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बैराड भावांतर घोटाला: गल्ला व्यापारी गोयल किसान बनकर भावातंर में माल बेचते पकडे गए | Bairad, Shivpuri News

शिवपुरी। खबर जिले के पोहरी अनुविभाग के बैराड कस्बे से आ रही हैं कि बैराड के व्यावसाई दयाल चंद गोयल किसान बनकर उडद बेचते पकडे गए है। बताया जा रहा है कि उक्त व्यापारी ने भावातंर योजना का लाभ लेने के लिए किसान की जमीन का खसरा लगाकर भावातंर योजना का पंजीयन कराया था। 

जानकारी के अनुसार बैराड के व्यापारी दयालचंद गोयल आज अपना उडद बेचने बैराड मंडी में पहुचें और अपना उडद तुलवाने लगे। बताया जा रहा है कि मंडी में अचानक एसडीएम पोहरी पहुंच गए और गोयल साहब की उडद बेचने की परमिशन मांग ली,इस पर गोयल ने अपनी उडद बेचने की परमिशन देदी। 

बताया जा रहा है कि भावांतर का लाभ लेने के लिए खबरा नंबर 265—3 गांव जारियाखुर्द जमीन रकवा 1 हैक्टेयर एवं 489 ग्राम जारियाखुर्द जमीन लगभग सवा हैक्टेयर को दर्शा कर भांवातर योजना का पंजीयन कराया। जब एसडीएम ने उक्त पंजीयन का रिचैक किया तो उक्त जमीन गीता पत्नि दयाचंद गोयल के स्थान पर रामचरण पुत्र दैवीसिंह धाकड और बचनु पुत्र खचैरा के नाम से निकली। 

बताया जा रहा है कि दयालचंद गोयल का भावांतर योजना में तुलते हुए लगभग 25 क्विटल उडद को तत्तकाल एसडीएम पोहरी मुकेश सिंह ने जप्ती की कार्यवाई कर मंण्डी सचिव वीरेन्द्र स्वर्णकार की जप्ती में दे दिया। 

ऐसे हुुआ यह भावांतर में घोटाला
इसमें सबसे पहले तहसीलदार से पीटू फार्म पर दस्ताखत कराकर भावातंर भुगतान योजना का आनलाईन पंजीयन कराया जाता हैं,उसके बाद उक्त पंजीयन पर जमीन खसरा नंबर सहित दर्ज कराई जाती हैं,जिसमे इस रैकेट द्धवारा यह ध्यान रखा जाता है कि जिस जमीन का पंजीयन वह कर रहे है वह जमीन बंजर होती हैं। उसके बाद उक्त रैकेट के कर्ताधर्ता उक्त जमीन पर पटवारी से मिलकर फसल चढवा लेते हैं। 

उसके बाद इस जमीन का पंजीयन एक खातेधारक के होने से उक्त रैकेट लाखो रूपए की फसल बाजार से खरीदकर भावातंर योजना में किसान बनकर खफा देते है। अगर बात उडद की फसल की करे तो उक्त फसल व्यापारियो से महज 4 हजार रूपए प्रति क्विटल में उक्त रैकेट खदीदता है उसके बाद इस फसल को भावातंर भुगतान योजना में 5600 रूपए प्रति क्विटल खफा देता हैं। 

इनका कहना है
हां में आज रूटीन चैकअप के लिए बैराड मंडी में गया था,एक किसान की फसल तुल रही थी किसान से मैने पंजीयन मांगा तो उसने पंजीयन प्रस्तुत कर दिया,जब मैने उकत जमीन के खसरा नंबर को रिचैक किया तो वह उक्त किसान के नाम से नही थे। जब किसान से पूछताछ की तो वह अलग—अलग जबाब देने लगा। हमने उक्त किसान के माल को जप्त करा दिया हैं। 
अब देखना यह है कि इस तरह से और कितने व्यापारियो ने किसान बनकर और फर्जी पंजीयन कराया हैं। 
मुकेश सिंह एसडीएम,पोहरी 
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