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12/06/2018

खरई बेरियर बना बसूली का अडडा, प्रायवेट कटर कर रहे है वसूली, भोपाल तक बटता है बटौना | SHIVPURI NEWS

सतेन्द्र उपाध्याय शिवपुरी। इन दिनों शहर का खरई बैरियल पूरी तरह से बसूली का अडडा बन चुकी है। यहां आए दिन एक के बाद एक बारदातें हो रही है। परंतु प्रशासन पूरी तरह से मौन है और इन ठेकेदारों को बसूली का खुलेआम लाईसेंस जारी कर दिया है। ऐसा नहीं है कि इस पूरे मामले की सूचना बरिष्ट अधिकारीयों को नहीं हो अपितु इस मामले का बटौना खरई से लेकर भोपाल तक बंटता है। जिसके चलते अधिकारी कार्यवाही करने की जहमत तक नहीं उठा पाते। 

जानकारी के अनुसार खरई में एकीकृत जाँच चोकी को पिछले लंबे समय से गुण्डा तत्वों ने अघोषित रूप से कब्जा रखा है बताया जाता है यहां अवैध वसूली के लिए रखे प्राईवेट गुडो द्वारा कार्यवाही का झूटा डर दिखाकर कागजो को जप्त करने कि धमकी देकर अवैध वसूली कि जा रहा है। इससे न केवल राजस्व को हानी पहुंच रही है। बल्कि बैरियर पर लूटपाट का माहौल निर्मित कर रखा था। खरई चैक पोस्ट पर बाहारी गुंडो द्वारा परिवहन विभाग के अधिकारी कोटा नाका चैक पोस्ट पर हाईवे नंबर 27 पर चलने वाले वाहनो से खुलेआम अवैध वसूली करवा रहे है। 

जिससे हर माह सांठगांठ करने वाले जिम्मेदार अधिकारीयो को हर माह लाखो की काली कमाई हो रही है। यह बता दें कि इस गोरखधंधे में आरटीओ, वाणिज्यकर, मण्डी और वन विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत जगजाहीर है। जो प्राईवेट गुंडो कि मदद से खुलेआम अधिकारियो के संरक्षण में सरगने के रूप में चैक पोस्क पर कब्जा जमाकर अवैध वसूली का खेल चला रहे है। सुत्रो से मिली जानकारी के अनुसार आरटीओ चैक पोस्ट से होने वाही काली कमाई का बटौना जिले से लेकर संभाग सहित भोपाल तक पहुंचता है। 

परिवहन विभाग के लाईंसेस की जाती है वसूली


विदित हो कि इस एकीकृत जाँच चोंकी से होकर अंतर्राज्जीय वाहन गुजरते हैं यह मार्ग राजस्थान को जाता है। इस पर से गुजरने वाले वाहनों की चैकिंग फॉरेस्ट, परिवहन, मण्डी और वाणिज्यकर विभाग के द्वारा की जाती है। लोड चैकिंग भी यहीं होती है मगर इन वाहनों से सुविधा शुल्क लेकर वाहनों को एकीकृत सीमा जाँच चोकी पर केन्द्रीय मार्ग से निकाला जाकर इस तमाम जाँच से परे कर दिया जाता है। सूत्रों की मानें तो इस सेन्ट्रल मार्ग से निकासी के एवज में ओवरलोड ट्रक, ट्रॉला से 20 से 25 हजार रुपए प्रति वाहन वसूले जाते हैं। इस कारोबार को राजस्थान और म.प्र. के माफिया तत्वों से मिलकर शिवपुरी के कुछ स्थानीय गुण्डे संचालित करा रहे थे।

ऐसे होती है वसूली


यहां परिवहन चैक पोस्ट पर सबसे पहलेे तो आॅवरलोड गाडियों को रौका जाता है। उसके बाद इन गाडियों की तौल की जाती है। जिसमें क्षमता से अधिक माल होने पर इनपर ट्रेक्स बसूलने का प्राबधान है। परंतु जैसे ही आॅवरलोड गाडी सामने आती है। यहां प्रायवेट लोग सक्रिय हो जाते है और इस गाडी को निकालने के एवज में 2000 से 3000 हजार रूपए तक रेट बताते है। हांलाकि विधिबत तौर से अगर इन गाडियों पर कार्यवाही की जाए तो यह पांच हजार तक पहुंच जाती है। जिसके चलते उक्त वाहन चालक बिना रसीद के ही 2 से 3 हजार के बीच मामला सुलझा कर चलते बनते है। इस राशि को ठेकेदार अपनी जैब में रख लेता है। 

यहां बता दे कि उक्त बैरियल पर भाजपा के एक नेता और क्षेत्र के दबंग सहित शहर के एक डीएसपी के हाथों में इसकी कमान रहती है। जिसके चलते इनके प्रायवेट लोग यहां बसूली का खेल जारी रखते है। अगर कोई कुछ परेशानी दिखाता है तो उसके साथ यह प्रायवेट लोग बदसलूकी सहित मारपीट कर गुण्डागिर्दी पर उतारू हो जाते है। उसके बाद जैसे ही यह मामला इनके आकाओं के पास पहुंचता है इस मामले को शांत करा दिया जाता है। 

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