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मेडिकल भर्ती घोटाला:1 करोड की रिश्वत का अनुमान, भ्रष्टाचार के लिए बदल डाले नियम | Shivpuri News

एक्सरे @ललित मुदगल/शिवपुरी। कागज के टूकडे से अस्तित्तव में आया शिवपुरी का मेडिकल कॉलेज लगातार सुर्खियो में बना रहता है। पिछले लोकसभा चुनाव में इस मेडिकल कॉलेज को कागज के टूडके से भाजपा ने निरूपति  किया था। अभी मेडिकल कॉलेज शुरू नही हुआ हैं,लेकिन भर्ती अवश्य हो गई है। मेडिकल कॉलेज की भर्ती में घोटाला किया हैं इसमें 1 करोड से उपर रिश्वत खाने की खबर आ रही हैं। बताया जा रहा है कि भर्ती काण्ड मे भ्रष्टाचार के लिए अपने ही बनाए गए नियम बदल दिए है। आईए इस मामले का एक्सरे करते है। 

जैसा कि विदित है कि अगस्त 2018 में मप्र शासन चिकित्सा विभाग मंत्रालय भोपाल ने एक विज्ञप्ति के माध्यम से शासकीय स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालय शिवपुरी के अधीन रिक्त पदो की सीधी भर्ती निकाली। इस विज्ञप्ति में ड्रेसर ग्रेड 2 के लिए 10 पदो की जगह निकाली। विभाग द्धवारा जारी की गई विज्ञत्ति में इन ड्रेसर भर्ती के नियम भी प्रकाशित किए गए थे। 

बताया जा रहा है कि इन ड्रेसरो के भर्ती में जमकर धांधले वाजी की गई हैं। भ्रष्टाचार के लिए विज्ञप्ति में दिए गए नियम ही बदल दिए गए है। इस विज्ञत्ति में ड्रेसर के लिए 10  पदो की जगह निकाली गई थी। जिसमें सामान्य के 4 समान्य,समान्य महिला 2,अनुसूचित जाति 2,जनजाति 1,पिछले वर्ग 1 जगह निकाली गई। 

इन पदो की भर्ती प्रक्रिया में टोटल 100 मार्क की चयन प्रक्रिया बनाई गई। विज्ञत्ति के अनुसार ड्रेसर ग्रेड पद हैतु योग्यता बाहरवी से साईंस ओर 3 माह का ड्रेसर प्रशिक्षण मांगा गया था। बताया जा रहा है इन ड्रेसर पदो की मेरिट सूची में प्रथम स्थान ज्याति खत्री को दिया है। 

चयन प्रक्रिया में बाहरवी कक्षा के मार्क सूची के हिसाब से 35 अंक दिए गए है,वही ड्रेसर प्रशिक्षण प्रमाण पत्र के 3 वर्ष के 2 अंक प्रतिवर्ष के मान से 6 अंक दिए गए हैं,वही अनुभव के 2 अंक दिए गए है। इस हिसाब से टोटल 43 अंक प्राप्त कर चयन की अंतिम सूची में प्रथम स्थान दिया गया है।

चयन प्रक्रिया की इस प्रक्रिया की इस प्रक्रिया पर सवाल खडे हो रहे हैं। मैरिट सूची में ड्रेसर प्रशिक्षण के प्रमाण पत्र को 3 वर्ष के लिए अंकित किया गया हैं,लेकिन भर्ती विज्ञत्ति ने 3 माह का प्रशिक्षण प्रमाण पत्र की मांग की गई थी। बताया गया है कि इस कॉलम को भ्रष्टाचार के लिए बदल गया है।

सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार भारत में ड्रेसर प्रशिक्षण का डिप्लोमा 3 माह से 1  वर्ष का  होता हैं,फिर कैसे मैरिट सूची बनाने की प्रक्रिया में 3 वर्ष के 6 अंक चयनित आवेदक को कैसे दिए। वही बताया जा रहा है कि इस मैरिट में क्रमांक 5 पर अंकित रितिक कुमार दोहरे को अंक सूची के 32.5 अंक,अनुभव के 2 टोटल 34.5 अंक दिए गए है। आवेदक रितिक कुमार दोहरे को उच्च योग्यता ड्रेसर डिप्लोमा के 5 अंक नही दिए गए है। इस कारण वह इस मैरिट सूची में आने से वचिंत रह गए है।

अब सीधे-सीधे शब्दो में इस भ्रष्टाचार को एक लाईन में लिखने की कोशिश करते है कि ड्रेसर प्रशिक्षण का डिप्लोमा की विज्ञत्ति में मांग 3 माह की थी,चयनित आवेदको को 3 वर्ष के हिसाब से 6 अंक दिए गए है। वह कैसे..........वही बताया गया है। कि पूरे भारत में 3 वर्ष का डिप्लोमा ड्रेसर कोई भी पैरा मेडिकल कॉलेज नही करता हैं। इस मैरिट सूची में 6 अंक पाने वाले आवेदको के पास यह डिप्लोमा भारत के किस मेडिकल ने जारी कर दिया। 

बताया जा रहा है। कि जिन 8 ड्रेसरो की नियुक्ति् इस चयन प्रक्रिया से की है। उनके पास 3 माह का भी ड्रेसर प्रशिक्षण डिप्लोमा भी नही है। इस सुची से बहार हुए योग्य आवेदको ने इस चयन प्रक्रिया पर अपत्ति भी दर्ज कराई र्और सूचना के अधिकार के तहत चयनित आवेदको के 3 वर्ष के डिप्लोमा की मांग की गई तो विभाग ने देने से मना कर दिया,कि लोक सूचना अधिकार बाधता नही है। बताया जा रहा है कि केवल इन 10 ड्रेसरो की नियुक्ति में चयन प्रक्रिया में बैठे अफसरो ने करोडो रूपए डकारे है। 
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