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लोकतंत्र सैनानियों की पेंशन पर रोक के आदेश को बताया असंवैधानिक, मीसाबंदी जाएगें हाईकोर्ट | Shivpuri News

शिवपुरी। हाल ही में मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने उल्टे सीधे जो आदेश जारी किए हैं उनमें मुख्य आदेश आज लोकतंत्र सैनानी (मीसाबंदियों) को प्रत्येक माह मिलने वाली पेंशन को रोकने का आदेश संबंधित बैंक कलेक्टरों एवं ट्रेजरी को जारी किया है। जो असंवैधानिक एवं भ्रम फैलाने वाला आदेश हैं। मीसाबंदी लोकतंत्र सैनानी संघ शिवपुरी ने इस का घोर विरोध किया है तथा इस आदेश को हाईकोर्ट में ले जाने की बात कहीं है। 

उल्लेखनीय है कि 1975 में इन्द्रागांधी सरकार ने भारत के अंदर आपातकाल लगाया था। जिसके तहत रात्रि में घर में अपने बच्चों के साथ सो रहे सामाजिक, राजनैतिक एवं कांग्रेस, जनसंघ, आरएसएस, समाजवादी, कम्युनिष्ठों को आदि रात के बाद अपनी पुलिस से सोते में उठाकर ले जाया गया तथा सालों इन लोगों को वेकसूर जेल में बंद कर परिवार एवं अपने जनों से दूर कर सालों जेल में कैद रखा। 

आपातकाल में कानूनी धारायें लगाकर न्यायालय के अधिकार निरस्त किए गए मीसाबंदी धारा लगाकर ऐसे हजारों लोगों को भारत वर्ष के अदर निरोध किया गया। आपातकाल की अवधी में इन लोगों को यह जानने का आधिकार नहीं था कि हमें किस अपराध में बंद किया गया हैं। मध्यभारत की राजमाता, लोकमाता श्रीमती विजयाराजे सिंधिया जैसे बड़े-बड़े राष्ट्रहितैषी लोगों को भी नहीं बख्शा गया। उ.प्र. में ऐसे मीसाबंदियों को सालों बंद रहने के बाद मुलायम सिंह सरकार ने सबसे पहले पेंशन के रूप में गुजारा भत्ता दिया था। 

उसके अंतर्गत प्रत्येक मीसाबंदी को अपना परिवार पालने के लिए स्वतंत्रता संग्राम सैनानी के समकक्ष रखा था। उसके बाद 2008 में मध्य प्रदेश के समस्त मीसाबंदियों को बकायदा संविधान बनाकर शिवराज सिंह सरकार ने भी इन मीसाबंदियों को लोकतंत्र सैनानियों को पेंशन जारी की जिनमें समाजवादी, सामाजिक, कांग्रेसी, आरएसएस एवं जनसंघ के साथ-साथ हजारों बेकसूर नागरिकों को पेंशन चालू की। अब मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनते ही इन लोकतंत्र सैनानियों को 2008 से प्रारंभ की गई।

जिस पर रोक लगाने के आदेश जारी किए हैं जबकि लोकतंत्र सैनानी संघ का स्पष्ट विरोध है कि यह आदेश सरासर निस्त योग हैं। अगर सरकार को इस तरह के उटपटांग आदेश जारी करने से पूर्व लोकतंत्र सैनानियों के हक में शिवराज सिंह सरकार ने बनाए गए कानून को निरस्त करने से पूर्व मध्य प्रदेश की कैबिनेट, विधानसभा और राज्यपाल की अनुमति ली जाना आवश्यक होकर गजट में प्रकाशन होना आवश्यक था। मीसा बंदियों ने इस आदेश की घोर निंदा करते निस्तर करने की मांग की हैं।   
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