव में जिला मुख्यालय की गुना और शिवपुरी विधानसभा सीटों पर श्री पवैया ने कांग्रेस प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया को पराजित किया था। लेकिन इसके बाद भी पवैया स्वयं सिंधिया के मुकाबले चुनाव लडऩे के लिए इच्छुक नहीं हैं। भाजपा की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि गुना संसदीय क्षेत्र में वह अपना कोई मजबूत प्रत्याशी विकसित नहीं कर पाई। स्थानीय प्रत्याशी सिंधिया से मुकाबला करने के लिए स्वयं मानसिक रूप से उत्सुक नहीं है। 

गुना और शिवपुरी जिले के भाजपा कार्यकर्ता चाहते हैं कि सिंधिया के मुकाबले के लिए या तो पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान या केंद्रीय मंत्री उमा भारती को चुनाव लड़ाया जाए। इस विषय में हालांकि पार्टी की इच्छा तो स्पष्ट नहीं है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि न तो श्री चौहान और न ही उमा भारती गुना सीट पर सिंधिया से दो दो हाथ करने के लिए तैयार हैं। 

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