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अघोषित बिजली कटौती:कमलनाथ के काल में दिग्गीराजा की याद लाने लगी है शिवपुरी वासियो को | Shivpuri News

शिवपुरी। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद शिवपुरी में अघोषित विदयुत कटौती का दौर शुरू हो चुका हैं। आमजन का कहना है कि कमलनाथ के काल में दिग्गीराजा की याद आने लगी हैं।शहर और ग्रामीण शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिदिन 4 से 6 घंटे की अघोषित बिजली कटौती की जा रही है। बिजली कटौती से जहां शहर में जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है तथा व्यापार और व्यवसाय पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड रहा है। 

वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत कटौत के कारण किसानों की फसल के सूखने का खतरा उत्पन्न हो गया है। इससे लोगों को दिग्विजय सिंह सरकार की याद आने लगी है। दिग्विजय सिंह सरकार के कार्यकाल में विद्युत कटौती ने सारी सीमाएं तोड़ दी थी और विद्युत कटौती के कारण ही प्रदेश से कांग्रेस सरकार की विदाई हुई थी। लेकिन भाजपा सरकार के आने के बाद नागरिकों ने राहत की सांस ली थी। 

कांग्रेस के प्रदेश सचिव विजय शर्मा का आरोप है कि विद्युत अधिकारियों की नियुक्ति भाजपा सरकार के शासनकाल में हुई थी और वे जानबूझकर माहौल बिगाड रहे हंैं, वह उनकी शिकायत सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया से करेंगे। ताकि यहां के भाजपा परस्त बिजली अधिकारियों के स्थान पर जनहितैषी बिजली अधिकारियों की नियुक्ति की जाए। 

भाजपा के 15 साल के शासनकाल में बिजली सप्लाई की दृष्टि से स्थिति काफी सुखद थी। अघोषित कटौती लगभग बंद हो गई थी और घोषित कटौती भी कभीकभार मेंटेंनेंस आदि के कारण होती थी। लेकिन प्रदेश मेें भाजपा की विदाई के बाद अचानक शिवपुरी में बिजली की अघोषित कटौती शुरू हो गई और लाईट का आना जाना शुरू हो गया। 

सुबह से ही बिजली कटौती प्रारंभ हो जाती है जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। दिन में बिजली कटौती से व्यापार व्यवसाय तथा उद्योग धंधों पर प्रतिकूल असर पड रहा है। रात में भी बिजली कटौती का सिलसिला जारी रहता है और ग्रामीण क्षेत्रों मेें विद्युत कटौती से फसलों को नुकसान पहुंच रहा है। 

इससे लोगों को यह महसूस होने लगा है कि कांग्रेस सरकार आने के कारण बिजली कटौती हुई है। प्रदेश सरकार में जिस तरह से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की दखलअंदाजी बढ़ी है, उससे भी नागरिकों की आशंकाएं बढ़ गई हैं और इससे लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को नुकसान पहुंचने की आशंका है। लेकिन कांग्रेस का आरोप है कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को हराने के लिए जानबूझकर भाजपा परस्त अधिकारियों द्वारा की जा रही है।