राघवेन्द्र शर्मा ने पेश की मिशाल: कैरियर दाव पर लगाकर करेंगे मतदान | SHIVPURI NEWS

शिवपुरी। भारत निर्वाचन आयोग व्दारा इस बार मतदान शतप्रतिशत किये जाने हेतु अत्याधिक प्रचार प्रसार कर मतदाता को जागरूक किया है। जिसका प्रभाव आमो खास मतदाता पर हुआ है, जिसका एक विशेष  उदाहरण मप्र में देखने को मिला है जिसमे मप्र बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डॉ राघवेंद्र शर्मा ने अपने कैरियर को दांव पर लगा कर 28 नवम्बर को दिल्ली में राष्ट्रीय बाल आयोग में होने बाले महत्वपूर्ण साक्षात्कार के लिए न जाकर विधान सभा चुनाव में मतदान को प्राथमिकता देते हुए मतदान करने का फैसला लिया है ।यह अपने आप मे एक मिसाल प्रस्तुत की है सही मायने में उन मतदाताओ को  जो घर पर सोते रहने, टीपार्टी या ताश के पत्तो में मशगूल होकर मतदान करने नही जाते हैं उन्हें श्री शर्मा से मतदान की महत्ता की प्रेरणा लेना चाहिए। 

जानकारी के अनुसार 28 नवम्बर 2018 को म प्र में विधान सभा चुनाव के लिए मतदान दिवस है। मतदान अधिक से अधिक हो इसके लिए मप्र शासन ने सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है परन्तु इसी के समानांतर केंद्रीय महिला वाल विकास विभाग व्दारा 28 नवम्बर को ही दिल्ली में राष्ट्रीय वाल संरक्षण अधिकार आयोग में सदस्य पद हेतु साक्षात्कार के लिए प्रत्यासियो को बुलाया गया है जो आश्चर्य जनक है। ऐसी परिस्थिति में चयन समिति एवं विभाग को म प्र के प्रत्यासियो के मतदान अधिकारो को सरंक्षित करते हुए अन्य दिनांक निर्धारित करना उचित  होता परन्तु लोकतंत्र की इस महायज्ञ को दरकिनार करते हुए विभाग व चयन समिति ने 28 नवम्बर को ही साक्षात्कार का दिन रखा है जो विचारणीय है।

उल्लेखनीय है कि म प्र बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डॉ राघवेंद्र शर्मा को योग्यता एवं सभी आवश्यक शर्तो को पूरा करने पर साक्षात्कार हेतु चयन किया गया, उन्होंने मतदान दिवस होने का आधार बताते दिंनाक बढ़ाये जाने का अनुरोध  किया गया परन्तु  मतदान के अधिकार को तबज्जो न देते हुए दिनांक / समय बढ़ाने से इंकार कर दिया। परिणाम स्वरूप श्री शर्मा ने लोकतंत्र के इस महापर्व में मतदान को सर्वोच्च प्राथमिकता  देकर  अपने कैरियर को सेकेण्डरी मानते हुए फैसला किया है कि वह दिल्ली साक्षात्कार के लिए ना जाकर मप्र की पिछोर विधान सभा मे  मतदान के अधिकार का सदउपयोग करेगे ।

विभाग एवं आयोग गंभीरता से लेगा?                 

न्यायालय, आयोग, सरकार और विभाग द्वारा लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए नियमो को शिथिल कर मतदान के लिए छूट दी जा रही है। वही केंद्रीय महिला एवं बाल विकास विभाग एवं बाल आयोग द्वारा साक्षातकार को अतिमहत्वपूर्ण मानकर लोकतंत् में मतदान के इस महापर्व की महत्ता ओर आवश्यकता को दरकिनार करना हठधर्मिता का परिचायक नही है। म.प्र. एवं राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग को मतदान करने की जागरूकता के लिए राघवेंद्र शर्मा जैसे मतदाता को सम्मानित कर साक्षात्कार हेतु समय देने का निर्देश करन। समसामायिक प्रतीत होता है।
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